August 2026_DA | Page 23

प्रसंगवश

परिवारों के जीवन को प्रभावित करनबे वालबे मेहत्िपपूर््ण सुधारों को आगबे ्बढ़ाना है । अग्लत के पहलबे पखवारबे मेें लोकसभा मेें प्रश्नकाल शुरू होतबे ही विपक्ी दलों के हंगामेबे के कारर् अध्यक् ओमे व्बरला को सदन की कायरािाही स््थगित करनी पड़ी, लबेवकन दो्बारा कायरािाही शुरू होनबे पर सरकार नबे कई मेहत्िपपूर््ण विधायी कायरा पपूरबे किए । इनमेें स्बसबे मेहत्िपपूर््ण थीा श्रमे एवं रोजगार मेंत्री डॉ. मेनसुख मेांडविया द्ारा ' सामेाजिक सुरक्ा संहिता, 2020 ' के तहत कर््मचारी राज्य ्बीमेा निगमे( ईएसआईसी) मेें लोकसभा के दो सद्लयों के वनिाराचन का प्र्लताि प्र्लतुत करना । पहली नजर मेें यह संसदीय प्रवरिया का सामेान्य वह्लसा प्रतीत हो सकता है, किंतु वा्लति मेें यह दबेश की सामेाजिक सुरक्ा व्यि्लथीा को अधिक लोकतांत्रिक, उत्रदायी और प्रभावी ्बनानबे की दिशा मेें मेहत्िपपूर््ण कदमे है ।
सामेाजिक सुरक्ा संहिता, 2020 ्लितंत्र भारत के स्बसबे व्यापक श्रमे सुधारों मेें सबे एक है । दशकों सबे लागपू अनबेक अलग-अलग श्रमे कानूनोों को समेाहित कर चार श्रमे संहिताओं के रूप मेें सरल व्यि्लथीा तैयार की गई, जिनमेें
सामेाजिक सुरक्ा संहिता का विशबेष मेहत्ि है । इसका उद्देश््य केवल संगठित क्षेत्र के कर््मचाररयों तक लाभ सीवमेत रखना नहीं, ्बक््कक अधिकाधिक श्रमिकोों को ्लिा्लथ्य सुरक्ा, ्बीमेा, भविष्य निधि, मेातृत्ि लाभ, दुर््घटना सहायता तथीा सामेाजिक संरक्षण उपलब्ध कराना है । इस पपूरी व्यि्लथीा का स्बसबे मेज्बपूत ्लतंभ कर््मचारी राज्य ्बीमेा निगमे अथीारात ईएसआईसी है ।
ईएसआईसी की ्लथीापना िषरा 1952 मेें कर््मचारी राज्य ्बीमेा अधिनियमे के अंतगरात हुई थीी । पिछलबे सात दशकों मेें यह भारत की स्बसबे ्बड़ी सामेाजिक ्लिा्लथ्य सुरक्ा सं्लथीाओं मेें विकसित हो चुकी है । आज इसके मेाध््यम सबे करोड़ों ्बीवमेत कर््मचारी और उनके परिवार चिकित्सा सुविधा, ्बीमेारी भत्ा, मेातृत्ि लाभ, विकलांगता लाभ, आश्रित लाभ, अंवतमे सं्लकार सहायता तथीा रोजगार सबे जुड़ी अनबेक सामेाजिक सुरक्ा सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर रहबे हैं । सामेाजिक सुरक्ा संहिता लागपू होनबे के ्बाद ईएसआईसी की भपूवमेका और अधिक व्यापक हो गई है ्तयोंकि अ्ब इसका उद्देश््य केवल पारंपरिक औद्योगिक श्रमिकोों तक सीवमेत नहीं,
्बक््कक ्बदलतबे रोजगार ्बाजार के अनुरूप अधिक व्यापक श्रवमेक िगरा तक सुरक्ा पहुंचाना है ।
भारत मेें अनुसपूवचत जाति और अन्य वंचित िगषों की ्बड़ी आ्बादी श्रवमेक के रूप मेें कायरा करती है । निर््ममाण उद्योग, परिवहन, विनिर््ममाण, ि्लत्र उद्योग, चमेड़ा उद्योग, सफाई सबेिाएं, लघु उद्योग तथीा सबेिा क्षेत्र मेें कायरारत लाखों दलित परिवारों की आजीविका मेजदपूरी पर आधारित है । ्बीमेारी, दुर््घटना अथीिा रोजगार सं्बंधी संकर् इन परिवारों को सीधबे आवथीराक असुरक्ा की ओर धकेल दबेता है । ऐसबे मेें ईएसआईसी केवल ्लिा्लथ्य ्बीमेा नहीं, ्बक््कक सामेाजिक न्याय का सश्तत मेाध््यम ्बनकर सामेनबे आता है ।
प्रधानमेंत्री नरेंद्र मेोदी के नबेतृत्ि मेें केंद्र सरकार नबे पिछलबे िषषों मेें सामेाजिक सुरक्ा को केवल सरकारी योजना नहीं ्बक््कक गरी्ब के अधिकार के रूप मेें ्लथीावपत करनबे का प्रयास किया है । जनधन योजना नबे बैैंकिंग पहुंच सुनिश््चचत की, आयुष्मेान भारत नबे गरी्ब परिवारों को ्लिा्लथ्य सुरक्ा दी, प्रधानमेंत्री आवास योजना नबे आवास उपलब्ध कराया, उज्जिला योजना नबे रसोई को धुएं सबे मेु्तत किया, ई-श्रमे पोर््टल
अगस््त 2026
23