eMag_Dec 2020_Dalit Andolan | страница 39

महिलाओं को भेदभाव , हिंसा , सामाजिक बहि्कार का सामना करना पड़ रहा है । गरीब , महिला व दलित- ये तीनों फैक्टर उसके शोर्ण में मुखय भूमिका निभाते हैं । देश में तकरीबन 20 करोड़ दलित हैं , उनमें 10 करोड़ दलित महिलाएं शामिल हैं । दलित महिलाओं का आर्थिक , राजनैतिक व प्रशासनिक तौर पर सक्म न होना ही दरअसल उनके साथ होने वाली हिंसा का प्रमुख कारण है । राजनेताओं के लिए दलित श्द वोटि बटिोरने का सुलभ माधयम बन गया है । बसपा तो घोहर्ि रूप से दलितों की पार्टी है , कांग्ेस , भाजपा जैसी रा्ट्रीय पाहटि्डयां भी राजनीति में दलित फैक्टर को भुनाने में पीछे नहींहैं । राजनीतिक दल दलितों का संज्ान लें , यह उनके हित में ही है , दुख यही
है कि दलितों का हित सही अ्षों में हो नहींपा रहा है । इसमें कहींन कहीं सरकारों में इ्छाशक्ि का अभाव है ।
दलित महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकने के जिममेवारी सरकार की है । ज्ाि हो कि भारत ने कई ऐसी अंतररा्ट्रीय मानवाधिकार संधियों पर हसिाक्र किए हुए हैं जो महिला व पुरूर् दोनों की बराबरी की वकालत करते हैं । अंतररा्ट्रीय कानूनों में यह सवीकार किया गया है कि सरकार का काम महज मानवाधिकार संरक्ण प्रदान करने वाले कानूनों को बनाना ही नहीं है बल्क इसके परे ठोस पहल करना भी है । सरकार का काम ऐसी नीतियां बनाना व बजटि में प्रावधान करना है ताकि महिलाएं अपने अधिकारों का इसिेमाल
बिना किसी खौफ से कर सकें । इसके अतिरर्ि जाति आधारित हिंसा व भेदभाव करने वालों को सखि से सखि सजा देना भी है । इंटिरनेशनल कनवेंशन ऑन सिविल ए्ड पॉलहटिकल राइटस के अनुसार भारत सरकार का दायितव ऐसा माहौल बनाना है जिसमें दलित महिलाओं को यंत्रणा , गुलामी , रिूरता से आजादी मिले , कानून , अदालत के सममुख उसकी पिचिान एक मानव के नाते हो । वे निजता व जीने के अधिकार का इसिेमाल कर सकें और उनिें अपनी मजजी से शादी करने का अधिकार भी है । महिलाओं की बेहतरी के लिए कुछ विशेर् योजनाएं बनाई गई ।
ग्ामीण क्ेत्रों में महिला तथा बाल विकास कार्यरिम ( डी . ड््यू . सी . आर . ए .) समशनवि ग्ामीण विकास कार्यरिम ( आई . आर . डी . पी .) की एक उपयोजना के रूप में 1 सितंबर 1982 में प्रारंभ किया गया । इस कार्यरिम का उद्े्य गरीबी की रेखा से नीचिे बसरकर रहे ग्ामीण परिवारों की महिलाओं के लिए सवरोजगार के उपयु्ि अवसर प्रदान करना है । निर्धन महिलाओं की ऋण संबंधी आव्यकताओं को पूरा करने के लिए 1992-93 में एक रा्ट्रीय महिला कोर् की स्ापना की गई । इसके साथ ही ग्ामीण महिलाओं को आर्थिक सुरक्ा प्रदान करने व उनमें बचिि की प्रवृहत् को प्रोतसािन देने के लिए महिला समृशधद योजना की शुरुआत 2 अक्टूबर 1993 से की गई । राय सरकारों द्ारा चिलाए जा रहे महिला विकास कार्यरिमों की सूचिी भी लंबी होती जा रही है ।
बीस सूत्रीय कार्यरिम के कुछ प्रावधानों और परिवार नियोजन कार्यरिम को जो कुछ भी सीमित सफलता प्रापि हुई उसका सीधा लाभ सबसे पहले महिलाओं को मिला । काहिरा सममेलन ( 1994 ) व बीजिंग में महिलाओं पर चििुर्थ हव्व सममेलन ( 1995 ) ने महिला व बाल सवासथय सुधार और महिलाओं के यौन सवासथय व अधिकारों जैसे अनय मुद्ों को भारतीय नीतियों में दाखिल कर दिया । भारत सरकार सोचिी और तय की हुई नीतियों के साथ विदेशी हलकों से आयातित हवचिारों और सलाहों
fnlEcj 2020 Qd » f ° f AfaQû » f ³ f ´ fdÂfIYf 39