Dec 2025_DA | Page 47

धीरज झा

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हरों में रह कर भले हषी हम प्रगतिशषीलता का पैरहन ओढ़ कर आधुनिक सोच के मालिक कहे जाएं लेकिन सच तो यहषी है कि जातिवादषी सोच आज भषी देश के कई इलाकों में मजबूत पकड़ बनाए है । किसषी को भषी उसकषी जाति के नाम से संबोधित करना और नषीचा दिखाना देश के कई इलाकों में आम बात है ।
जाति के नाम को बांड बनाया
प्रगतिशषील सोच रखने वाले ये तो सोचते हैं कि ये जातिवाद खति होना चाहिए लेकिन इसका सटषीक हल किसषी के पास नहीं । ऐसे में इसका हल वहषी निकाल सकता है जिसने इस चुभन को महसूस किया है और इस अपमान को जिया है । ठषीक उसषी तरह जिस तरह सुधषीर राजभर ने ये अपमान महसूस किया और फिर इस अपमान को समिान बनाने कषी कोशिश में जुट गए । सुधषीर बचपन से हषी जातिगत तंज सुनते आए हैं । उनहें उनकषी जाति का नाम लेकर संबोधित किया जाता था, चिढ़ाया जाता था । अब समय बषीतने के साथ सुधषीर ने इसषी जातिगत तंज को एक रिांड में बदल दिया है । आज सुधषीर का‘ CHAMAR’ रिांड देश के साथ साथ विदेशों में भषी सफल हो रहा है । इस रिांड के अंतर्गत सुधषीर बैग और बेलट बनाते हैं । इस रिांड कषी खास बात ये है कि ये इको फ्ेंडलषी और हैंडमेड हैं ।
ग्ामीणों से सुनना पडा जातिगत तंज 34 साल के सुधषीर उतिर प्रदेश के जौनपुर

‘ CHAMAR’ ब्रांड

ज्रति के न्रम को सम्मान सवाहभमान से मजबूत होती वैश्वक वयावसायिक पहचान

से संबंध रखते हैं लेकिन यहां उनका कम हषी आना जाना हुआ है । उनका पालन पोषण मुंबई में हुआ । यहीं से उनहोंने ड्ाइंग और पेंटिंग में बैचलर डिग्री प्रापत कषी । सुधषीर जब भषी अपने गांव जाते तो लोग उनहें‘ भर’ और‘ चमार’ कह कर चिढ़ाते । ये शबद एक तरह से अपमान के रूप में प्रयोग किये जाते थे । समय के साथ सुधषीर ने खुद से एक वादा किया कि वह इस शबद के प्रति समिान वापस लाएंगे । इसके लिए उनहोंने वहषी काम चुना जिससे इस जाति के लोगों कषी पहचान है, यानषी कषी चमड़े का काम ।
धारावी से शुरू हुआ‘ चमार सटूहडयो’
इसके बाद सुधषीर ने मुंबई हषी नहीं, एशिया कषी सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती‘ धारािषी’ के छोटे से कोने में एक रिैंड खोला और इसे नाम दिया‘ चमार सटूवडयो’। सुधषीर ने अपने इस रिांड के द्ारा अनुसूचित जाति और मुससलि समाज के कई लोगों को काम दिया । शुरुआत में सुधषीर कपड़े के बैग बनाते थे लेकिन फिर उनहोंने जाति से जुड़े इस शबद को लोगों के बषीच लाने का
फैसला किया । जिससे कि लोग समझ पाएं कि चमार कोई जाति नहीं बसलक एक एक पेशा था, पेशा है । सुधषीर के रिांड के प्रोडक्टस छोटे सटोर सहित कई बड़े शोरूम तक में उपलबध हैं । इसके साथ हषी ये रिांड ऑनलाइन पलैटफलॉि्व पर भषी उपलबध है ।
जाति के नाम को सफलता का आसमान
सुधषीर के कई प्रोडकट दिल्ली और बिहार सहित कई राजयों में भेजे जाते हैं । इसके अलावा इनके कई प्रोडकट अमेरिका, जर्मनषी और जापान भषी भेजे गए हैं । हालांकि सुधषीर ने इस रिांड को अभषी तक किसषी सटोर कषी शकल नहीं दषी है । इसकषी सिर्फ ऑनलाइन बिक्री होतषी है लेकिन सुधषीर जलद हषी सटोर खोलने वाले हैं । इसके साथ हषी सुधषीर ने CHAMAR HAVELI नाम से भषी एक प्रोजेकट शुरू किया है । इसके लिए उनहोंने राजसथान में 300 साल पुरानषी हवेलषी खरषीदषी है । फिलहाल इसकषी मरमित चल रहषी है । सुधषीर इसे एक ऐसषी जगह बनाना चाहते हैं जहां दुनियाभर के आर्टिसट आ कर रुक सकें । �
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