August 2026_DA | Seite 40

चिं्ति

डता. आयंबेडकर की दृष्टि में इस्लामिक सतामताजिक व्यवस्था

डा. शिव पूजन प्रसाद पा्ठक

भा रत का ्लिाधीनता आंदोलन

राजनीतिक आन्दोलन के साथी- साथी एक सामेाजिक आन्दोलन थीा । साथी ही यह भारतीय समेाज मेें आए सामेाजिक विचलनों के सुधारनबे का एक प्रयास भी थीा । वि्लतृत और विशाल भपू-भाग होनबे के कारर् अनके प्रकार की सामेाजिक विविधता भी थीी, जिसमेें धावमेराक विवधता भी शावमेल है । भारत की भपूवमे मेें हिन्दपू, ्बौद्ध जैन एवं अन्य मेतावलम््बी भी थीबे । इ्ललावमेक आरिान्ताओं नबे भारत मेें इ्ललामे का प्रचार किया और लगभग आठ सौ िषषों मेें मेतान्तरर् के मेाध््यम सबे इ्ललामे को अपना पंथी ्लिीकार करनबे वालों की संख्या ्बढ़ती चली गई I
्लिाधीनता आंदोलन के समेय भारत की हिन्दपू सामेाजिक व्यि्लथीा मेें पररितरान खोजा जा रहा थीा, लबेवकन इ्ललामे पंथी की सामेाजिक व्यि्लथीा इससबे ्बाहर रही । इ्ललामे के राजनीतिक और धावमेराक नबेतृत्ि नबे अपनबे समेाज को ्बन्धनों और जकिनों मेें ही रखा अथीारात इ्ललामे के अन्दर की सामेाजिक कुरीवतयों पर न्यपूनतमे या नहीं के ्बरा्बर ही चचारा हुई I
भारत के संविधान वनमेाराता डा. आं्बबेिकर नबे भारत के इ्ललावमेक समेाज मेें व्याप्त कुरीवतयों के सम््बन्ध मेें ्बहुत कुछ लिखा है । यद्यपि डा. आं्बबेिकर इ्ललामे की सामेाजिक व्यि्लथीा को‘ भारत के विभाजन’ के सन्दभरा मेें लिख रहबे थीबे लबेवकन उनकी कुछ ्बातें आज भी अक्रशः सत्य है । वर््तमान सन्दभरा मेें प्रधानमेंत्री मेोदी पसमेांदा मेुस््ललिम समेाज के विकास की ्बात कर रहबे हैं तो समेझना यह भी आि्चयक है कि मेुस््ललिम समेाज मेें पसमेांदा कौन है? और वह ्तया
चाहतबे हैं? पसमेांदा समेाज की मेपूल अवधारर्ा ्तया है?
डा. आं्बबेिकर कहतबे हैं कि हिंदपू समेाज के
दोषों को व्य्तत करनबे वाली सामेाजिक ्बुराइयां सिराविदित हैं । वमेस मेबेयो द्ारा प्रकाशित‘ मेदर इंडिया’ मेें इनका वि्लतार सबे वििबेचन किया गया
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