लक्षय
मेवहलाओं की भागीदारी को मेज्बपूत करनबे की दिशा मेें मेहत्िपपूर््ण कदमे हैं ।
समेािबेशी विकास का एक मेहत्िपपूर््ण आयामे ्बुनियादी सुविधाओं तक समेान पहुंच भी है । प्रधानमेंत्री आवास योजना के मेाध््यम सबे करोड़ों गरी्ब परिवारों को प्तके घर वमेलबे हैं । जल जीवन वमेशन के तहत िषरा 2019 मेें जहां लगभग 3.2 करोड़ ग्रामीर् परिवारों के पास नल सबे जल की सुविधा थीी, िहीं अ्ब 15 करोड़ सबे अधिक परिवारों तक यह सुविधा पहुंच चुकी है । ्लिच्छ भारत वमेशन के तहत करोड़ों शौचालयों का निर््ममाण हुआ और खुलबे मेें शौच सबे मेुक््तत की दिशा मेें व्यापक अभियान चलाया गया । यबे योजनाएं सामेाजिक गररमेा और जीवन ्लतर मेें सुधार के मेाध््यम सबे समेािबेशी विकास को मेज्बपूत करती हैं ।
्लिा्लथ्य के क्षेत्र मेें आयुष्मेान भारत- प्रधानमेंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 41 करोड़ सबे अधिक आयुष्मेान काि्ट जारी किए जा चुके हैं और करोड़ों लोगों को कैशलबेस उपचार वमेला है । गरी्ब परिवारों के लिए ्लिा्लथ्य सुरक्ा सामेाजिक न्याय का मेहत्िपपूर््ण आधार है । डॉ. आं्बबेिकर का भी मेानना थीा कि ्लि्लथी नागरिक ही राष्ट् निर््ममाण मेें प्रभावी भपूवमेका निभा सकतबे हैं ।
डिवजर्ल इंडिया और प्रत्यक् लाभ अंतरर्( डी्बीर्ी) नबे भी समेािबेशी विकास की दिशा मेें नया अध्याय जोड़ा है । जनधन-आधार- मेो्बाइल( जैमे) व्यि्लथीा के मेाध््यम सबे सरकारी सहायता सीधबे लाभावथीरायों के खातों मेें पहुंच रही है । इससबे भ्रष्र्ाचार और व्बचौवलयों की भपूवमेका कमे हुई है । डिवजर्ल भुगतान और वित्ीय समेािबेशन नबे गरीबोों, मेवहलाओं और ग्रामीर् समेाज को औपचारिक अर््थव्यि्लथीा सबे जोड़नबे मेें मेहत्िपपूर््ण भपूवमेका निभाई है ।
फिर भी यह कहना उचित नहीं होगा कि सभी चुनौतियां समेाप्त हो गई हैं । राष्ट्ीय अपराध रिकॉि्ट ब्यपूरो के आंकड़़े अनुसपूवचत जाति और अनुसपूवचत जनजाति के विरुद्ध अपराधों की निरंतर चुनौती की ओर संकेत करतबे हैं । गुर्ित्ापपूर््ण शिक्ा तक समेान पहुंच,
आज विकनस्त भार्त की परिकल्पिा ्तभी सार््थक ियोगी जब विकास का लाभ अंन्तम पंक््तति में खड़़े व्यष्क््त ्तक पहुंचे । यदि दनल्त, आदिवासी, पिछड़़े, महिलाएं, किसान, श्रमिक और गरीब सम्मािपूव्षक जीवन जीने लगें, गुणवत्तापूण्ष नशषिा प्राप््त करें, स्वास्थ्य सेवाओं ्तक उनकी समान पहुंच ियो, आन्थथिक अवसर बढ़ें और उन्दिें न्दयाय मिले, ्तभी डॉ. आंबेडकर के समावेशी विकास का सपना साकार ियोगा ।
ग्रामीर् ्बबेरोजगारी, शहरी-ग्रामीर् असमेानता, सामेाजिक भबेदभाव और आय मेें विषमेता आज भी गंभीर विषय ्बनबे हुए हैं । यही कारर् है कि विपक् सरकार सबे इन मेुद्दों पर अधिक प्रभावी काररािाई की मेांग करता है । दपूसरी ओर सरकार
का दावा है कि पिछलबे एक दशक मेें गरी्ब क्कयार्, सामेाजिक सुरक्ा, आधारभपूत सुविधाओं और वित्ीय समेािबेशन के क्षेत्र मेें अभपूतपूर््व वि्लतार हुआ है ।
दरअसल, आज भारतीय राजनीति मेें डॉ. आं्बबेिकर केवल एक ऐतिहासिक व्यक््ततत्ि नहीं, ्बक््कक वैचारिक केंद्र ्बन चुके हैं । भारतीय जनता पार्टी हो, कांग्रेस हो या अन्य दल— सभी उनकी विरासत को अपनबे-अपनबे दृष््टटिकोर् सबे प्र्लतुत करतबे हैं । यह लोकतंत्र की सकारात््मक विशबेषता है कि संविधान, सामेाजिक न्याय और समेािबेशी विकास अ्ब राष्ट्ीय राजनीतिक विमर््श के ्लथीायी विषय ्बन चुके हैं । किंतु डॉ. आं्बबेिकर नबे ्लियं चबेताया थीा कि केवल प्रतीकों का सम्मेान पयाराप्त नहीं, ्बक््कक संविधान की आत्मेा को शासन और समेाज दोनों मेें उतारना होगा ।
आज विकसित भारत की परिक्कपना तभी सार््थक होगी ज्ब विकास का लाभ अंवतमे पंक््तत मेें खड़़े व्यक््तत तक पहुंचबे । यदि दलित, आदिवासी, पिछड़़े, मेवहलाएं, किसान, श्रवमेक और गरी्ब सम्मेानपूर््वक जीवन जीनबे लगें, गुर्ित्ापपूर््ण शिक्ा प्राप्त करें, ्लिा्लथ्य सबेिाओं तक उनकी समेान पहुंच हो, आवथीराक अवसर ्बढ़ें और उन्हें न्याय वमेलबे, तभी डॉ. आं्बबेिकर के समेािबेशी विकास का सपना साकार होगा ।
डॉ. आं्बबेिकर का संदबेश ्लपष््ट थीा—' संविधान केवल शासन चलानबे का द्लतािबेज नहीं, ्बक््कक सामेाजिक पररितरान का साधन है ।' वर््तमान सरकार की अनबेक क्कयार्कारी योजनाएं, सामेाजिक सुरक्ा कायरारिमे, डिवजर्ल समेािबेशन और ्बुनियादी सुविधाओं का वि्लतार इस दिशा मेें मेहत्िपपूर््ण प्रयास के रूप मेें दबेखबे जा सकतबे हैं । िहीं लोकतांत्रिक व्यि्लथीा मेें विपक् की यह भपूवमेका भी उतनी ही मेहत्िपपूर््ण है कि वह इन योजनाओं के प्रभाव, वरियान्ियन और सामेाजिक न्याय के वा्लतविक पररर्ामोों पर निरंतर प्रश्न उठाता रहबे । अंततः यही लोकतांत्रिक विमर््श भारत को उस समेािबेशी विकास की ओर लबे जाएगा जिसकी क्कपना डॉ. भीमेराव आं्बबेिकर नबे संविधान निर््ममाण के समेय की थीी । �
अगस््त 2026
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