August 2026_DA | Page 46

बड़ा सवाल

चूंकि भार्त में प्रत्येक जान्त दूसरी जान्त के प्रन्त अछू्त सा व्यवहार कर्ती है । सम्भव्त: ऐसे गुणों सुसजि्त अम्बेडकरवादी कुछ अगड़ी अछू्त जातियोों ने भी भंगी कयो उसी सामं्तवादी नजरिये से देखा । जहां वे एक ओर सवणयों पर समाि्ता का दबाव बना रहे ्थे विीं दूसरी ओर वे भंनगयों से वही रूखा व्यवहार करने में कयोई गूरेज नही कर रहे ्थे । इसका परिणाम यह हुआ भंगी अछूतोों में अछू्त ियो गये ।
है । यहां दलित आंदोलन मेें मेहार जाति के लोगों नबे आपार सफलता अवजरात की है । यही पर डॉ. अम््बबेडकर नबे कामे किया है तथीा धर््म पररिरातन जैसा ्बड़ा आंदोलन यहीं छ़ेड़ा थीा । ्बावजपूद इसके नागपुर के कतिपय भंगी जाति के लोगों को नजरअंदाज कर दें तो इन भंगी जाति के लोगों मेें अम््बबेडकर के आन्दोलन का जपूं तक नही रेंगता उल््टटे िबे यदा कदा यह कहतबे दबेखबे जातबे हैं कि, िबे तो मेहार थीबे उन्होमेनबे मेहारों के लिए किया हमेारबे लिए ्तया किया । किन्तु इसका दु: खद पहलपू यह है कि यह समेाज डॉ. अम््बबेडकर के द्ारा प्रदत् सुविधा जैसबे समेानता का अधिकार तथीा आरक्षण का
अधिकार का भरपपूर उपयोग करता है । इससबे भी यादा सोचनीय तथ्य यह है कि ऐसा वसफ्क अनपढ़ लोग ही नहीं करतबे ्बक््कक पढ़़े-लिखबे तथीा ऊंचबे पदों मेें आनबे वालबे लोग भी ऐसा ही करतबे पायबे जातबे हैं ।
इस आन्दोलन मेें रूकािर् डालनबे वाली िबे ताकतें ्बीच-्बीच मेें सही हो जाती हैं जो इन्हें सं्लकृवत के नामे पर, अंधविशवास के नामे पर, दपूसरबे जन््म के नामे पर गुमेराह करती रहती हैं । साथी ही इन्हें अपनबे ्बारबे मेें, भविष्य के ्बारबे मेें तथीा अपनबे अक््लतत्ि के ्बारबे मेें सोचनबे के सं्बधं मेें कमेजोर ही ्बनाती है । वन्चचय ही इसका कारर् इन जावतयों मेें चबेतना की कमेी सबे है । िबे अभी भी
शोषक एवं उध्दारक मेें फक्क नहीं कर पा रहबे हैं । इसके लिए इस समेुदाय के व्यक््ततयों मेें अध्ययन की प्रवृवत् पैदा होनी जरूरी है ्तयोंकि व्बना अध्ययन के ज्ञान आना संभव नहीं है और अध्ययन के ्बाद ही अपनबे अक््लतत्ि के प्रति चबेतनाशील हुआ जा सकता है, वैसबे भी व्बना ज्ञान के किसी रिांवतकारी पररिरातन की आशा नहीं की जा सकती । दलित आंन्दोलन को उनके घरों तक लबे जानबे की आि्चयकता है इस मेामेलबे मेें इस आन्दोलन को कुछ सफलता वमेली है । कुछ दलित संगठनों, जिन्होंनबे इस समेाज के कई दलित विचारधारा वालबे कायराकताराओं का हपूजपूमे तैयार किया है । जो इस समेाज की जागृति के लिए कामे कर रहबे हैं । अ्ब इस समेाज के चबेतनाशील दलित युिकों की यह जिम््ममेदारी है कि िबे अपनबे समेुदाय को दलित आंदोलन की मेुख्य धारा मेें लायें तथीा इस प्राचीन भारत की प्राचीन सभ्यता की ' सिर पर मेैला ढोनबे ' वाली सं्लकृवत सबे उन्हें निजात दिलायें तथीा दलित चबेतना की इस मेुहीमे मेें इन्हें शावमेल करें । तभी दलित आंदोलन के इतिहास मेें सफाई कामेगारों के विकास कि यबे मेुहीमे रबेखांकित की जा सकेगी । �
46
अगस््त 2026