कवर स्टोरी
अधिकार और संरक्ण एवं कानून के तहत मिलने वाले लाभ, धर्म परिवर्तन के बाद सवतः समापत हो जाते हैं ।
वासतव में उच्चतम नयायालय का यह निर्णय इसलिए भी महतवपूर्ण कहा जा सकता है ्योंकि धमाांतरण के बाद भी अनुसूचित जाति का दर्जा हासिल करके अधिकारों का दावा कई दशकों से किया जाता रहा है । अब इस विषय पर कानूनी कसथजत सपष्ि हो गई है ।
मुस्लिम काल तक भारत में नहीं था कोई दलित
देश के प्ािीन इतिहास पर विहंगम दृष्टि डा. ली जाए तो वर्तमान हिनदू जीवन पद्यति का सवजण्मम युग वैदिक काल था । उस काल हिनदू, हिंदुतव और हिनदुसथान अपनी पराकाष्ठा पर था, साथ ही अधयातम ज्ान और भौतिक विज्ान
भी अपने उतकष्म पर था । जातियों की सं्या कमानुसार सीमित थी और एक ही वर्ण में कई जातियां समाहित थी । मनुकाल में भी भारतीय हिनदू समाज में असपृशयता नहीं थी और न ही शूद्र असपृशय थे । इतिहास के उन पृष्ठों को पलटा जाए जो यह प्माणित करते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब देश के पकशिमी तट पर एक शरणाथथी के रूप में रोजी-रोटी प्ापत करने के लिए अरब देशों की मुकसलम जनसं्या हिनदुसथान के सनमुख नतमसतक होती थी । मधयकाल के पहले तक हिनदू समाज में न तो असपृशयता का प्ादुर्भाव हुआ ता और न ही हिनदू समाज में दलित जैसी कोई जाति या वर्ग था ।
भारत में असपृशयता एवं दलित वर्ग का उदय विदेशी मुकसलम आरिांताओं के शासनकाल में हुआ । हिनदू धर्म रक्कों से लगातार हुए संघर्ष के बाद मुकसलम शासकों ने यह रणनीति बनाई
कि हिनदुओं को गुलाम एवं हिनदुसथान पर अगर शासन करना है तो हिनदू धर्म एवं संस्कृति रक्क रिाह्मणों एवं भौगोलिक सीमा के रक्क क्जत्रयों के साथ हिनदू धर्म को नष्ट करना ही होगा । इसके बाद हिनदुसथान पर मुकसलम शासकों का जो अतयािार शुरू हुआ, उसके तहत मंदिर और देवालयों के साथ ही हिनदू धर्म ग्ंथों को खोज- खोज कर नष्ट किया गया ।
हिनदू समाज को तहस-नहस करने वाले विदेशी मुकसलम आरिांताओं ने हिनदुओं को इसलाम में परिवर्तित करने के लिए सवाजभमानी एवं धर्म रक्क, देश रक्क योद्धा प्जाति के युद्धबंदी क्जत्रयों और रिाह्मणों को अपमानित और अकसततवजवहीन करने के लिए असवच् कायषों में बलपूर्वक लगाया, उनको अपमानजनक समबोधनों तथा जातिसूचक नामों से बजहष्ककृत बनाया । पवित्रता के आलोक में अपवित्र कायषों
8 vizSy 2026