eMag_Feb 2021_Dalit Andolan | Page 20

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जेहाद का जनक और पालक है हलाल व्यवस्ा

ए्स रविरंजन त्संह

रूप से हलाल एक अरबी शबद है , जिसका अर्थ जायज होता सामानय

है । हलाल जेहाद का जनक और पालक है ! जेहाद को कुछ इसिातमक विद्ान दो और कुछ तीन या चार शाखाओं में विभकि करते हैं । इनहें आवशयकता अनुसार 72 या कितनी भी शाखाओं में उपवर्गित किया जा सकता है । जेहादये- अल अक़बर या कबीर अर्थात ग्ैटर जेहाद ( बृहत्त जेहाद ) और जेहाद अल सगीर ( निम्न जिहाद ) दो प्रमुख जेहाद हैं ।
प्रायतः जनमानस व तथाकथित बुद्धिजीवी जो वासिव में बुद्धि परजीवी हैं जेहाद को पतवत् या धर्मयुद्ध समझते हैं या फिर सच जानते हुए भी प्रचार जेहाद की पतवत्िा का ही करते हैं । कुछ लोग इस भ्रम में रहते है कि ग्ेटर जिहाद एक आंतरिक द्ंद है , जिससे प्रतयेक मुसलमान को अपने अंदर की बुराई से युद्ध करना है , और हर सच्ा मुसलमान इस ( ग्ेटर जेहाद ) से इंसानी / दुनिया की बुराई पर विजय प्रापि करता है ।
बुद्धि परजीवी की दृष्ट में जेहादये-अल- सगीर ( लैसर जिहाद ) का अनुकरण करते हुए जो मुसलमान युद्ध करते हैं और काफिरों पर आक्रमण करते हैं , वह भ्रमित मुससिम हैं कुरान के विपरीत और इसिाम से अंजान हैं । इसलिए वह जेहाद / हलाली अज्ानी हैं इसलिए सहानुभूति और क्षमा का पात् हैं , नकि प्रतिशोध या बदले का । उदाहरण सवरूप इसिाम की खातिर तमत् से धोखा करें या ना करें , यह द्ंद विषय हो सकता है । अंिितः हर सच्ा मुससिम इस परीक्षा में सफल होगा , शैतान की चाल में नहीं आयेगा ,
कातफर को तमत् समझने की भूल मान लेगा और इसिाम की विजय होगा ।
परंतु वासितवकता में जेहादी न तो मूर्ख है , न अज्ानी । वह अपना किरदार खूब जनता है । जेहाद केवल जेहाद है । हर जेहादी जायज़ है यानि की हलाल है । धयान दें , हर जेहाद हलाल है , पर हलाल केवल जेहाद तक सीमित नहीं है , बल्क जेहाद हलाल का एक क्षेत् मात् है ।
साधारण भाषा में कहा जाये तो हलाल एक प्रकार का ितज़या या कर है जो हलाल उतपाद या सेवा लेने पर उपभोकिा से सूचित या बिना सूचित किये वसूल किया जाता है । इससे अर्जित धन को प्रयोग जेहाद करने के लिए किया जाता है ।
विशव का हलालीकरण 14सौ वर्ष पहले ही शुरू हो गया था । लेकिन पिछले 70 वरवो के दौरान इसे बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से विशव
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