प्रसंगवश
और अविकसित । पिछड़़े क्षेत्रों मेें ब्ाह्मर् भी उतना ही पिछड़ा थीा जितना की दलित या अन्य िगरा, धर््म या समेाज का व्यक््तत । पिछड़ों को ्बरा्बरी पर लानबे के लिए संविधान मेें प्रारंभ मेें 10 िषरा के लिए आरक्षण दबेनबे का कानपून ्बनाया गया, लबेवकन 10 िषरा मेें भारत की राजनीति ्बदल गई ।
यह सही है कि भारतीय समेाज मेें अनबेक कुरीतियां रही हैं, किन्तु उन कुरीवतयों को दपूर करनबे के लिए अनेकोों सुधारवादी सद्प्रयास हुए । समेाज मेें जातिपात और छुआछूत के लिए मेनु्लमेृवत का उदाहरर् दिया जाता है । कितनबे हिन्दुओं नबे मेनु्लमेृवत का अध्ययन किया होगा या कितनबे हिन्दपू घरों मेें मेनु्लमेृवत रखी जाती है? मेनु्लमेृवत का उदाहरर् दबेकर यह कहा जाता है कि परमेात्मेा के मेुख सबे ब्ाह्मर्, ्बाहु सबे क्वत्रय, जांघ सबे वै्चय और पैर सबे शपूद्र की उत्पवत् हुई । फिर सारबे मेांगलिक अनुष्ठानों मेें भगवान के चरणोों मेें ही जल, पुष्प, नैिबेद्य ्तयों अवपरात किया जाता है? वा्लति मेें दबेखा जाए तो हिन्दपू समेाज मेें जो कुरीतियां थीीं, उसबे पोषित कर समेाज को तोडनबे का कामे विधवमेरायों नबे किया । ब्रिटिश शासकों नबे उसबे ही अपना गुरुमेंत्र ्बनाया और समेाज को जावतयों मेें ्बांर्कर अपनबे शत्रुओं को वन्लतबेज करनबे का कामे किया । वब्तावनयों नबे अपनबे साम्ाज्य को शक््ततशाली ्बनानबे के लिए भारतीय समेाज को जाति और िगषों मेें ्बांर्नबे की नीति अपनाई । पुरी मेंदिर की इस विकृति के ्बारबे मेें ज्ब वब्तावनयों को ख्बर लगी तो उन्होंनबे फौरन इसबे वैधानिक ्लिीकृति दबे दी । ईस््ट इंडिया कम्पनी
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के तत्कालीन गिनरार जनरल लॉि्ट िबेलेस््लले नबे अपनबे कमेांडि़ंग अफसर कनराल कैंप्बबेल को पुरी कूच करनबे सबे पूर््व‘ ब्ाह्मणोों के धावमेराक पपूिाराग्हों’ का पपूर््ण ध्यान रखनबे के कड़़े वनदवेश दिए थीबे । उनकी कूर्नीति कामे कर गई । ब्रिटिश फौज ज्ब पुरी पहुंची तो उसबे कहीं सबे किसी तरह के प्रतिरोध का सामेना नहीं करना पड़ा ।‘ फूर् डालो, राज करो’ की नीति पर चलतबे हुए उन्होंनबे गैर-हिन्दुओं के मेंदिर प्रिबेश पर निषबेध की जो परम्परा थीी, उसबे 1809 मेें कानपूनी जामेा पहना दिया ।
मेंवदरों मेें दवलतों के प्रिबेश को लबेकर डा. भीमेराव अम््बबेदकर और वीर सावरकर नबे सार््थक आंदोलन किए । सावरकर नबे रत्नागिरी मेें पतित पावन मेंदिर की ्लथीापना की । नारायर् गुरु और ज्योवत्बा फूलबे आदि दलित थीबे और सामेाजिक कुरीवतयों के खिलाफ मेुखर रहबे । ज्ब अपनबे ही समेाज मेें तिर्लकार और भबेदभाव के शिकार व्यक््तत को छलावा या अन्य प्रलोभन के ्बल पर दपूसरबे मेत के प्रचारक सम्मेान दबेनबे का भरोसा दबेतबे हैं तो ्लिाभाविक रूप सबे उस मेत के प्रति प्रताडि़त व्यक््तत का आकर््षण भी ्बढ़ता है । छुआछूत और भबेदभाव का कभी कोई समेथीरान नहीं कर सकता और न ही ग्ंथीों मेें कहीं इसका उ्कलबेख है । उलऱ्े सैंकड़ों प्रबेरर्ादायक प्रसंग हैं । भगवान रामे को अपनी नौका मेें सवार करानबे वाला केिर् कोई ब्ाह्मर् नहीं थीा । वह समेाज के उपेक्षित िगरा सबे थीा, किन्तु प्रभु रामे नबे ्तया उसबे दुत्कार दिया? नहीं, ्बक््कक उसबे गलबे लगाया और कहा,‘‘ तुमे संग सखा भरत समे भ्राता । सदा रहबेहु पुर आवत जाता ।’’
अगस््त 2026
सतामताजिक सुरक्षा सयंहितता- 2020 के तहत मजबूत हो रिता ईएसआईसी
दनल्त एवं श्रमिक वग्ष के सशक््ततिकरण की दिशा में मयोदी सरकार का बड़ा कदम
सा मेाजिक सुरक्ा संहिता, 2020 ' के तहत कर््मचारी
राज्य ्बीमेा निगमे( ईएसआईसी) मेें लोकसभा के दो सद्लयों के वनिाराचन का प्र्लताि प्र्लतुत किया गया है । यह प्र्लताि श्रमे एवं रोजगार मेंत्री डॉ. मेनसुख मेांडविया नबे लाया है । जिसके तहत दबेश की सामेाजिक सुरक्ा व्यि्लथीा को अधिक लोकतांत्रिक, उत्रदायी और प्रभावी ्बनानबे की दिशा मेें मेहत्िपपूर््ण कदमे ्बढ़ाया गया है । ्तया है यह सुरक्ा संहिता? ्तया इसबे लागपू करनबे सबे स्बसबे निचलबे श्रमिकोों को लाभ वमेलबेगा? सामेाजिक सुरक्ा संहिता 2020 के हर पहलपू पर नजर डालनबे की एक कोशिश ।
लोकसभा के मेानसपून सत्र मेें विपक् के लगातार हंगामेबे के ्बीच भी केंद्र सरकार नबे ्लपष््ट कर दिया कि उसकी प्राथीवमेकता संसद की कायरािाही को केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीवमेत रखना नहीं, ्बक््कक दबेश के करोड़ों श्रमिकोों और उनके