August 2026_DA | Seite 47

मुद्ा

दशकों से दललतों कता िममांतरण करता रिता है चच्य

डा. विवेक आय्ष

भा रत के दलित कठपुतली के समेान

नाच रहबे है, विदबेशी ताकतें विशबेष रूप सबे ईसाई विचारक, अपनबे अरबोों डॉलर के धन-सम्पदा, हज़ारों कायराकतारा, राजनीतिक शक््तत, अंतराष्ट्ीय ्लतर की ताकत, दपूरदृष््टटि, एनजीओ के ्बड़़े तंत्र, वि्चिविद्यालयों मेें ्बैठ़े शिक्ाविदों आदि के दमे पर दवलतों को नचा रहबे हैं I इसका तात्कावलक लाभ भारत के कुछ राजनबेताओं को वमेल रहा है और हानि हर उस दबेशवासी की की हो रही है, जिसनबे भारत दबेश की पवित्र वमेर्र्ी मेें जन््म लिया है । अंग्बेजों द्ारा भारत छोड़नबे पर अंग्रेज पादररयों नबे अपना बिस््तर-्बोरी समेबेर्ना आरम्भ ही कर दिया थीा ्तयोंकि उनका अनुमेान थीा कि भारत अ्ब एक हिन्दपू दबेश घोषित होनबे वाला है । तभी भारत सरकार द्ारा घोषर्ा हुई कि भारत अ्ब एक धर््मनिरपेक्ष दबेश कहलायबेगा । मेुरझायें हुए पादररयों के चबेहरबे पर ख़ुशी कि लहर दौड़ गई ्तयोंकि सबे्तयुलर यानी धर््मनिरपेक्ष
राज मेें उन्हें कोई रोकनबे वाला नहीं थीा ।
वैचारिक प्रदूर्ण
ईसाई पादररयों नबे सोचा कि स्बसबे पहलबे दवलतों के मेन सबे उनके इष््ट दबेिता विशबेष रूप सबे श्रीरामे और रामेायर् को दपूर किया जाए ्तयोंकि ज्ब तक भगवान श्रीरामे भारवतयों के वदलों मेें जीवित रहेंगबे त्ब तक ईसा मेसीह अपना घर नहीं ्बना पाएंगबे । इसके लिए उन्होंनबे सुनियोजित तरीके सबे शैवक्क प्रदपूषर् का सहारा लिया । विदबेश मेें अनबेक वि्चिविद्यालयों मेें शोध के नामे पर श्रीरामे और रामेायर् को दलित-नारी विरोधी सिद्ध करनबे का शोध आरम्भ किया गया । विदबेशी वि्चिविद्यालयों मेें उन भारतीय छात्रों को प्रिबेश दिया गया जो इस कायरा मेें उनका साथी दबे । रोवमेला थीापर, इरफ़ान ह्बी्ब, कांचा इलैयह आदि इसी रर्नीति के पात्र हैं । कुछ उदाहरर् दबेवखए, जिससबे पता चलता है किकिस प्रकार श्रीरामेजी को दलित विरोधी, नारी विरोधी, अत्याचारी आदि सिद्ध किया गया । शम््बबूक
वध की का्कपवनक और वमेलािर्ी घर्ना को उछाला गया और श्रीरामे जी के श्बरी भीलनी और निषाद राजा केिर् सबे सम््बन्ध को अनदबेखी जानकर की गई । श्रीरामे को नारी विरोधी सिद्ध करनबे के लिए सीता की अवनिपरीक्ा और अवह्कया उद्धार जैसबे का्कपवनक प्रसंगों को उछाला गया I वीर हनुमेान और जामेिंत को ्बन्दर और भालपू कहकर उनका उपहास किया गया ज्बवक वह दोनों मेहान विद्ान्, रर्नीतिकार और मेनुष्य थीबे । इन तथ्यों की अनदबेखी की गई । रािर् को अपनी ्बहन शूर््पनखा के लिए प्रार् दबेनबे वाला भाई कह कर मेवहमेामेंडित किया गया I श्रीरामे और उनके भाइयों को राजगद्दी सबे ्बढ़कर पर्लपर प्रबेमे को वरीयता दबेनबे की अनदबेखी की गई । श्रीकृष््ण जी के मेहान चरित्र के साथी भी इसी प्रकार सबे ्बबेईमेानी हुई । उन्हें भी चरित्रहीन, कामेुक आदि कहकर उपहास का पात्र ्बनाया गया । इस प्रकार सबे नकारात््मक खबेल खबेलकर भारतीय विशबेष रूप सबे दवलतों के मेन सबे श्रीरामे की छवि को व्बगाड़ा गया ।
वेदों के सम्बन्दि में भ्ामक प्रचार
इस चरर् का आरम्भ तो ्बहुत पहलबे यपूरोप मेें ही हो गया थीा । इस चरर् मेें वेदोों के प्रति भारतीयों के मेन मेें ्बसी आ्लथीा और वि्चिास को भ्राक्न्त मेें ्बदलकर उसके ्लथीान पर ्बाइव्बल को ्बसाना थीा । इस चरर् मेें मेुख्य लक्षय दवलतों को रखकर वनधारारित किया गया । ईसाई वमेशनरी भली प्रकार सबे जानतबे है कि गोरक्ा एक ऐसा विषय है जिस सबे हर भारतीय एकमेत है । इस एक विषय को सम्पपूर््ण भारत नबे एक सपूत्र मेें उग् रूप सबे पिरोया हुआ हैं । इसलिए गोरक्ा को विशबेष रूप सबे लक्षय ्बनाया गया । हर भारतीय गोरक्ा के लिए अपनबे आपको ्बवलदान तक करनबे के तैयार रहता है । उसकी इसी भावना को वमेर्ानबे
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