eMag_Dec 2020_Dalit Andolan | Page 45

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तथाकथित दलित- मुस्लिम एकता पर

डॉ आंबेडकर के

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विचार

की राजनीति में दलित- मुशसलम गठजोड़ के तथाकथित भारत

प्रयास को सत्ा की भूख हमटिाने और राजनीतिक अवसरवाद के एक घिनौने सवरूप के रूप में देखा जा सकता है । देश में पहली बार दलित-मुशसलम गठजोड़ का नमूना पाकिसिान के रूप में सामने आया और एकता के नाम पर गठजोड़ के लिए आगे कदम बढ़ाने
वाले दलित नेताओं को बड़े धोखे का सामना करना पड़ा । दलित और मुशसलम समाज की समसयाओं को एक बता कर एकता का दावा करने वाले राजनेता , सार्वजनिक रूप से यह बताने में कोई रूहचि नहीं लेते कि दलित समसया और मुशसलम समसया यानी दोनों समसया एक- दूसरे से काफी भिन्न हैं । हिनदू और मुशसलम धर्म की असमानताओं और दोनों के बीचि भेद
के मूल कारणों का डॉ भीम राव आंबेडकर ने अधययन किया था । डॉ आंबेडकर एक अखंड भारत की रा्ट्रीयता की कामना करते थे और जीवन भर इसी पर कायम रहे । मुशसलम धर्म का अधययन करने वाले डॉ आंबेडकर ने कभी भी राजनीतिक रूप से दलित-मुशसलम गठजोड़ की पैरवी नहीं की थी । बल्क उनिोंने अपने पुसिक " भारत-पाकिसिान का बंटिवारा " में
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