August 2026_DA | Page 20

संदभ्ष

कब छू मयंतर होगता छू आछू त?

भार्तीय समाज में अनेक कुरीन्तयां रही िैं, नकन्द्तु उन कुरीतियोों कयो दूर करने के लिए अनेक सुधारवादी सद्पप्रयास हुए । आखिर नक्तिा सफल हुआ है यह प्रयास । क्या ऐसे प्रयास आगे जारी रहने चाहिए? 21 वीं सदी में भी केवल सुधार की बा्त ियो यह कहा ्तक सही है? इन सवालों का जवाब खयोि्ती इस बार एक सववे पर खास रिपयोटि्ट ।
्तकीसिीं सदी मेें रहनबे गुमेान और

लगातार वैक््चिक मेानचित्र मेें गढ़ रहबे नए मेानक के ्बीच हिन्दु्लतान के पररप्रबेक्षय मेें यह कहा जाए कि आज भी हर 4 भारतीय मेें सबे 1 भारतीय छुआछूत को मेानता है, तो चौंकना ्लिाभाविक है । लबेवकन सच सबे न तो आप मेुंह मेोड़ सकतबे हैं और न ही हमे । जी हां, इस ्बात का खुलासा एक सिवे के जरिए हुआ है ।
2015 मेें नबेशनल काउ़ंवसल ऑफ एप्लाइड इकोनॉवमेक रिसचरा और यूनिवर््ससिटी ऑफ मेैररलैंड, अमेबेरिका द्ारा करी्ब 42 हजार भारतीय घरों मेें किया गया सिवे इस ्बात का स्बपूत है । साल 1956 मेें ्लथीावपत इस सं्लथीान के हालिया सिवे मेें सामेनबे आए तथ्य काफी चौंकानबे वालबे हैं । इस सिवे मेें जिन लोगों नबे छुआछूत की ्बात को ्लिीकारा है, िबे सभी धर््म या जाति सबे हैं । इनमेें मेुस््ललिम, अनुसपूवचत जाति या अनुसपूवचत जनजाति के लोग भी शावमेल हैं । अगर जाति की ्बात की जाए, तो इस सिवे सबे यह ्बात भी सामेनबे आई है कि स्बसबे ज्यादा छुआछूत को ब्ाह्मर् समेाज मेें मेाना जाता है । अगर धर््म की ्बात की जाए तो उसबे स्बसबे पहलबे हिंदपू फिर सिख और जैन धर््म का नामे आता है ।
हमे आपको ्बता दें कि इस सिवे मेें लोगों सबे सवालों के जवा्ब‘ हां‘ या‘ ना’ मेें दबेनबे को कहा गया थीा । मेसलन, ्तया आपके घर मेें छुआछूत
को मेाना जाता है? अगर इस सवाल का जवा्ब‘ ना’ मेें आता है, तो फिर अगला सवाल पपूछा गया कि ्तया आप किसी अनुसपूवचत जाति जनजाति के लोग को अपनबे किचन मेें घुसनबे देंगबे? पपूरबे भारत मेें करी्ब 27 फीसदी लोगों नबे यबे मेाना कि वह छुआछूत को मेानतबे हैं । मेध्यप्रदबेश के 53 प्रतिशत लोग छुआछूत मेें भरोसा रखतबे हैं । वहमेाचल प्रदबेश मेें 50 प्रतिशत, छत्ीसगढ़ मेें 48 प्रतिशत, राज्लथीान और व्बहार मेें 47 प्रतिशत । उत्र प्रदबेश मेें 43 प्रतिशत और उत्राखंड मेें 40 प्रतिशत लोग छुआछूत मेें यकीन रखतबे हैं । पश््चचिम ्बंगाल भारत का स्बसबे प्रोग्रेसिव राज्य है, जहां मेात्र एक प्रतिशत लोग ही छुआछूत को मेानतबे हैं । केरल मेें दो प्रतिशत, मेहाराष्ट् मेें चार प्रतिशत, नॉर््थ ईस््ट मेें सात प्रतिशत और आंध्र प्रदबेश मेें 10 प्रतिशत लोग छुआछूत मेें यकीन करतबे हैं ।
गौर करनबे लायक यह भी है कि संविधान छुआछूत को 75 साल पहलबे ही खत््म कर चुका है, लबेवकन लोगों के मेन मेें आज भी यह कुप्रथीा ्बसी हुई है । एक चैथीाई सबे ज्यादा भारतीय छुआछूत मेानतबे हैं और अपनबे घरों मेें किसी न किसी रूप मेें इसका पालन करतबे हैं । अ्तसर जातिवाद, छुआछूत और सवर््ण, दलित िगरा के मेुद्दबे को लबेकर धर््मशा्लत्रों को भी दोषी ठहराया जाता है, लबेवकन यह व्ब्ककुल ही असत्य है । पहली ्बात यह कि जातिवाद प्रत्यबेक धर््म, समेाज
और दबेश मेें है । हर धर््म का व्यक््तत अपनबे ही धर््म के लोगों को ऊंचा या नीचा मेानता है । ्तयों? यही जानना जरूरी है । लोगों की वर्प््पणियां, ्बहस या गु्लसा उनकी अधपूरी जानकारी पर आधारित होता है । कुछ लोग
20
अगस््त 2026