चिं्ति
अंतगरात साथी मेें रह सकता है । यह तरीका रखैलों के साथी रहनबे का है, जिनकी कुरान नबे खुलकर इजाजत दी है । कुरान मेें चार पत्नियां रखनबे की अनुमेवत दी गई है । मेुइर नबे अपनी पु्लतक‘ लाइफ ऑफ मेोहम््मद’ मेें कहा है कि ज्ब तक दावसयों के साथी रहनबे की यह असीमे अनुमेवत उन्हें प्राप्त रहबेगी, त्ब तक यह आशा नहीं की जा सकती कि मेुस््ललिम देशोों मेें गुलामे रखनबे की प्रथीा पर रोक का कोई हावदराक प्रयास होगा और मेवहलाएं सामेान्यतः सिारावधक उत्पीवड़त हैं ।
मेुस््ललिम मेवहलाओं के लिए अनिवायरा पदारा प्रथीा के पररर्ामस््वरूप मेुस््ललिम मेवहलाओं का अलगाव सुनिश््चचत है । मेवहलाओं सबे यह अपबेक्ा की जाती है कि वह ्बाहर के कमरोों, ्बरामदोों और ्बगीचों मेें न आएं । उनका निवास मेकान के पिछलबे भाग मेें होता है । सभी मेवहलाओं को चाहबे वह जवान हों या वृद्धा एक ही कमेरबे मेें रहना पड़ता है । कोई भी पुरुष नौकर उनकी उपस््थथिति मेें कामे नहीं कर सकता । मेवहला को अपनबे पुत्रों, भाइयों, पिता, चाचा और पति अथीिा
किसी ऐसबे ही नजदीकी रर्चतबेदार को दबेखनबे की अनुमेवत है, वही वि्चिासपात्र होनबे पर ही कोई घर मेें प्रिबेश पा सकता है । वह इ्बादत के लिए मस््जजिद मेें भी नहीं जा सकती और ज्ब कभी उसबे ्बाहर जाना होता है तो ्बुकारा ओढ़ना पड़ता है । ऐसी पृथीकता का मेुस््ललिम मेवहलाओं के ्लिा्लथ्य पर ्बुरा प्रभाव पड़ता है । वह प्रायः खपून की कमेी, क्यरोग, पायरिया और कतिपय अन्य रोगों सबे पीवड़त हो जाती हैं । इन सभी कमेजोररयों के फल्लिरूप, प्रसपूवतकाल मेें उनकी मेृत्यु हो जाती है ।
पदारा प्रथीा के कारर् मेुस््ललिम मेवहलाओं का मेानसिक और नैतिक विकास नहीं होता । ्लि्लथी सामेाजिक जीवन सबे वंचित रहनबे सबे उनमेें अनैतिकता की प्रवृवत् आ जाती है । ्बाहरी दुनिया सबे पपूर््णतः अलग-थीलग रहनबे के कारर् उनका ध्यान तुच्छ पारिवारिक झगड़ोों मेें उलझा रहता है । फल्लिरूप वह अपनी सोच मेें संकीर््ण हो जाती हैं और उनका दृष््टटिकोर् भी संकुचित हो जाता है । भारत के मेुसलमेानों मेें पदारा करनबे
वाली मेवहलाओं की विशाल संख्या को दबेखतबे हुए कोई भी आसानी सबे यह समेझ सकता है कि पदवे की समे्लया कितनी व्यापक और गंभीर है ।
डा. आं्बबेिकर लिखतबे हैं कि पदवे का शारीरिक और ्बौद्धिक प्रभाव भौतिक प्रभाव के मेुका्बलबे काफी कमे पड़ता है । ि्लतुतः पदारा प्रथीा पुरुष और मेवहला दोनों मेें ही यौन सं्बंधी इच्छा को लबेकर गहन संदबेह मेें निहित है और इसका उद्देश््य स्त्राी-पुरुष दोनों को अलग रखकर रोकना ही है । परंतु इस उद्देश््य की प्राक्प्त के ्बजाए पदारा प्रथीा नबे मेुस््ललिम पुरुषों की नैतिकता पर विपरीत प्रभाव डाला है । पदारा प्रथीा के कारर् कोई मेुसलमेान अपनबे घर-परिवार सबे ्बाहर की मेवहलाओं सबे कोई परिचय नहीं कर पाता है । घर की मेवहलाओं सबे भी उसका संपक्क यदा-कदा ्बातचीत तक ही सीवमेत रहता है । ्बच्चों अथीिा वृद्धों के अलावा, पुरुष अन्य मेवहलाओं सबे हिल-वमेल नहीं सकता, अंतरंग साथीी सबे भी नहीं वमेल पाता । मेवहलाओं सबे पुरुषों की यह पृथीकता
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अगस््त 2026