eMag_Dec 2020_Dalit Andolan | Page 42

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सामाजिक भेदभाव का निदान

अनंत पुरोहित

ज वर्तमान भारत की अनेक समसयाओं मे से एक समसया है सामाजिक भेदभाव । विगत कई वर्षों से सामाजिक भेदभाव और इसके निराकरण के लिए अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं या समाजसेवियों ने प्रयास किया । कुछ आंशिक सफलता के अलावा किसी को भी सामाजिक भेदभाव समापि करने में उ्लेखनीय सफलता नहीं मिली और यह आज भी समाज में वयापि है ।

सामाजिक समानता की दिशा में सर्वाधिक उ्लेखनीय कार्य और महतवपूर्ण कदम उठाया बाबा साहब डॉ भीम राव अंबेडकर ने । बाबा साहब ने भारतीय संविधान के माधयम से सामाजिक भेदभाव को समापि करने का प्रयास किया । बाबा साहब ने भेदभाव को हमटिाने के लिए दो महतवपूर्ण पहलुओं को धयान में रखा : सामाजिक असामानता और आर्थिक असमानता । सामाजिक असमानता को हमटिाने के लिए संविधान में असपृ्यिा उनमूलन कानून की वयवस्ा की गई और आर्थिक असमानता को समापि करने हेतु अस्ाई आरक्ण की वयवस्ा ।
भारत में वयापि सामाजिक असामानता केवल एक वर्ग विशेर् के साथ जिसे कि दलित कहा जाता है , के साथ ही वयापक रूप से प्रभावी है । परंतु आर्थिक असमानता को केवल दलितों में ही वयापि नहीं माना जा सकता । बाबा साहब सहित अनय सभी समाजसेवियों ने इस असमानता की खाई को पाटिने के लिए अपने अपने तरीके से प्रयास किया और उन
सभी के प्रयासों में वर्ण वयवस्ा का विरोध समान रूप से मौजूद था । आज भी जितने समाजसेवी हैं या तथाकथित दलित हितैर्ी राजनीतिक दल हैं सभी एक सुर से वर्ण वयवस्ा का विरोध करते हैं । उनकी सोचि यह है कि वर्ण वयवस्ा ही सामाजिक असामानता का जनक है ।
्या वासिव में वर्ण वयवस्ा ही सामाजिक असामानता की जि है ? यदि ऐसा है तो वर्ण वयवस्ा को जि से हमटिा देना चिाहिए । पर यहाँ एक दूसरे पहलू पर भी सोचिना अतिआव्यक है । एक रुगण वयश्ि को ठीक
करने के लिए हचिहकतसक भी एक ही और्हध बार बार नहीं देता यदि और्हध के परिणाम संतोर्जनक न हों तो । पर भारतीय समाज के हचिहकतसक रुपी समाजसेवी इस रुगण समाज को ठीक करने के लिए एंटिी-वर्ण वयवस्ा की ही खुराक दिए जा रहे हैं भले ही इस दवा का कोई लाभ होता न दिख रहा हो । अपने इंजीनियरिंग के दस वर्षों से अधिक कार्यकाल में मैंने अनुभव किया कि समसया जहाँ से उतपन्न हुई उसका समाधान वहीं छुपा मिलता है । अपनी कार्यक्ेत्र में किसी भी समसया का निराकरण मैंने इन चिरणों का पालन करते हुए
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