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किया जाएगा । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना था कि हमारा संविधान वैश्वक लोकतंत्र की सववोतकृ्टि उपलब्ध है . यह न केवल अधिकारों के प्रति सजग रखता है , बल्क हमारे कर्तवयों के प्रति हमें जागरूक भी बनाता है । मोदी ने कहा कि पूरी दुनिया जब अधिकारों की बात कर रही थी , तब गांधीजी ने एक कदम आगे बढक़र नागरिकों के कर्तवयों के बारे में बात की । संविधान की भावना अटिल और अडिग रही है । अगर कभी इसे डिगाने के कुछ प्रयास हुए भी हैं , तो देशवासियों ने मिलकर उनको असफल किया है , संविधान पर आंचि नहीं आने दी है । हम हमारे संविधान की मजबूती के कारण ही एक भारत , श्रे्ठ भारत की तरफ आगे बढ़े हैं । हमने तमाम सुधार मिल-जुलकर संविधान के दायरे में रहकर किए हैं । प्रधानमंत्री नरेनद्र मोदी के नेतृतव में संविधान के प्रति जो आस्ा और हव्वास जागा है , वह इतिहास के पन्नों पर दर्ज है । धारा-370 को लेकर जो धारणा बनी हुई थी , उसके
समापि होते ही आम भारतीय को ज्ाि हुआ कि संविधान का दुरूपयोग किस तरह से किया जा रहा था । क्मीर से कनयाकुमारी तक भारत एक है , महज वा्य था लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कागज से निकालकर सचि कर दिखाया है । आज हम कह सकते हैं कि क्मीर से कनयाकुमारी तक भारत सचिमुचि में एक है ।
भारतीय संविधान की आतमा में सामाजिक समरसता मूल में है । ‘ सबका साथ , सबका विकास ’ की जो अवधारणा मोदी सरकार में बनी है , वह संविधान के अनुरूप है । बाबा साहेब आंबेडकर ने संविधान की प्रसिावना में ‘ से्युलर ’ श्द को शामिल करने पर विरोध दर्ज किया था । भारतीय संविधान में सामाजिक समरसता की भावना को भी आघात पहुंचिाया गया । 1956 में बौद्ध धर्म की दीक्ा लेने से उनका अनुसूहचिि वर्ग का दर्जा समापि कर दिया गया था । तब से लेकर 1990 तक अनुसूहचिि वर्ग अपना दर्जा प्रापि करने व
आरक्ण पाने के लिए लििा रहा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई । 1990 में ततकालीन जनता दल सरकार ने संविधान में संशोधन कर पुन : अनुसूहचिि जाति को उनका हक दिलाया । इसी तरह 1989 मे अनुसूहचिि जाति-जनजाति अत्याचारण निवारण कानून बनाया गया था लेकिन सखिी के साथ इस कानून को अमल में लाने में कई तरह की समसया थी । किनिु 2014 में केनद्र में मोदी सरकार आयी तब 2015 में अपेहक्ि संशोधन कर कानून को सखि बनाया ताकि इन वगषों के साथ अनयाय नहीं हो सके । प्रधानमंत्री मोदी ने सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए दो माह के भीतर नयाय दिलाने की वयवस्ा की ।
इस बात का भी समरण रखना होगा कि पिछली सरकारों ने राजय विधानसभाओं को भंग करने वाले अनु्छेद-356 का लगभग सवा सौ बार दुरुपयोग किया । 1975 में की गई आपातकाल की उद्घोषणा अनु्छेद-353 का घोर उ्लंघन थी । नयायालयों की शक्ि
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