August 2026_DA | Page 32

विचार

डा आंबेडकर और डा हेडगेवार

दोिों कता लक्ष्य थता दलित कल्याण

दे श ज्ब गुलामेी की जंजीर तोड़कर

एक लम््बी जदोजहद के ्बाद ्लितंत्र हुआ थीा, त्ब दबेश के सामेनबे अनबेक चुनौतियां खड़ी हुई थीीं । उच नीच, भबेदभाव, अशिक्ा, गरी्बी, ्बबेरोजगारी, ्बबेगारी, रोर्ी-कपडा और मेकान जैसी कई समे्लयाएं दबेश के ्बबेहतर भविष्य निर््ममाण के पथी पर ्बाधक ्बन कर सामेनबे मेौजपूद थीीं । एक और ्लितंत्रता का जश्न मेें डू्बा पररिबेश और दपूसरी तरफ समे्लयाओं सी ग््लत संरिांवत काल । यह एक ऐसा विद्रपूप सच थीा, जिससबे निजात पाना व्यक््तत पैमेानबे की अहमे प्राथीवमेकता थीीं । इस उच्च-निम्न भबेदभाव के खिलाफ मेोहनदास करमेचंद गांधी नबे न वसफ्क अपनी चिंताओं को ि्तत के पन्ों पर अंकित किया, ्बक््कक दवलतों-वंवचतों के सम्मेान और समेृद्धि की दिशा उन्होंनबे संक्कपशील अभियान भी शुरू किया । गांधी जी के अलावा डॉ भीमे राव अम््बबेडकर, डॉ राजेंद्र प्रसाद, लोकमेान्य तिलक, सरदार बल््लभ भाई पऱ्ेल, चिंतक और विचारक पंडित दीन दयाल उपाध्याय, ज्योवत्बा फूलबे आपनबे अनबेक विभूतियोों नबे दबेश की दीन-दशा मेज्बपूत करनबे की दिशा मेें अपनी चिंताओं और अपनबे प्रयासों को पपूरी शिद्दत के साथी मेपूतरा रूप दिया । यह अलग ्बात है कि समेय ्बीतनबे के साथी साथी दलित समेाज मेहज वोर् बैैंक ्बन कर रह गया ।
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