कवर स््टटोरी
कताशी से निकली समरसतता की ज्ोति
सं्त रविदास के 650वें जयं्ती वर््ष ने छ़ेड़ा सामाजिक चे्तिा का राष्ट्ीय अभियान
सं्त रविदास जन््मस््थली की पनवत् माटिी । काशी की इस माटिी कयो 131 कलशों में भरकर उत्तर प्रदेश के 98 संग्ठिात्मक जिलों, देश के 27 राज्यों और छह संग्ठिात्मक षिेत्ों के लिए रवाना किया गया है । आने वाले महीिों में यही कलश गांव- गांव, बस््ती-बस््ती और नगर-नगर पहुंचेंगे । वहां पूजन के सा्थ सं्त रविदास के विचारों पर संवाद ियोगा और सामाजिक समरस्ता का संदेश जन-जन ्तक पहुंचाया जाएगा । यह केवल मिट्ी का प्रवाह ििीं, बष्ल्क विचारों का राष्ट्ीय प्रसार है ।
भा
रत की आत्मेा उसकी सनातन सां्लकृवतक परंपरा, संतों की वार्ी और समेाज को जोड़नबे वालबे मूल््योों मेें ्बसती है । ज्ब-ज्ब समेाज जातिगत भबेदभाव, सामेाजिक विषमेता और रूवढ़यों के ्बोझ सबे द्बा, त्ब-त्ब संत परंपरा नबे नई चबेतना का संचार किया । इसी परंपरा मेें संत शिरोमेवर् गुरु रविदास का ्लथीान अत्यंत विशिष््ट है । उन्होंनबे केवल भक््तत
का मेागरा नहीं दिखाया, ्बक््कक सामेाजिक समेरसता, समेानता, श्रमे की गररमेा और मेानवता को जीवन का सिवोच्च आदशरा ्बनाया । छह सौ िषषों सबे अधिक समेय ्बीत जानबे के ्बाद भी उनके विचार भारतीय समेाज को दिशा दबे रहबे हैं ।
इसी ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचानबे के उद्देश््य सबे भारतीय जनता पार्टी नबे संत रविदास के 650िें जयंती िषरा को राष्ट्ीय जन-अभियान का ्लिरूप दिया
अगस््त 2026
13