August 2026_DA | Page 41

चिं्ति

है । परंतु‘ मेदर इंडिया’ नबे जहां इन ्बुराइयों को सामेनबे लानबे का सोद्देश््य कायरा किया और इनके प्रितराकों को वि्चि न्याय मेंच के सामेनबे अपनबे पापों का उत्र दबेनबे के लिए आहपूत किया । इससबे वि्चि मेें यह धारर्ा भी ्बनी है कि हिंदपू इन सामेाजिक ्बुराइयों की कीचड़ मेें फंसकर पतोन्मेुख हो रहबे हैं, वहां भारतीय मेुसलमेान उनसबे मेु्तत हैं और हिंदुओं की तुलना मेें अधिक प्रगतिशील हैं । ऐसी धारर्ा का ्बनना उन लोगों के लिए आ्चचयराजनक है जो भारत मेें मेुस््ललिम समेाज को ्बहुत करी्ब सबे जानतबे हैं । कोई भी
यह प्रश्न पपूछ सकता है कि ्तया कोई ऐसी सामेाजिक ्बुराई है जो हिंदुओं मेें तो है, लबेवकन मेुस््ललिम समेाज मेें नहीं पाई जाती है? डा. आं्बबेिकर नबे इसी प्रश्न की खोज अपनबे पु्लतक“ भारत का विभाजन” पु्लतक मेें की है ।
डा. आं्बबेिकर सामेाजिक व्यि्लथीा के साथी इ्ललामे की पारिवारिक व्यि्लथीा को भी कुरीति के रूप मेें दबेखतबे हैं । मेुस््ललिम पसरानल लॉ सबे शासित होनबे के कारर् मेुस््ललिम समेाज मेें विवाह के लिए कोई न्यपूनतमे आयु सीमेा वनधारारित नहीं की गई है । ्बा्बा साह्ब के अनुसार यह मेुस््ललिम
समेाज की स्बसबे ्बड़ी सामेाजिक कुरीति है । स्त्री के विवाह की न्यपूनतमे आयु वनधारारित न होनबे के कारर् वह शोषित है । मेुस््ललिम समेाज मेें विवाह एक अनु्बंध है, जिससबे स्त्री की स््थथिति दयनीय ्बनती है । मेुस््ललिम कानपून मेें यह व्यि्लथीा है कि पत्नी अपनबे को समेवपरात करनबे के एवज मेें धन अथीिा संपवत् पति सबे मेांग सकती है, जिसबे‘ मेबेहर’ के तौर पर जाना जाता है । मेबेहर( एक प्रकार का दहबेज़) का वनधारारर् विवाह के ्बाद भी किया जा सकता है और यदि कोई राशि वनधारारित नहीं की गई है तो भी पत्नी समेुचित मेबेहर की हकदार है ।
इ्ललामे मेें क््लत्रओं की हीनता पर कुरान सहमेवत दबे दबेता है और उसबे आत््म अभिव्यक््तत और व्यक््ततत्ि के अवसरों सबे वंचित करता है । तलाक के मेामेलबे मेें ऐसी उदारता सबे सुरक्ा की वह अनुभपूवत नष््ट हो जाती है जो एक मेवहला के पपूर््णतः मेु्तत और सुखद जीवन की परमेाि्चयक आधारशिला है । मेुस््ललिम मेवहला के जीवन की यह असुरक्ा उस समेय और ्बढ़ जाती है, ज्ब उसके पति को ्बहुविवाह करनबे और रखैल रखनबे का कानपूनन अधिकार प्राप्त हो जाता है ।
मेुस््ललिम कानपून मेुसलमेानों को एक समेय पर चार मेवहलाओं सबे विवाह करनबे की अनुमेवत दबेता है । परंतु इस तथ्य को वि्लमेृत कर दिया जाता है कि चार कानपूनी पवत्नयों के अलावा मेुस््ललिम कानपून एक मेुसलमेान को अपनी मेवहला गुलामोों सबे भी सहवास करनबे की अनुमेवत दबेता है । मेवहला गुलामोों की संख्या के ्बारबे मेें उस कानपून मेें कुछ भी नहीं ्बताया गया है । उसबे यह भी अधिकार है कि वह व्बना किसी रुकािर् अथीिा कृतज्ञता के उन गुलामोों को अपनबे साथी रख सकता है । उस पर यह ्बंधन भी नहीं है कि वह उनसबे विवाह करबे ।
्बहु विवाह तथीा रखैल रखनबे की प्रथीा विशबेष रूप सबे मेुस््ललिम मेवहला के लिए जिस तरह दुःखदायी है, उसके कारर् जो ्बुराइयां जन््म लबेती हैं, उनका समेुचित रूप सबे वर््णन करनबे के लिए शब्द नहीं हैं । एक मेुसलमेान चार सबे अधिक पत्नियां रख सकता है और मेुस््ललिम कानपून के
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