August 2026_DA | Page 44

बड़ा सवाल

दलित चेतिता और भयंगी समुदताय

भार्त के दलितोों में सफाई कामगारों की बहु्त बड़ी संख्या ियोिे के बावजूद ये जान्त दनल्त चे्तिा से दूर रिीं ।

भा रत के दवलतों मेें सफाई कामेगारों

की ्बहुत ्बड़ी संख्या होनबे के ्बावजपूद यबे जाति दलित चबेतना सबे दपूर रहीं ।
यह ्बात अम््बबेडकर वावदयों के लिए जितनी दुखदाई है उससबे कहीं यादा विस््मयकारक भी कि आखिर ्तयपूं यबे जातियां डॉ. अम््बबेडकर के अ्लपृ्चयता आंदोलन और विचारधारा सबे नहीं जुड़ सकीं । यह प्रश्न गम्भीरता सबे मेनन करनबे
के लिए ्बाध्य करता है की आखिर ्तया कारर् है कि यबे जातियां दलित आंदोलनों सबे लगभग अछूती रहीं?
्बा्बा साह्ब डॉ. अम््बबेडकर की इच्छा थीी कि सफाई कामेगारों की एक शक््ततशाली दबेशव्यापी सं्लथीा कायमे की जाय जो न केवल सफाई कामेगारों की हालत सुधारनबे का कायरा करबे ्बक््कक उनमेें शिक्ा का प्रसार, सामेाजिक सुधार शरा्ब, तम््बाकू, सिगरबेर्, ्बीड़ी और नशों
सबे छुर्कारा व फिजपूल खचरा अथीिा कजरा सबे निजात के लिए कुछ कामे कर सके । इसी तारतम्य मेें ्बा्बा साह्ब नबे राजा रामे भोलबे और पी. र्ी. ्बोरालबे को समेपूचबे भारत मेें सफाई कामेगारों की समे्लयाओं, कठिनाइयों तथीा जरूरतों का अध्ययन करनबे और रिपोर््ट पबेश करनबे का कामे सौंपा । इसी उद्देश््य सबे उन्होंनबे दबेश का भ्रमेर् किया । डॉ. पी. र्ी. ्बोरालबे ्बाद मेें सिध्दाथीरा कॉलबेज सबे ्बतौर वप्रंवसपल ररर्ायर
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