August 2026_DA | Page 45

बड़ा सवाल

हुए और साइमेोन ्बं्बई मेें रहतबे हैं । श्री भोलबे हाई कोर््ट मेें जज रहबे ्बाद मेें िबे लोकसभा के सद्लय थीबे इनका दबेहांत हो चुका है । ्बा्बा साहबे्ब डॉ. अम््बबेडकर नबे श्री भोलबे को 1945 मेें अंतराष्ट्ीय मेजदपूर कांग्रेस मेें सफाई कर््मचाररयों का प्रतिनिधि ्बनाकर भबेजा थीा । ताकि िबे अंतराष्ट्ीय मेंच मेें सफाई कामेगारों की समे्लया को उठा सके ।
्बा्बा साहबे्ब डॉ. अम््बबेडकर नबे भंवगयों के लिए एक ्बहुत ही अच्छा कामे यह किया कि उन्होंनबे ऐसबे कानपून जो भंवगयों के शोषर् के लिए ्बनाए गए थीबे उन्हें समेाप्त करवा दिया । जैसबे ्बहुत सबे नगर निगमोों, म्युवन्लपल कारपोरबेशन मेें सफाई कामे सबे मेना करनबे पर दण्ि का प्रावधान थीा । यबे दण्ि आवथीराक एवं शारीरिक दोनों हो सकता थीा । साथी ही साथी धारा 165 के तहत ऊपर अपील करनबे की भी गुंजाईश नहीं थीी । एक कानपून ऐसा थीा जिसमेें तीन दिन गैर हाजिर होनबे पर 15 वदनों तक जबेल की सजा हो सकती थीी । ज्ब डॉ. अम््बबेडकर कानपून मेंत्री थीबे उन्होंनबे समेपूचबे भारत के नगर निगमोों आदि सबे ऐसबे कानपून समेाप्त करनबे के लिए कदमे उठाया थीा । जिससबे सफाई कामेगारों का शोषर् खत््म हो जाए । आज भी कई नगर निगमोों, कैन्र्ो मेें, ्बोिषों आदि मेें ऐसबे कानपून है जिनमेें सफाई कामेगारों को कड़ी सबे कड़ी सजा दबेनबे के प्रावधान है । परन्तु वोर् की राजनीति उन्हें ऐसबे कानपून का प्रयोग करनबे सबे रोकती है । अनुच्छ़ेद 13 मेें डॉ. अम््बबेडकर द्ारा यह प्रावधान किया गया कि जो कानपून नयबे संविधान मेें दियबे गयबे अधिकारों के विरुध्द है वह वैध नही मेानबे जायेगेें ।
उस समेय जितनबे भी ्बुक्ध्दजीवी जो सफाई कामेगारों सबे ता्कलुक रखतबे थीबे तथीा डॉ. अम््बबेडकर साह्ब के मेुवहमे के समेथीराक थीबे नबे उनके साथी 1956 को ्बौध्दधर््म ग्हर् कर लिया तथीा हिन्दपू धर््म का त्याग कर दिया । यबे संख्या मेहार तथीा अन्य अछूत जाति के िवन्लपत कमे थीी ्तयोंकि उस ि्तत दलित आंदोलन भंगी ्बक््लतयों मेें नहीं पहुंच पाया थीा । खुद नागपुर( जहां दीक्ा ली गई) के सफाई कामेगार
भार्त में प्रत्येक जान्त दूसरी जान्त के प्रन्त अछू्त सा व्यवहार कर्ती है । सम्भव्त: ऐसे गुणों सुसजि्त अम्बेडकरवादी कुछ अगड़ी अछू्त जातियोों ने भी भंगी कयो उसी सामं्तवादी नजरिये से देखा । जहां वे एक ओर सवणयों पर समाि्ता का दबाव बना रहे ्थे विीं दूसरी ओर वे भंनगयों से वही रूखा व्यवहार करने में कयोई गूरेज नही कर रहे ्थे ।
जिनकी यहां ्बहुत ्बड़ी संख्या है इस आंदोलन सबे अछूतबे रहबे ।
्लितंत्रता आंदोलन के दौरान कुछ सामेंतवावदयों की दृष््टटि इस समेाज पर पड़ी । गांधीजी नबे इन्हें हरिजन का नामे दिया तथीा सहानुभपूवत दिखाई । सहानुभपूवत भी ऐसी थीी कि इन्हें इस पु्चतैनी कामोों के लिए ही प्रबेरित करती, िबे कहतबे '' यह पुरुषार््थ का कामे है इसबे मेत छोड़ो । यदि तुमे इस जन््म मेें अपनी जाति का कामे ठीक तरह सबे सबेिाभावना सबे करतबे हो तो तुम्हारा अगला जन््म ऊंची जाति मेें हो सकता है ।'' उनका ऐसा कहनबे के पीछ़े ्तया उद्देश््य थीा, यबे एक अलग विषय है किन्तु उनके इस कथीन का यह असर हुआ कि यह समेुदाय कभी इस गंदबे पबेशबे सबे निजात पानबे के ्बारबे मेें नही सोच सका तथीा मेानव मेल को सिर पर ढोना ही अपनी नियति( धर््म) समेझनबे लगा । दपूसरी ओर इस ्बारबे मेें डॉ. अम््बबेडकर नबे कहा '' एक ब्ाह्मर् या किसी भी अन्य जाति का व्यक््तत भूखोों मेरतबे भी भंगी का कामे नहीं करता । इस गंदबे कामे को छोड़ दबेनबे मेें ही इज्त है ।''
उन्होंनबे आगबे कहा '' हिन्दपू कहतबे है यह गंदबे पबेशबे पुरुषार््थ के कामे हैं । मैैं कहता हपूँ हमेनबे ्बहुत पुरुषार््थ का कामे कर लिया हमे छोड़़े दबेतबे हैं अ्ब तुमे पुरुषार््थ कमेा लो ।''
चपूंकि भारत मेें प्रत्यबेक जाति दपूसरी जाति के प्रति अछूत सा व्यिहार करती है । सम्भित: ऐसबे गुणोों सुसजित अम््बबेडकरवादी कुछ अगड़ी अछूत जावतयों नबे भी भंगी को उसी सामेंतवादी नजरियबे सबे दबेखा । जहां िबे एक ओर सिर्षों पर समेानता का द्बाव ्बना रहबे थीबे िहीं दपूसरी ओर िबे भंवगयों सबे वही रूखा व्यिहार करनबे मेें कोई गपूरबेज नही कर रहबे थीबे । इसका पररर्ामे यह हुआ भंगी अछूतों मेें अछूत हो गयबे । कई भंगी समेुदाय के ्बुक्ध्दजीवी दलित आंदोलन मेें शावमेल हुए किन्तु अन्य अगड़़े अछूत जावतयों के जातिगत प्रश्न पर उन्हें भी ्बगलबे झांकनबे के लिए मेज्बपूर होना पड़ता, इस तरह िबे भी यादा समेय तक आंदोलन की मेुख्यधारा मेें नहीं ठहर पाए । आमे कामेगारों की ्बात ्तया करें ।
इस मेामेलबे मेें दलितोत्थीान के केन्द्र कहबे जानबे वालबे नागपुर का वजरि करना प्रासंगिक
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