eMag_Feb 2021_Dalit Andolan | Page 21

पर थोपा गया । यह विशव को इसिाम के झंडे के नीचे लाने का षड्ंत् है । तद्िीय विशवयुद्ध के बाद अंतरा्ष्ट्रीय सिर पर हलाल कॉन्फ्ेंस की जाने लगी । विशव के नेताओं , अफसरों और वयापारियों को यह समझाया गया कि हलाल मानयिाओं से वयापार करने में लाभ ही लाभ होगा । यह बात किसी हद तक ठीक भी है कयोंकि विशव भर का मुसलमान हलाल के प्रति सजग है और हलाल निर्मित वसिुओं व
सेवाओं का प्रयोग करता है । अनय समुदाय जैसे कि यहूदी , ईसाई और हिंदू ऐसे किसी प्रतिबद्धता को नहीं मानते और ना ही इसके प्रतिकार की कोई वयवसथा हैं । पिछले कुछ वरषों से झटका सर्टिफिकेशन अथलॉरिटी इसका विक्प देने का प्रयास कर रही है । आज हलाल लगभग 7 ट्रिलियन अमेरिकी डलॉिर की अर्थवयवसथा बन चुका है । इसको रोकने का
प्रयास झटका सर्टिफिकेशन अथलॉरिटी द्ारा विशव सिर पर किया जा रहा है ।
कुछ वरषों पहले तक भारत की हलाल तंत् में भूमिका बहुत कम थी । परंतुअब एक सुनियोजित तरीके से इस तंत् को मजबूत किया जा रहा है । पहली बार विशव हलाल सममेिन में एक भारतीय मीडिया कंपनी वयापक तौर पर साझेदार बन रही है । यह सममेिन इसी वर्ष नवंबर में सऊदी अरब में होने जा रहा है ।
यहां पर भारतीय कंपनियां विदेशी कमपतनयों और सरकारों से भारत की केवल हलाल / मुससिम मानयिाओं से वचनबद्ध कमपतनयों से वयापार करने का समझौता करके आगामी योजना का निर्धारण करेंगे । अर्थात गैर मुसलमानों से वयापार पर प्रतिघात किया जायेगा । यह न केवल दुर्भागयपूर्ण है बल्क देश को बांटने वाला षड्ंत् है । सरकार को इस
पर कड़े कदम उठाने चाहिए । इस तरह की कंपनियों को बंद कर देना चाहिए और और इस तरह इस तरह के षड्ंत् को रा्ट्रद्रोह के दायरे में माना जाना चाहिए । लगभग दो दशक से हलाल , हलाििनत् , हलाल अर्थ और हलाल माफिया को लेकर मैं और मेरे सहयोगी और हमारे मार्गदर्शक ।
इस धर्मयुद्ध में डटे है । शनैतः शनैतः विजयश्ी की और बढ़ रहे हैं । इस धर्मयुद्ध में सवगवीय बैकुंठ लाल जी शर्मा ने जितना प्रोतसाहन दिया , वह अतु्य है । पूर्व संसद मेजर रंजीत और सवगवीय महाराज दलीप सिंह जूदेव इस धर्मयुद्ध के अभिन्न अंग थे । पीढ़ी बदलने के साथ नए नायक नए अवतार में आये । डाकटर विजय सोनकर शासत्ी आज झटका युद्ध के अतग्म पंसकि के नीतिकार के नाते नए आयाम से दिशा दिखा रहे है । कुछ वर्ष पहले पोलैंड के असरदार लोगों से जब हम ने संपर्क किया तो एक शुरुआत हुई , पोलैंड में हलाल पर लगाम कसी गई , आज यूरोप के कई देशों ने हलाल मांस को प्रतिबंधित कर दिया है । मयंमार में भिक्षु विराथु और श्ीिंका में हमारे तमत् भिक्षु थीरो के प्रयास , उनहें विशवगुरु की श्ेणी में सुशोभित कर रहे हैं । भारत में झटका आंदोलन के अथक प्रयास से बहुत सी कंपनियों ने हलाल मोह छोड़ा और हलाल को दुतःसवपन की तरह भूल कर हलाल मुकि अससितव से वयापार करने लगे हैं । इसी वर्ष भारत की नोडल एजेंसी अपेडा ने मांस निर्यात के लिए हलाल की अनिवार्यता को समापि किया । दक्षिणी तद्िी नगर निगमने भोजनशालाओं को तनदवेश दिए कि बेचे गए मांस की झटका या हलाल पद्धति की जानकारी उपभोकिा को देनी ही होगी । इसी प्रकार केरल के ईसाई संगठनों ने हलाल वसिुए व सेवाएं न लेने का आह्ाहन किया है । ऐसे में सभी को हलाल तंत् के विरुद्ध मुखर होना ही पड़ेगा , जिससे जेहाद के तंत् का नाश किया जा सके ।
( लेखक झटका ्सतटटिफिकेशन अथॉरिटी के अध्षि हैं ।
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