eMag_Dec 2020_Dalit Andolan | Seite 12

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घटिाई गई । नयायायिक पुनरावलोकन को कमतर किया गया । अनु्छेद-370 को िटिाये जाने के बाद आम लोगों को पता चिला कि किस तरह क्मीर पर गलत ढंग से राज किया जा रहा था ।
भारतीय संविधान में हवचिार अभिवयश्ि की सविंत्रता है । यह लोकतंत्र का आधार है । आव्यक है कि हम हवचिार की अभिवयश्ि की सविंत्रता को दायरे में रखकर उसका पालन करें । संविधान के उद्े्य में सामाजिक , आर्थिक व राजनीतिक नयाय , समता व बंधुता के रा्ट्रीय संक्प हैं । इसके अनुसार संविधान की सववोपरिता का मुखय शक्ि स्ोि ‘ हम भारत के लोग ’ हैं । संविधान निर्माताओं ने दुनिया के कई संविधानों से अनुभव लिए । आयरलैंड से राजय के नीति निदेशक ततवों एवं संसदीय प्रणाली ब्रिटिश परंपरा का अनुभव है । मूल अधिकार अमेरिकी संविधान के अनुभव हैं । वैसे प्राचिीन भारत में लोकतंत्र व नीति निदेशक ततवों जैसी धारणा पहले भी थी ।
मूल कर्तवयों की सूचिी में पहला कर्तवय है- ‘ संविधान का पालन करें । संविधान ( अनु्छेद 51ए ) में मूल कर्तवयों की सूचिी है । पहला कर्तवय है- ‘ संविधान का पालन करें । उसके आदशषों , संस्ाओं , रा्ट्र-धवज व रा्ट्र-गान का आदर करें ।’ दूसरा कर्तवय सांसकृहिक है , ‘ सविंत्रता के रा्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले आदशषों का पालन करें ।’ तीसरे कर्तवय में देश की एकता , संप्रभुता व अखंडता की रक्ा है । सार्वजनिक संपदा की सुरक्ा भी मूल कर्तवय है । सामाजिक संसकृहि की परंपरा का संवर्धन भी एक कर्तवय है । सामाजिक संसकृहि ’ श्द के भ्रम को सववोच् नयायालय ने दूर किया था ‘ कि सामाजिक संसकृहि का आधार संसकृि भार्ा और साहितय है । यही विभिन्न जनों को एक सूत्र में बांधती है ।’
यह बात बहुत कम लोग को ज्ाि है कि भारत का संविधान दुनिया का सबसे बिा लिखित संविधान है । इसी आधार पर भारत
को दुनिया का सबसे बिा गणतंत्र कहा जाता है । भारतीय संविधान में 448 अनु्छेद , 12 अनुसूहचियां शामिल हैं । यह 2 साल 11 महीने 18 दिन में बनकर तैयार हुआ था । जनवरी 1948 में संविधान का पहला प्रारूप चिचिा्य के लिए प्रसिुि किया गया । 4 नवंबर 1948 से शुरू हुई यह चिचिा्य तकरीबन 32 दिनों तक चिली थी । इस अवधि के दौरान 7,635 संशोधन प्रसिाहवि किए गए जिनमें से 2,473 पर विसिार से चिचिा्य हुई । भारतीय संविधान की मूल प्रति हिंदी और अंग्ेजी दोनों में ही हसिहलहखि थी । इसमें टिाइपिंग या हप्रंटि का इसिेमाल नहीं किया गया था । दोनों ही भार्ाओं में संविधान की मूल प्रति को प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने लिखा था । उनिोंने नंबर 303 के 254 पेन हो्डर निब का इसिेमाल कर संविधान के हर पेज को बेहद खूबसूरत इटिैलिक लिखावटि में लिखा है । इसे लिखने में उनिें 6 महीने लगे थे ।
( साभार )
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