दुनिया में सव्यश्रे्ठ है और प्रधानमंत्री नरेनद्र मोदी भारतीय संविधान के मजबूत प्रहरी हैं ।
भारतीय संविधान के प्रति पिछले वर्षों में जो आस्ा और हव्वास का नवीन संचिार हुआ है उसने हव्व में प्रति्ठा अर्जित की है । संविधान सभा ने 22 जनवरी , 1947 को पारित संविधान के उद्े्य में कहा गया था कि ‘ यह प्राचिीन भूमि हव्व में अपना समुहचिि और गौरवपूर्ण स्ान प्रापि करेगी और हव्व शांति व मानव क्याण के लिए पूरा सहयोग देगी ।’ संविधान निर्माण प्रारूप समिति के सभापति डॉ . बी . आर . आंबेडकर का काम विशिष्ट था । डॉ . आंबेडकर ने सभा में कहा था , ‘ जो लोग संविधान से असंतुष्ट हैं , उनिें केवल दो-तिहाई बहुमत प्रापि करना है । यदि वे हनवा्यहचिि संसद
में दो-तिहाई बहुमत भी प्रापि नहीं कर सकते हैं तो यह नहीं समझा जा सकता कि जनसाधारण असंतोर् में उनके साथ है ।’ सभा ने विभिन्न हवर्यों पर 17 समितियां गठित की थीं ।
डॉ . आंबेडकर की यह बात आज भी उतनी ही कारगर है जब उनिोंने संविधान निर्माण के समय कही थी । उनका कहना था कि संविधान की शक्ि उसके संचिालन में है । आज हम गर्व से कह सकते हैं कि वर्तमान मोदी सरकार ने संविधान की रक्ा करने और उसे अधिक शक्ि के साथ प्रति्ठाहपि करने में अहम भूमिका निभाई है । संविधान में निहित सभी उद्े्यों को लोकहित में पूर्ण किया है और भारत के नागरिकों को इस बात की दिलासा दिलायी है कि उनके मूलभूत अधिकारों का हनन नहीं
का श्रे्ठ संविधान है लेकिन संविधान निर्माण से लेकर उसकी तिथि से भारतीय समाज आज से पांचि वर््य पहले तक अनजान था । सरकारें सत्ासीन और सत्ािीन होती रहीं लेकिन किसी ने भी हमारे संविधान की महत्ा को बताने लिए कोई तिथि निर्धारित नहीं की । इस ओर सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही धयान गया । प्रधानमंत्रीनरेनद्र मोदी ने पांचि वर््य पूर्व वर््य 2015 में प्रतिवर््य 26 नवमबर को संविधान दिवस मनाये जाने निर्णय लेकर देश के एक एक नागरिक को गर्व से भर दिया । प्रधानमंत्री मोदी ने 11 अक्टूबर , 2015 को मुंबई में डॉ . आंबेडकर की प्रतिमा का शिलानयास करते हुए एलान किया कि 26 नवंबर संविधान दिवस के रूप में मनाया जाएगा । आज जब हम 71वें संविधान दिवस मना रहे हैं , तब हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि हमारा संविधान पूरी fnlEcj 2020 Qd » f ° f AfaQû » f ³ f ´ fdÂfIYf
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