August 2026_DA | 页面 18

बदल्ते दौर

सबे उसी व्यि्लथीा को और व्यापक ्लिरूप दबेनबे का प्रयास किया जा रहा है । दलित मेवहलाओं को संसद तक पहुंचनबे का अवसर वमेलनबे का अर््थ केवल सीटोों की संख्या ्बढ़ना नहीं है, ्बक््कक उन करोड़ों मेवहलाओं की आवाज को राष्ट्ीय नीति निर््ममाण तक पहुंचाना है, जो लं्बबे समेय तक सामेाजिक, आवथीराक और शैक्षणिक चुनौवतयों सबे जपूझती रही हैं । पिछलबे एक दशक मेें केंद्र सरकार नबे मेवहला सशक््ततकरर् को केवल राजनीतिक अधिकार तक सीवमेत नहीं रखा, ्बक््कक उसबे सामेाजिक और आवथीराक पररितरान सबे भी जोड़ा । प्रधानमेंत्री उज्जिला योजना के तहत 10 करोड़ सबे अधिक गरी्ब परिवारों को निःशु्कक गैस कनेक््शन उपलब्ध कराए गए, जिनका स्बसबे अधिक लाभ ग्रामीर् मेवहलाओं को वमेला । प्रधानमेंत्री जनधन योजना के अंतगरात 55 करोड़ सबे अधिक बैैंक खातबे खोलबे जा चुके हैं, जिनमेें ्बड़ी संख्या मेवहलाओं की है । इससबे पहली ्बार करोड़ों मेवहलाओं को औपचारिक बैैंकिंग व्यि्लथीा सबे जोड़नबे मेें सफलता वमेली ।
प्रधानमेंत्री आवास योजना के अंतगरात ्बड़ी संख्या मेें मेकानों का ्लिावमेत्ि मेवहलाओं के नामे या संयु्तत नामे पर सुनिश््चचत किया गया । राष्ट्ीय ग्रामीर् आजीविका वमेशन के मेाध््यम सबे लगभग 10 करोड़ मेवहलाएं ्लियं सहायता समेपूहों सबे जुड़ चुकी हैं । केंद्र सरकार नबे " लखपति दीदी " अभियान के मेाध््यम सबे तीन करोड़ ग्रामीर् मेवहलाओं को आवथीराक रूप सबे आत्मेवनभरार ्बनानबे का लक्षय वनधारारित किया है । ्लर्ैंड-अप इंडिया योजना के अंतगरात अनुसपूवचत जाति, अनुसपूवचत जनजाति तथीा मेवहला उद्यमियोों को बैैंक ऋर् उपलब्ध कराया जा रहा है । सरकार का तक्क है कि आवथीराक रूप सबे सक्षम मेवहला ही राजनीतिक रूप सबे भी अधिक प्रभावी भपूवमेका निभा सकती है । इन योजनाओं का प्रभाव दलित मेवहलाओं पर भी दिखाई दबेता है । बैैंक खातबे, गैस कनेक््शन, आवास, शौचालय, ्लिा्लथ्य ्बीमेा, मेुद्रा ऋर् और ्लियं सहायता समेपूहों के मेाध््यम सबे ्बड़ी संख्या मेें ग्रामीर् मेवहलाओं की आवथीराक स््थथिति मेें सुधार आया है । सरकार का दावा है कि अ्ब अगला चरर् उन्हें राजनीतिक निर््णय प्रवरिया मेें
अधिक भागीदारी दबेनबे का है ।
भारत मेें पंचायतों और नगर निकायों मेें मेवहलाओं को आरक्षण दिए जानबे का अनुभव भी इस दिशा मेें उत्साहजनक रहा है । आज दबेशभर मेें लगभग 14 लाख वनिारावचत मेवहला जनप्रतिनिधि ्लथीानीय निकायों मेें कायरारत हैं । इनमेें ्बड़ी संख्या अनुसपूवचत जाति और अनुसपूवचत जनजाति िगरा की मेवहलाओं की है । अनबेक अध्ययनों मेें पाया गया है कि मेवहला नबेतृत्ि वाली पंचायतों मेें पबेयजल, ्लिच्छता, शिक्ा, पोषर्, मेातृ ्लिा्लथ्य और सामेाजिक क्कयार् योजनाओं के ्बबेहतर पररर्ामे दबेखनबे को वमेलबे हैं । यही अनुभव अ्ब संसद और विधानसभाओं मेें भी दोहराए जानबे की उम्मेीद की जा रही है ।
भारतीय जनता पार्टी नबे भी पिछलबे एक दशक मेें संगठन और चुनावी राजनीति मेें मेवहलाओं की भागीदारी ्बढ़ानबे का प्रयास किया है । िषरा 2019 के लोकसभा चुनाव मेें भाजपा नबे 78 मेवहला उम्मेीदवारों को वर्कर् दिया, जिनमेें 41 विजयी होकर संसद पहुंचीं । 2024 के आमे चुनाव मेें भी पार्टी नबे ्बड़ी संख्या मेें मेवहला उम्मेीदवारों को मेैदान मेें उतारा । आज केंद्र सरकार मेें अनबेक मेवहला मेंत्री मेहत्िपपूर््ण मेंत्रालयों का दायित्ि
संभाल रही हैं, ज्बवक दबेश के सिवोच्च संवैधानिक पद पर आदिवासी समेाज सबे आनबे वाली राष्ट्पति द्रौपदी मेुमेु रा का आसीन होना भी सामेाजिक समेािबेशन का मेहत्िपपूर््ण उदाहरर् मेाना जाता है । यह पररितरान केवल प्रतीकात््मक नहीं, ्बक््कक लोकतांत्रिक व्यि्लथीा मेें समेाज के वंचित िगषों की ्बढ़ती भागीदारी का संकेत भी है ।
िषरा 2024 के लोकसभा चुनाव मेें लगभग 97 करोड़ पंजीकृत मेतदाताओं मेें लगभग 47 करोड़ मेवहला मेतदाता थीीं । चुनाव आयोग के आंकड़़े ्बतातबे हैं कि अनबेक राज्यों मेें मेवहलाओं का मेतदान प्रतिशत पुरुषों के ्बरा्बर या उससबे अधिक रहा । यह ्लपष््ट संकेत है कि भारतीय राजनीति मेें मेवहलाएं अ्ब केवल मेतदाता नहीं, ्बक््कक निर्ारायक राजनीतिक शक््तत ्बन चुकी हैं । ऐसबे समेय मेें संसद और विधानसभाओं मेें उनकी भागीदारी ्बढ़ाना लोकतंत्र की ्लिाभाविक आि्चयकता भी है ।
मेवहला आरक्षण के वरियान्ियन मेें परिसीमेन की भपूवमेका स्बसबे मेहत्िपपूर््ण होगी । संविधान के अनुसार नई जनगर्ना के ्बाद परिसीमेन आयोग संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमेाओं का पुनवनराधारारर् करबेगा । इसी प्रवरिया मेें अनुसपूवचत
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अगस््त 2026