August 2026_DA | Seite 33

विचार

समेय के पैमेानबे सबे इस सच को कदापि नाकारा नहीं जा सकता है कि दलितोत्थीान सबे समेाज और दबेश का समग्र विकास संभव है । इस शा्चित हकीकत के आलोक मेें हमेारबे संविधान मेें अनुसपूवचत जावतयों और जनजावतयों के सामेाजिक, आवथीराक, शैक्षणिक एवं राजनीतिक क्षेत्र मेें उनके हित और सशक््ततकरर् के लिए अनबेक नियमे, कानपून, प्रावधान तथीा कायरारिमे एवं योजनाएं ्बनायीं गयी हैं । ्बा्बा साहबे्ब भीमे राव अम््बबेडकर नबे अनुसपूवचत जावतयों और जनजावतयों को संवैधानिक धरातल सबे सुदृढ़ करनबे का जो प्रावधान पबेश किया, सही मेायनबे मेें दबेखा जायबे तो उस पर अम्लीकरर् नहीं हो
सका । निश््चचत ही इसका श्रबेय कांग्रेस पार्टी को जाता है । इससबे ्बड़ी विडम््बना ्तया हो सकती है कि कथीनी मेें ्बा्बा साहबे्ब आं्बबेिकर की छवि को भुनाया गया और करनी मेें दलित आंदोलन की धार को " गोठिल " करनबे की भ्रामेक चाल किसी सबे छिपी है । ऐसबे दोहरबेपन को लक्षय कर ्बा्बा साहबे्ब अम््बबेडकर नबे कांग्रेस को जलता हुआ घर ्बताया थीा और दलित नबेताओं को इसमेें शावमेल होनबे के खिलाफ आगाह किया थीा । अतीत के पृष्ठों पर यह हकीकत दजरा है कि कांग्रेस नबे यशवंत राव चव्हार् के मेाध््यम सबे मेहाराष्ट् मेें दलित नबेतृत्ि को हवथीयानबे का कुक्त्सत खबेल खबेला । दलित नबेता उसके इस
चरिियह मेें फंसतबे चलबे गए । उनका तक्क यह थीा कि इससबे वह दलित वहतों का भला कर सकेंगबेI लबेवकन दलित समेाज के समग्र विकास की ्बजाय दलित समेाज के भीतरी जातिवादी पेंच को ऐसा फंसाया गया कि दवलतों का विकास इसी मेें उलझ कर रह गया । अपनी-अपनी डफली पर अपना-अपना राज ्बजाया जाता रहा और दलित चिंतन और दलित विकास मेहज वोर् बैैंक का जरिया ्बन कर रह गया ।
्लितंत्रता के ्बाद ्बा्बा साहबे्ब अम््बबेडकर के चिंतन और आंदोलन सबे लबेकर आजतक सामेाजिक-राजनीतिक दलित आंदोलन के दृष््टटिपथी मेें दवलतों का अंदुरुनी जातिवाद एक विकृत चुनौती ्बनकर खड़ा है । यह ्बात अलग है कि सैकड़ोों जावतयों मेें ्बऱ्े दलित समेाज की कुछ जातियां सामेाजिक न्याय के संवैधानिक प्रावधानों के फल्लिरूप विकास फलक पर अपनी उपस््थथिति दजरा करानबे मेें कामेया्ब हुई है, लबेवकन उनका नजरिया भी समेाज के वंचित दवलतों के प्रति भबेदभाव और उपबेक्ापपूर््ण ्बना हुआ है । इस पररप्रबेक्षय मेें यह कदापि वि्लमेृत नहीं किया जाना चाहिए कि ्बा्बा साह्ब अम््बबेडकर नबे प्रत्यबेक पिछड़़े और शोषित िगरा के लिए आजीवन संघषरा किया थीा । विषमेता और अ्लपृ्लयता जैसी शर््मनाक कुरीवतयों के विरुद्ध उन्होंनबे जिस ्बुलंदी के साथी आवाज उठायी, वह युगों-युगों तक इतिहास के पन्ों मेें अमेर हो गयी । दलित समेाज का समग्र विकास और एक समेरस भारत ्बनानबे की उनकी अपनी परिक्कपना थीी । दबेश की वनिाराचन व्यि्लथीा मेें दलित नबेतृत्ि को सुअवसर मेुहैया करानबे के मेद्दबेनजर लोक सभा, राज्य सभा, विधान सभा और विधान परिषदों मेें दलित समेाज के सद्लयों को आरक्षण की व्यि्लथीा सुनश््चचत की गयी । यह मेहज इसलिए नहीं की गयी थीी कि इसका फायदा हासिल करके कोई दलित सांसद, विधायक या मेंत्री ्बनकर वसफ्क निजी और अपनबे परिवार का हित साधन करबे और अकूत धन सम्पवत हासिल क्रीमी लबेयर के मेद मेें चपूर होकर दलित और मेहादलित की विकासपरक चिंताओं को वि्लमेृवत कर मेात्र वोर् बैैंक के दायरबे मेें
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