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जोड़ा गया है , वही हराम के आधार पर गैर मुससिमों के विरुद्ध अतयाचार एवं नरसंहार को धार्मिक मानयिा दी गयी है । हलाल के आधार पर सिर्फ मांस को ही नहीं , बल्क मानव उपयोग की समसि वसिु को एक ऐसे दायरे में बांध दिया गया , जहां गैर मुससिम को प्रवेश संभव नहीं है । दायरे की सीमाओं को मजबूत करने के लिए एक ऐसे सुनियोजित तंत् और वयवसथा को विकसित किया गया , जिसका वर्तमान सवरूप हलाल प्रमाणपत् के रूप में देखा जा सकता है । कांग्ेस सरकार की धर्मनिरपेक्षता नीति ने हलाल प्रमाणपत् को मानयिा दी , जिससे देश में उसका फैलाव बढता चला गया ।
वर्तमान में खाने-पीने की वसिुओं से लेकर ,
अनिवार्यता के कारण गैर मुससिम वयापारियों को भी हलाल प्रमाणपत् लेने के लिए बाधय किया जाता है ।
क्या है हलराल प्मराणपत्र
कट्टरपंथी मुससिम संगठनों द्ारा जारी किये जाने वाले हलाल प्रमाणपत् के लिए मोटी रकम वसूलने के साथ ही शर्त रखी जाती है कि उतपादनकर्ता को कच्ा माल की आपूर्ति किसी मुससिम से करनी होगी । साथ ही रोजगार में भी सिर्फ मुससिमों को प्राथमिकता दी जाएगी । मुससिम देशों को इन शिषों में कोई छूट नहीं है , लेकिन भारत में जैसे देशों में शिषों में ढील दी गयी है । भारत में हलाल प्रमाणपत् देने का
हलराल की आड़ में मजहब द्हत
हलाल प्रमाणपत् की आड़ में सबसे पहले तो यह सुतनसशचि किया जाता है कि वसिु या सेवा क्षेत् में कार्य करने वाला मुससिम होना चाहिए । साथ ही मजहबी मानयिाओं के अनुरूप हो । हलाल प्रमाणपत् वयावसायिक क्षेत् में मजहबी गतिविधियों को बढ़ावा तो देता ही , साथ ही बाजार में बिक्री को भी निर्धारित करता है । धार्मिक आसथा के नाम पर बाजार एवं वयवसाय पर कब्ज़ा करके एक ऐसे आर्थिक तंत् को पैदा कर दिया गया है , जिसका लक्य सिर्फ मजहबी हितों को पूरा करना है । हलाल
वसत् , असपिाल , घर , गाड़ी सहित मानव उपयोग की सभी वसिुओं को हलाल प्रमाणपत् के दायरे में बांध दिया गया है । हलाल के नाम पर एक ऐसे समानिर तंत् को पैदा कर दिया गया है , जिसका एकमात् लक्य सिर्फ मुससिम हितों को पूरा करना है । हलाल प्रमाणपत् के माधयम से एक ऐसी वयवसथा भारत में ही नहीं , वरन पूरे विषय में फ़ैल चुकी है , जो सिर्फ मुससिम हितों को पूर्ति करने का उद्देशय पूरी करती है । मुससिम देशों से लेकर मुससिम समाज में उनहीं वसिुओं की खरीद की जा रही है , जिनहें एक प्रमाणपत् के माधयम से हलाल घोषित किया गया है । हलाल प्रमाणपत् की
काम मुखय रूप से हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड , हलाल सर्टिफिकेशन सर्विसेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड , जमीयत उलमा-ए-महारा्ट्र , जमीयत उलमा-ए-हिनद हलाल ट्रसट आदि के माधयम से किया जा रहा है । हलाल प्रमाणपत् ’ देने के लिए एक शरिया बोर्ड का गठन किया गया है , जो अपनी संसिुति के बाद ही प्रमाणपत् जारी करता है । भारत में खाद् सामग्ी के साथ ही चिकितसा , होटल , पर्यटन , प्रशिक्षण और वेयर हलॉउस क्षेत्ों में हलाल प्रमाणपत् अनिवार्य है । हलाल प्रमाणपत् न होने की ससथति में मुससिम उपभोकिा गैर मुससिम उतपादों का पूर्ण रूप से बतह्कार करता है ।
प्रमाणपत् तंत् पर सरकार का कोई अंकुश नहीं है और न ही इसके लिए देश में कोई नियंत्क वयवसथा नहीं है । हलाल प्रमाणपत् के माधयम से जकात अर्थात चंदे को भी सुतनसशचि किया जाता है । जकात से जमा होने वाले धन का प्रयोग मजहबी गतिविधियों में खर्च होता है । विशव में आतंकवाद के माधयम से मजहबी हितों का पोषण करने में जकात से जुटने वाले धन की संदिगध भूमिका कई बार सामने आ चुकी है । हलाल तंत् का सञ्ािन निजी मजहबी संसथाओं द्ारा किया जा रहा है और सरकार का किसी प्रकार का नियंत्ण नहीं है । ऐसे में हलाल प्रमाणपत् के माधयम से जमा होने वाले
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