अवसर
अनुसूनच्त जान्त और जनजान्त समुदाय के लिए सबसे बड़ा परिवर््तन यह है कि अब सरकारी नीतियोों का केंद्र केवल सामाजिक सुरषिा ििीं, बष्ल्क आन्थथिक सशक््ततिकरण भी है । स्वरयोिगार, कौशल विकास, डिजिटिल कारयोबार, सरकारी खरीद, उद्यनम्ता और वित्तीय समावेशन कयो एक सा्थ ियोड़कर सरकार ऐसे अवसर ्तैयार कर रही है, जिनसे सामाजिक और आन्थथिक दोनोों ्तरह का परिवर््तन संभव है ।
रुपयबे सबे अधिक का उत्पादन तथीा 14.15 लाख प्रत्यक् एवं अप्रत्यक् रोजगार सृजित होनबे का दावा किया गया है । यदि इस योजना का लाभ सपूक्षमे, लघु एवं मेध््यम उद्योगों तथीा अनुसपूवचत जाति- जनजाति उद्यमियोों तक और व्यापक रूप सबे पहुंचबे, तो इसका सकारात््मक प्रभाव आनबे वालबे िषषों मेें और ्लपष््ट दिखाई दबेगा ।
दबेश के 6.3 करोड़ सपूक्षमे, लघु और मेध््यम उद्यमे भारतीय अर््थव्यि्लथीा की रीढ़ हैं । यही क्षेत्र 11 करोड़ सबे अधिक लोगों को रोजगार दबेता है । डिवजर्ल पंजीकरर्, ऑनलाइन ऋर् सुविधा, सरकारी खरीद और तकनीकी सहायता जैसी पहलों नबे इस क्षेत्र को नई गति दी है । हालांकि
समेय पर भुगतान, स्लती पपूंजी और ्बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियां अभी भी मेौजपूद हैं । इन चुनौवतयों के समेाधान पर लगातार कामे करनबे की आि्चयकता है, ताकि छोऱ्े उद्योग और अधिक मेज्बपूत ्बन सकें ।
अनुसपूवचत जाति और जनजाति समेुदाय के लिए स्बसबे ्बड़ा पररितरान यह है कि अ्ब सरकारी नीवतयों का केंद्र केवल सामेाजिक सुरक्ा नहीं, ्बक््कक आवथीराक सशक््ततकरर् भी है । ्लिरोजगार, कौशल विकास, डिवजर्ल कारो्बार, सरकारी खरीद, उद्यवमेता और वित्ीय समेािबेशन को एक साथी जोड़कर सरकार ऐसबे अवसर तैयार कर रही है, जिनसबे सामेाजिक और आवथीराक दोनों तरह का
पररितरान संभव है ।
आगबे की चुनौती यह सुनिश््चचत करना है कि योजनाओं का लाभ अंवतमे व्यक््तत तक पहुंचबे । बैैंक ऋर् की प्रवरिया और सरल हो, अनुसपूवचत जाति-जनजाति उद्यमियोों को विपर्न, प्रशिक्षण और नई तकनीक का सहयोग वमेलबे, सरकारी खरीद मेें वनधारारित लक्षय पपूरी तरह हासिल किए जाएं और छोऱ्े उद्योगों को समेय पर भुगतान सुनिश््चचत किया जाए । यदि इन क्षेत्रों मेें और सुधार होता है, तो अनुसपूवचत जाति और जनजाति के लाखों युवा दबेश के आवथीराक विकास मेें और ्बड़ी भपूवमेका निभा सकतबे हैं ।
भारत की आवथीराक प्रगति का वा्लतविक अर््थ तभी होगा, ज्ब विकास का लाभ समेाज के अंवतमे व्यक््तत तक पहुंचबे । यदि कारो्बार करनबे मेें आई सुगमेता का स्बसबे अधिक लाभ अनुसपूवचत जाति, अनुसपूवचत जनजाति, मेवहलाओं और छोऱ्े उद्यमियोों को वमेलता है, तो यह केवल आवथीराक उपलक्ब्ध नहीं होगी, ्बक््कक सामेाजिक न्याय की दिशा मेें भी एक ऐतिहासिक पररितरान होगा । यही विकसित भारत की स्बसबे मेज्बपूत नींव साव्बत हो सकती है । �
28
अगस््त 2026