eMag_Feb 2021_Dalit Andolan | Seite 18

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यह सभी प्राचीनकाल के रिाह्मण हैं । वैदिक काल में पशु बलि केवल धार्मिक औचितय से ही होती थी और उसे वेदविहित कार्य की संज्ा प्रदान की गयी थी । खटिक वर्ग के लोग यातज्क पशु बल और पशु हतया में अंतर रखते थे और कभी भी पशुओं की हतया अथवा उनको काटने के लिए नियुकि नहीं किया जाता था । मधय काल तक पशु बलि केवल यज् और धार्मिक अनु्ठानों के अवसर तक ही सीमित थी । कालांतर में प्राचीन खट्टिक वर्ग का यह कार्य अंत में वर्तमान खटिक वर्ग का वयवसाय बन गया ।
खटिक वर्ग द्ारा अपना गया मांस वयापार प्राचीन काल से ही पैतृक वयवसाय के रूप में सथातपि है । खटिक वर्ग और उनके पूर्वजों द्ारा एकमात् वयवसाय के रूप में यह कार्य प्रारमभ किया था । सच तो यह है कि भारत में ही नहीं , बल्क पूरे विशव में वाणिजय ( वयापार ) प्रक्रिया का जनम मांस वयापार से ही आरमभ हुआ था । आदिमानव का प्रथम आहार वनसपतियों , वनय उपज , फल-रकूि के साथ मांस भी रहा था । जब वह समूहों में रहने लगे तो अपने साथ-
साथ अनय लोगों के लिए भी मांस आहरित करता था और आपस में मिल-बांटकर खा लिया करते थे । मांस से मांस की अदला- बदली ( बार्टर सिसटम ) वाणिजय की प्रथम कड़ी थी ।
मधयकाल में विदेशी मुससिम अक्रांताओं ने हिंदू मंदिरों पर हमला किया तो सबसे पहले खटिक जाति के रिाहमणों ने ही उनका प्रतिकार किया । राजा व उनकी सेना तो बाद में आती थी । मंदिर परिसर में रहने वाले खटिक ही सर्वप्रथम उनका सामना करते थे । तैमूरलंग को दीपालपुर व अजोधन में खटिक योद्धाओं ने ही रोका था और सिकंदर को भारत में प्रवेश से रोकने वाली सेना में भी सबसे अधिक खटिक जाति के ही योद्धा थे । तैमूर खटिकों के प्रतिरोध से इतना भयाक्रांत हुआ कि उसने सोते हुए हजारों खटिक सैनिकों की हतया करवा दी और एक लाख सैनिकों के सिर का ढेर लगवाकर उस पर रमजान की तेरहवीं तारीख पर नमाज अदा की । मधयकालीन बर्बर तद्िी स्िनत में गुलाम , तुर्क , लोदी वंश और मुगल शासनकाल में जब अतयाचारों की
मारी हिंदू जाति मौत या इसिाम का चुनाव कर रही थी तो खटिक जाति ने अपने धर्म की रक्षा और बहू बेटियों को मुगलों की गंदी नजर से बचाने के लिए अपने घर के आसपास सूअर बांधना शुरू किया । इसिाम में सूअर को हराम माना गया है । मुगल तो इसे देखना भी हराम समझते थे । और खटिकों ने मुससिम शासकों से बचाव के लिए सूअर पालन शुरू कर दिया । उसे उनहोंने हिंदू के देवता तव्णु के वराह ( सूअर ) अवतार के रूप में लिया । मुससिमों की गो हतया के जवाब में खटिकों ने सूअर का मांस बेचना शुरू कर दिया और धीरे धीरे यह ससथति आई कि वह अपने ही हिंदू समाज में पददलित होते चले गए ।
मुससिम आक्रांताओं ने भारत पर हमला करके अपनी सत्ता को सथातपि करने के बाद हिनदू जनता पर अतयाचार का जो क्रकूर सिलसिला प्रारमभ हुआ , उससे खटिक वर्ग भी अछूता नहीं रहा । रिाह्मण-क्षतत्य विरोधी मुससिम शासक , जो सवयं मांसाहारी थे , ने पशु काटने का काम पराजित हिनदुओं के साथ
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