लक्षय
कानूनोों और जल नीति तक अनबेक विषयों पर दपूरदशटी विचार प्र्लतुत किए ।
इसी कारर् पिछलबे एक दशक मेें डॉ. आं्बबेिकर की विरासत भारतीय राजनीति का केंद्रीय विषय ्बन गई है । वर््तमान केंद्र सरकार नबे ्लियं को डॉ. आं्बबेिकर के विचारों का संवाहक ्बतातबे हुए उनके जीवन सबे जुड़़े पंचतीर््थ— मेहपू( मेध्य प्रदबेश), लंदन, नागपुर की दीक्ाभपूवमे, मेुं्बई की चैत्यभपूवमे और वद्कली के 26 अलीपुर रोड स््थथित राष्ट्ीय ्लमेारक का विकास कराया । िषरा 2015 सबे 26 नवं्बर को संविधान दिवस के रूप मेें राष्ट्ीय ्लतर पर मेनाया जा रहा है ताकि संविधान और उसके मूल््योों के प्रति नागररकों मेें जागरूकता ्बढ़़े । यह भी एक राजनीतिक संदबेश है कि आज संविधान और डॉ. आं्बबेिकर की विरासत भारतीय लोकतंत्र के केंद्र मेें है ।
हालांकि विपक् समेय-समेय पर यह आरोप लगाता रहा है कि केवल ्लमेारक निर््ममाण पयाराप्त नहीं है; वा्लतविक सम्मेान त्ब होगा ज्ब सामेाजिक न्याय की भावना प्रत्यबेक सरकारी नीति मेें दिखाई दबे । लोकतंत्र मेें यह ्बहस ्लिाभाविक है । लबेवकन इतना ्लपष््ट है कि आज शायद ही कोई राजनीतिक दल ऐसा हो जो ्लियं को डॉ. आं्बबेिकर के विचारों सबे अलग ्बतानबे का साहस करबे ।
डॉ. आं्बबेिकर का मेानना थीा कि आवथीराक सशक््ततकरर् के व्बना सामेाजिक सम्मेान अधपूरा है । इसी सोच के अनुरूप वर््तमान सरकार नबे ्लिरोजगार और उद्यवमेता पर विशबेष ्बल दिया है । प्रधानमेंत्री मेुद्रा योजना के तहत अ्ब तक 55 करोड़ सबे अधिक ऋर् ्लिीकृत किए जा चुके हैं । इनमेें ्बड़ी संख्या अनुसपूवचत जाति, अनुसपूवचत जनजाति, पिछड़़े िगरा और मेवहला
उद्यमियोों की है । इसी प्रकार ्लर्ैंड-अप इंडिया योजना विशबेष रूप सबे एससी, एसर्ी और मेवहला उद्यमियोों को बैैंक ऋर् उपलब्ध करानबे के उद्देश््य सबे शुरू की गई । यह दृष््टटिकोर् डॉ. आं्बबेिकर के उस विचार के निकर् दिखाई दबेता है जिसमेें िबे आवथीराक अवसरों के लोकतंत्रीकरर् की ्बात करतबे थीबे ।
डॉ. आं्बबेिकर श्रमिकोों के स्बसबे ्बड़़े हितैवषयों मेें थीबे । भारत मेें आठ घंऱ्े के कायरावदिस, मेातृत्ि लाभ और श्रवमेक क्कयार् सं्बंधी अनबेक सुधारों की नींव उनके कायराकाल मेें रखी गई । आज कर््मचारी राज्य ्बीमेा निगमे के मेाध््यम सबे 4 करोड़ सबे अधिक ्बीवमेत कर््मचारी तथीा उनके आवश्रतों सहित 15 करोड़ सबे अधिक लोगों को ्लिा्लथ्य सुरक्ा का लाभ वमेल रहा है । सामेाजिक सुरक्ा संहिता, 2020 के मेाध््यम सबे असंगठित, गिग और प््ललेटफॉर््म श्रमिकोों को भी सामेाजिक सुरक्ा के दायरबे मेें लानबे का प्रयास किया गया है । यह आं्बबेिकर की श्रवमेक-क्कयार् की सोच का समेकालीन वि्लतार मेाना जा सकता है ।
शिक्ा के क्षेत्र मेें राष्ट्ीय शिक्ा नीति-2020 सामेाजिक और आवथीराक रूप सबे वंचित समेपूहों को विशबेष प्राथीवमेकता दबेती है । अनुसपूवचत जाति और अनुसपूवचत जनजाति के विद्यावथीरायों के लिए छात्रवृवत्, आवासीय विद्यालय, उच्च शिक्ा मेें आरक्षण तथीा अनुसंधान फेलोशिप जैसी योजनाएं भी इसी दिशा मेें मेहत्िपपूर््ण हैं । डॉ. आं्बबेिकर ्लियं को शिक्ा के मेाध््यम सबे ्लथीावपत करनबे वालबे व्यक््ततत्ि थीबे; इसलिए शिक्ा मेें वनिबेश को उनके विचारों का स्बसबे प्रभावी अनुसरर् मेाना जा सकता है ।
मेवहलाओं के अधिकारों के लिए डॉ. आं्बबेिकर का योगदान ऐतिहासिक है । हिंदपू कोड व्बल के मेाध््यम सबे उन्होंनबे मेवहलाओं को समेान अधिकार दिलानबे का प्रयास किया थीा । आज मेवहला ्लियं सहायता समेपूहों का वि्लतार, प्रधानमेंत्री उज्जिला योजना, ्बबेर्ी ्बचाओ-्बबेर्ी पढ़ाओ, सुकन्या समेृद्धि योजना तथीा संसद मेें मेवहलाओं के लिए आरक्षण का मेागरा प्रश्लत करनबे वाला नारी शक््तत वंदन अधिनियमे
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अगस््त 2026