संविधान के पन्नों में श्ीराम और श्ीकृ ष्ण
ने 26 जनवरी , 1950 को पहला गणतंत्र दिवस मनाया । भारत
भारतीय संविधान सभा की आखिरी बैठक 26 नवमबर , 1949 में डॉ . आमबेडकर के प्रसिाव पर मतदान हुआ और संविधान पारित हो गया । भारत के प्रतयेक जन को वा्सवािंत्र्य और विधि के समक् समता सहित सभी मौलिक अधिकार मिले । 1947 तक भारत में ब्रिटिश सत्ा थी । भारत परतंत्र था । 26 नवमबर के दिन से अपना संविधान प्रवर्तन हुआ था । 26 नवमबर का दिन सभी संवैधानिक संस्ाओं , राजनैतिक दलों और देशभ्िों के लिए गहन आतम विश्लेषण का उतसव है ।
संविधान रा्ट्र जीवन की गति का मुखय दिक्सूचक है । भूमि , जन और शासन से ही रा्ट्र नहीं बनते । जाति , मजहब , राजनीति और क्ेत्रीय आग्ि समाज तोििे हैं , संसकृहि ही इनिें जोििी है । भारतीय संविधान निर्माता सनातन सांसकृहिक क्मता से पररहचिि थे । उनिोंने संविधान की हसिहलहखि प्रति में सांसकृहिक रा्ट्रभाव वाले 23 हचित्र सशममहलि किए । मुखपृ्ठ पर राम और कृ्ण तथा भाग 1 में सिंधु सभयिा की समृहि वाले मोहनजोदिो काल की मोहरों के हचित्र हैं । भाग 2 नागरिकता वाले अंश में वैदिक काल के गुरुकुल आश्रम का दिवय हचित्र है । भाग 3-मौलिक अधिकार वाले पृ्ठ पर श्री राम की लंका विजय व भाग 4-राजय के नीति हनददेशक ततवों वाले पन्ने पर कृ्ण-अर्जुन उपदेश वाले हचित्र हैं । भाग 5 में महातमा बुद्ध , भाग 6 में सवामी महावीर और भाग 7 में सम्राट अशोक के हचित्र हैं । भाग 8 में गुपि काल , भाग 9 में हवरिमादितय , भाग 10 में नालंदा विविद्ालय , भाग 11 में उिीसा का स्ापतय , भाग 12 में नटिराज , भाग 13 में भगीरथ द्ारा गंगावतरण , भाग 14 में
मुगलकालीन स्ापतय , भाग 15 में शिवाजी और गुरु गोविनद सिंह , भाग 16 में महारानी लक्मीबाई , भाग 17 और 18 में रिमश : गांधी जी की दांडी यात्रा और नोआखाली दंगों में शांति माचि्य , भाग 19 में नेताजी सुभार् , भाग 20 में हिमालय , भाग 21 में रेगिसिानी क्ेत्र व भाग 23 में लहराते हिंद महासागर की हचित्रावलि है ।
संविधान पारण के बाद अधयक् राजेनद्र प्रसाद ने कहा , ‘ अब सदसयों को संविधान की प्रतियों पर हसिाक्र करने हैं , एक हसिहलहखि अंग्ेजी की प्रति है , इस पर कलाकारों ने हचित्र अंकित किए हैं , दूसरी छपी हुई अंग्ेजी व तीसरी हसिहलहखि हिंदी की ।’ ( संविधान सभा कार्यवाही खंड 12 पृ्ठ 4261 ) भारतीय सभयिा , संसकृहि और इतिहास के छात्रों के लिए संविधान की हचित्रमय प्रति प्रेरक है । संविधान मार्गदशजी है , लेकिन रा्ट्र की समृद्धि संवैधानिक संस्ाओं पर आसीन महानुभावों पर निर्भर है ।
डॉ . राजेनद्र प्रसाद ने संविधान सभा के आखिरी भार्ण ( 26.11.1949 ) में कहा , ‘ संविधान किसी बात के लिए उपबंध करे या
न करे , देश का क्याण उन वयश्ियों पर निर्भर करेगा , जो देश पर शासन करेंगे ।’ अपने आखिरी भार्ण में डॉ . आंबेडकर ने भी प्राचिीन भारतीय परंपरा की याद दिलाते हुए कहा था , ‘ एक समय था जब भारत गणराजयों से सुसहजित था । यह बात नहीं है कि भारत पहले संसदीय प्रहरिया से अपररहचिि था ।’ यहां वैदिक काल से ही एक परिपूर्ण गण वयवस्ा थी । गणेश गणपति थे ।
विखयाि हचित्रकार नंदलाल बोस को भारतीय संविधान की मूल प्रति को अपनी हचित्रों से सजाने का मौका मिला । 221 पेज के इस दसिावेज के हर पन्नों पर तो हचित्र बनाना संभव नहीं था । लिहाजा , उनिोंने संविधान के हर भाग की शुरुआत में 8-13 इंचि के हचित्र बनाए । संविधान में कुल 22 भाग हैं । इस तरह उनिें भारतीय संविधान की इस मूल प्रति को अपने 22 हचित्रों से सजाने का मौका मिला । इन 22 हचित्रों को बनाने में चिार साल लगे । इस काम के लिए उनिें 21,000 मेहनताना दिया गया । �
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