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बदल्ते दौर

वालबे परिसीमेन सबे जुड़ी है । यह प्रवरिया पपूरी होनबे के ्बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं मेें मेवहलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण वमेलबेगा । स्बसबे मेहत्िपपूर््ण ्बात यह है कि अनुसपूवचत जाति और अनुसपूवचत जनजाति के लिए आरवक्त सीटोों मेें भी एक-तिहाई सीटेें मेवहलाओं के लिए आरवक्त होंगी । इसका सीधा लाभ दलित मेवहलाओं को वमेलबेगा, जिनका संसद और विधानसभाओं मेें प्रतिनिधित्ि अ्ब तक अपबेक्ाकृत सीवमेत रहा है ।
प्रधानमेंत्री नरेंद्र मेोदी नबे संसद मेें इस कानपून को केवल मेवहला आरक्षण नहीं, ्बक््कक भारत के लोकतांत्रिक विकास की नई दिशा ्बताया थीा । सरकार का मेानना है कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, ज्ब दबेश की आधी आ्बादी नीति निर््ममाण मेें समेान भागीदारी निभाएगी । यही कारर् है कि पिछलबे एक दशक मेें केंद्र सरकार नबे मेवहलाओं के आवथीराक, सामेाजिक और राजनीतिक सशक््ततकरर् को समेान मेहत्ि दबेनबे की रर्नीति अपनाई है ।
यदि ्लितंत्र भारत के संसदीय इतिहास पर
नजर डालें तो मेवहलाओं का प्रतिनिधित्ि लगातार ्बढ़ा है, लबेवकन यह वृद्धि अभी भी उनकी आ्बादी के अनुपात मेें नहीं पहुंच सकी है । िषरा 1952 मेें पहली लोकसभा के गठन के समेय कुल 489 सांसदों मेें केवल 22 मेवहलाएं थीीं, जो कुल सद्लय संख्या का मेात्र 4.5 प्रतिशत थीीं । कई दशकों तक यह संख्या ्बहुत धीमेी गति सबे ्बढ़ती रही । िषरा 2009 की पंद्रहिीं लोकसभा मेें मेवहलाओं की संख्या 59 पहुंची । िषरा 2019 मेें गठित सत्रहिीं लोकसभा मेें पहली ्बार 78 मेवहला सांसद वनिारावचत हुईं, जो भारतीय संसदीय इतिहास मेें अ्ब तक का सिारावधक आंकड़ा थीा । वर््तमान अठारहिीं लोकसभा मेें 74 मेवहला सांसद हैं, जो कुल सद्लय संख्या का लगभग 13.6 प्रतिशत है ।
मेवहला आरक्षण लागपू होनबे के ्बाद स्बसबे ्बड़ा पररितरान अनुसपूवचत जाति िगरा मेें दिखाई दबेगा । वर््तमान मेें लोकसभा की 543 वनिारावचत सीटोों मेें सबे 84 सीटेें अनुसपूवचत जाति और 47 सीटेें अनुसपूवचत जनजाति के लिए आरवक्त हैं ।
प्र्लतावित व्यि्लथीा के अनुसार अनुसपूवचत जाति की लगभग एक-तिहाई सीटेें मेवहलाओं के लिए आरवक्त होंगी । वर््तमान सीर् संरचना के आधार पर लगभग 28 दलित मेवहला सांसदों के संसद पहुंचनबे का मेागरा प्रश्लत होगा । अनुसपूवचत जनजाति िगरा मेें भी लगभग 16 मेवहला प्रवतवनवधयों को अवसर वमेलबेगा । परिसीमेन के ्बाद सीटोों की संख्या और उनका ्लिरूप ्बदल सकता है, लबेवकन यह लगभग तय मेाना जा रहा है कि दलित मेवहलाओं की राजनीतिक भागीदारी ऐतिहासिक रूप सबे ्बढ़़ेगी । दलित मेवहलाओं के लिए यह सीर् 65 हो जाएगी । सही मेायनबे मेें सामेाजिक न्याय का रा्लता और तबेजी सबे आगबे ्बढ़़ेगा ।
भारतीय संविधान के वश्कपकार भारत रत्न डॉ. भीमेराव आं्बबेिकर का ्लपष््ट मेत थीा कि राजनीतिक लोकतंत्र तभी सफल होगा ज्ब समेाज के वंचित िगषों को निर््णय लबेनबे की प्रवरिया मेें सम्मेानजनक भागीदारी वमेलबे । अनुसपूवचत जाति के लिए राजनीतिक आरक्षण उसी सोच का पररर्ामे थीा । आज मेवहला आरक्षण के मेाध््यम
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