August 2026_DA | Seite 34

विचार

सीवमेत कर दबे । आरक्षण की यह व्यि्लथीा लागपू करनबे की मेपूल मेंशा यह थीी कि दलित समेाज का प्रतिनिधि ही सही अर्थो मेें दलित समेाज की समे्लयाओं, उनके वहतों, पीड़ाओं और चिंताओं को समेझ सकता है और उनके समेाधान निवारर् की दिशा मेें निष्ठा और ईमेानदारी सबे पहल कर सकता है । सवाल यह पैदा होता है कि ्तया दलित नबेतृत्ि ऐसा कर पा रहा है? इसका जवा्ब खोजनबे पर जो हकीकत सामेनबे आती है, वह ्बबेहद निराश करनबे वाली है । वमेसालें एक नहीं अनबेक हैं, जिनके आलोक मेें इस हकीकत को जांचा, परखा और दबेखा जा सकता है । कहना गलत नहीं होगा कि दलित नबेतृत्ि वसफ्क दवलतों के सहारबे निज विकास का वैभवशाली ग्ाफ रचनबे मेें कामेया्ब हुआ है ।
दवलतों के वहतों-हकों और समग्र विकास की उसबे किंचित परवाह नहीं है । दवलतों के मेसीहा मेाननीय कांशीरामे नबे दलित आंदोलन की धार पैनी कर दवलतों को विकास की डगर पर आगबे ्बढ़नबे की जुझारू वमेसाल पबेश की । उनकी धारदार पैनी रर्नीति के फल्लिरूप ्बसपा दबेश के स्बसबे ्बड़़े प्रदबेश उत्र प्रदबेश के सत्ा सिंघासन तक पहुंचनबे मेें कामेया्ब हुई । यह कांशीरामे के रर्नीतिक कौसल का ही कमेल थीा कि पहलबे उन्होंनबे गठ्बंधन की नीति अपनायी और फिर आगबे चलकर अकेलबे दमे पर ्बसपा ऐतिहासिक जीत का ि़ंका ्बजातबे हुए सत्ा पर आसीन होनबे मेें कामेया्ब रही । तथ्यों के आलोक मेें दबेखा जायबे तो 1991 मेें 9.4 फीसदी वोर् हासिल कर राज्य ्लतर पर जहां ्बसपा नबे राजनीति मेें अपनी प्रतिभागिता दजरा करायी थीी, उसी ्बसपा नबे 2007 मेें 30.7 फीसदी वोर् लबेकर भारी ्बहुमेत सबे अपनी विजय का परचमे लहराया थीा । ्बसपा सुप्रीमेो मेायावती नबे अपनी विविध आयामेी कामेया्बी को रबेखांकित किया । नौकरशाही और सपू्बाई परिदृ्चय पर दवलतों की उपस््थथिति और पहचान को ्बढ़ावा दबेनबे की रर्नीति को भी उन्होंनबे अमेली जामेा पहनाया । दवलतों के राजनीतिक और आवथीराक कद को भी उन्होंनबे ्बढ़ाया, लबेवकन आमे दवलतों के हालत मेें कोई खास फक्क नहीं आया ।
सत्ाप्रस््थ सबे लोकलुभावन कियबे गए अनबेक प्रयासों के ्बावजपूद भपूवमे और मेजदपूरी के झगड़ोों मेें कारगर भपूवमेका निभानबे और असमेानता-गरी्बी निवारर् की नीवतयों को अमेलीजामेा पहनानबे मेें ्बसपा विफल रही । प्रचंड ्बहुमेत सबे सत्ा मेें आयी ्बसपा को 2012 के विधानसभा चुनाव मेें पराजय का मेुंह दबेखना पड़ा ।
दलित नबेतृत्ि के मेपूल वसद्धांत मेें आयबे ्बदलािों का ही नतीजा कहा जायबेगा कि ्बसपा सं्लथीापक कांशीरामे के दौर के कई जुझारू और भरोसबेमेंद दलित नबेता ्बसपा सबे ्बहार कर दिए गए और कुछ असंतुष््ट हो कर पार्टी सबे विमेुख हो गए । राजनीतिक वि्चलबेषकों का मेानना है कि जाति विशबेष के हित साधन और पार्टी विशबेष के अहमे के कारर् 2017 के उत्र प्रदबेश के व्बधानसभा चुनाव मेें भाजपा की प्रचंड जीत और ्बसपा की शर््मनाक पराजय हुई । इसके मेपूल मेें गैर जार्ि दलित जावतयों द्ारा ्बसपा को जातवो की पार्टी कहकर भाजपा को वोर् दबेनबे का सच निहित है । दबेखा जायबे तो जातिगत रोग सबे लगभग सभी राजनीतिक पावर््टयां ग््लत हैं । भाजपा ्बबेशक स्बका साथी-स्बका विकास का अहसास करा रही है । निश््चचत ही उसबे इस संक्कप सपूत्र का राजनीतिक लाभ भी हासिल हुआ है ।
वैसबे दबेखा जायबे तो यह ्बात सच ही लगती
है कि दवलतों के वहतों की लड़ाई लड़नबे के मेोचवे पर तैनात राजनीतिक दल ्बा्बा साह्ब अम््बबेडकर आं्बबेिकर के मेपूलभपूत वसद्धांत सबे भर्क गए हैं । ्बा्बा साह्ब अम््बबेडकर का दवलतों का समग्र विकास और एक समेरस भारत ्बनानबे का सपना थीा । इसको मेपूतरा रूप प्रदान करनबे के लिए उन्होंनबे पपूरबे मेनोयोग के साथी एक सामेाजिक रिांवत का सपूत्रपात्र भी किया । हिन्दपू मेुस््ललिम एकता के पररप्रबेक्षय मेें डॉ अम््बबेडकर का नजरिया किसी भ्रमे का शिकार नहीं है । समेरसता के प्रति उनके विशबेष लगाव का ही इसबे घोतक कहा जायबेगा कि मेुस््ललिम कट्रपंथियोों के विरुद्ध उनका रुख ्बबेहद कठोर थीा । डॉ अम््बबेडकर के समेरस भारत मेें सन्दभरा मेें राष्ट्ीय ्लियं सबेिक संघ की भपूवमेका को भी कदापि नाकारा नहीं जा सकता है । डॉ अम््बबेडकर और डॉ केशव ्बवलरामे हबेिगबेिार, दोनों ही हिन्दपू समेाज के संगठित होनबे मेें आ रही ्बाधाओं के निदान के पक्धर थीबे । ्बबेशक दोनों ही विशिष््ट ह्लताक्रों की सैद्धांवतक डगर अलग-अलग थीी, लबेवकन मेंजिल तक पहुंचनबे का लक्षय एक थीा । डॉ हबेिगबेिार हिन्दपू समेाज को संगठित होनबे की आवाज मेुखर कर रहबे थीबे । उनका मेकसद यह थीा कि हिन्दपू समेाज जाति-भाषा और प्रांतीय भबेदभाव की संकीर््ण सीमेाओं सबे निकल कर सभी पार्लपरिक विद्रबेष भुलाकर एकात््मकता के मेागरा को एकजुर् होकर
34
अगस््त 2026