डॉ. अयंबेडकर कता समतािेशी
लक्षय
विकतास: विकसित भतारत की आितारशिलता
आजादी के लगभग आ्ठ दशक बाद भार्त ' विकनस्त भार्त 2047 ' के लक्षय की ओर बढ़ रहा है । ऐसे समय में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या विकास का लाभ समाज के अंन्तम व्यष्क््त ्तक पहुंच रहा है? क्या अनुसूनच्त जान्त, अनुसूनच्त जनजान्त, पिछड़़े वग्ष, महिलाएं, श्रमिक, किसान और गरीब विकास की मुख्यिारा में शामिल ियो रहे िैं? इन सवालों का जवाब खयोि्ती इस बार की खास रिपयोटि्ट ।
रर्तेश नसन्दिा
भा रतीय लोकतंत्र की स्बसबे ्बड़ी
विशबेषता यह है कि इसकी नींव केवल राजनीतिक ्लितंत्रता पर नहीं, ्बक््कक सामेाजिक न्याय, आवथीराक समेानता और संवैधानिक मूल््योों पर रखी गई है । इन मूल््योों के स्बसबे ्बड़़े वश्कपकार भारत रत्न डॉ. भीमेराव रामेजी आं्बबेिकर थीबे । उन्होंनबे ्लपष््ट कहा थीा कि ' राजनीतिक लोकतंत्र
त्ब तक ्लथीायी नहीं हो सकता, ज्ब तक उसके आधार मेें सामेाजिक और आवथीराक लोकतंत्र न हो ।' यही विचार आज ' समेािबेशी विकास ' की आधुनिक अवधारर्ा का मेपूल आधार है ।
आजादी के लगभग आठ दशक ्बाद भारत ' विकसित भारत 2047 ' के लक्षय की ओर ्बढ़ रहा है । ऐसबे समेय मेें यह प्रश्न ्लिाभाविक है कि ्तया विकास का लाभ समेाज के अंवतमे व्यक््तत तक पहुंच रहा है? ्तया अनुसपूवचत जाति,
अनुसपूवचत जनजाति, पिछड़़े िगरा, मेवहलाएं, श्रवमेक, किसान और गरी्ब विकास की मेुख्यधारा मेें शावमेल हो रहबे हैं? इन प्रश्नों का उत्र खोजनबे के लिए डॉ. आं्बबेिकर के विचारों और वर््तमान सरकार की नीवतयों को साथी-साथी दबेखनबे की आि्चयकता है ।
डॉ. आं्बबेिकर केवल संविधान वनमेाराता नहीं थीबे, ्बक््कक आधुनिक भारत के स्बसबे ्बड़़े सामेाजिक-आवथीराक चिंतक भी थीबे । उन्होंनबे शिक्ा को सामेाजिक पररितरान का स्बसबे ्बड़ा हवथीयार ्बताया । उनका प्रसिद्ध आह्ान—' वशवक्त ्बनो, संगठित रहो और संघषरा करो '— आज भी उतना ही प्रासंगिक है । उन्होंनबे ्लपष््ट कहा थीा कि समेाज का विकास तभी संभव है ज्ब वंचित िगषों को शिक्ा, सम्मेान और आवथीराक अवसर समेान रूप सबे प्राप्त हों ।
्लितंत्र भारत की राजनीति मेें लं्बबे समेय तक डॉ. आं्बबेिकर को केवल दलित राजनीति तक सीवमेत करनबे का प्रयास होता रहा । ज्बवक उनका दृष््टटिकोर् कहीं अधिक व्यापक थीा । िबे औद्योगिकीकरर्, जल संसाधन प्र्बंधन, श्रवमेक अधिकार, मेवहलाओं की समेानता, आवथीराक नियोजन और वैज्ञानिक सोच के समेथीराक थीबे । उन्होंनबे रिजिरा बैैंक की अवधारर्ा सबे लबेकर श्रमे
अगस््त 2026
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