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मुद्ा

सैकड़ों जातियों का विकास हुआ । फिर किसषी दुर्भागयपूर्ण काल में शूद्र वर्ग कषी जातियां नषीचे कहषी जाने लगीं । रिाह्मण, क्वत्य और वैशय शूद्र को निम्न कहने लगे । इससे राष्ट्रीय क्वत हुई । अब भषी हो रहषी है ।
राजनीति से संभव नहीं जाति वर्ण तोडना
सरकार बनाने और अपनषी अपनषी पार्टियों के लिए अभियान चलाने का राजनैतिक काम आसान है लेकिन सामाजिक परिवर्तन का कार्य कठिन है । अनुसूचित जातियों के बषीच हमने 15 वर्ष काम किया है । यह काम सामाजिक परिवर्तन का है । मेरे विरुद्ध ऊंचषी जातियों के कुछ लोगों ने तमाम अभियान चलाए । मेरषी निंदा हुई । भारतषीय समाज जड़ नहीं है । इसे प्रयत्पूर्वक गतिशषील बनाया जा सकता है । अधिकांश पूर्वजों ने इसे गतिशषील बनाया है । मैंने जाति विरोधषी अभियान चलाकर सषीवित क्ेत् में सफलता भषी पाई है । समाजवादषी डा. राममनोहर लोहिया ने
जाति तोड़ो अभियान चलाया । उनके बाद के समाजवादियों ने जाति आधारित गोलबंदषी कषी राह पकड़षी । जातियों कषी संखया के आधार पर राजनषीवत चलषी । भारतषीय कमयुवनषटों से अपेक्ा थषी कि वे वर्ग संघर्ष के अपने सिद्धांत के लिए अिषीर और गरषीब िगवो के गठन के लिए काम करेंगे । लेकिन उनहोंने भारतषीय संसकृवत कषी निंदा कषी । अलपसंखयक मुससलि वर्ग कषी आसथा स्वीकार कषी । वामपंथ के सिद्धांत में मजहबषी अलगाववादषी अससिता का कोई सथान नहीं है
लेकिन उनहोंने इसका पोषण किया । परिणाम सामने हैं । कमयुवनसट असफल होते रहे । अब वे इतिहास कषी सामग्री हैं । जाति वर्ण कषी अससिता का खातिा राजनषीवत के द्ारा संभव नहीं है । राजनषीवत जाति वर्ण से लाभ उठातषी है । सामाजिक आनदोलन हषी उपाय हैं ।
डा. आमबेडकर की‘ हू वेयर शूद्राज’ पढें भारत के सभषी निवासषी आर्य हैं । ऋगिेद आयवो
सरकार बनाने और अपनी अपनी पार्टियों के लिए अभियान चलाने का राजनैतिक काम आसान है लेकिन सामाजिक परिवर्तन का कार्य कठिन है । अनुसूचित जातियों के बीच हमने 15 वर्ष काम किया है । यह काम सामाजिक परिवर्तन का है । मेरे विरुद्ध ऊंची जातियों के कुछ लोगों ने तमाम अभियान चलाए । मेरी निंदा हुई । भारतीय समाज जड़ नहीं है । इसे प्रयत्नपूर्वक गतिशील बनाया जा सकता है । अधिकांश पूर्वजों ने इसे गतिशील बनाया है ।
कषी हषी रचना है और समूचा वैदिक साहितय भषी । आर्य नसल नहीं थे । शूद्र भषी आर्य थे । आर्य समाज के अविभाजय अंग थे । शूद्र कोई अलग नसल नहीं थे । डा. आमबेडकर ने‘ हू वेयर शूद्राज’ पुसतक लिखषी थषी । यह 1946 में प्रकाशित हुई थषी । प्रश्न है कि कया शूद्र अनार्य थे? डा. आमबेडकर ने लिखा है“ शूद्र आर्य थे । क्वत्य थे । क्वत्य में शूद्र महतिपूर्ण वर्ग के थे । प्राचषीन आर्य समुदाय के कुछ सबसे प्रसिद्ध शसकतशालषी राजा शूद्र थे ।” शूद्र या अनुसूचित जाति के भाई बंधु हमारे अंग हैं । वे हमारे पूर्वज अग्ज थे और हैं लेकिन उनहें सामाजिक दृष्टि में अब भषी पर्यापत समिान नहीं मिलता । शूद्र शबद भषीतर हृदय में कांटे कषी तरह चुभता है । दुनिया अंतररक् नाप रहषी है । भारत भषी चनद्र और मंगल ग्ह तक पहुंच गया है । हम सब विशि का अंग हैं । भारत परिवार के भषी अंग हैं । हम सब सभषी िगवो को अपनाएं । इसषी अपनेपन में भारत कषी ऋद्धि सिद्धि सितृवद्ध कषी गारंटषी है । �
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