April 2026_DA | Page 7

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श के सववोच्च नयायालय ने ईसाई धर्म अपनाने वाले दलितों को अनुसूचित जाति( एससी) में शामिल करने की मांग को असवीकार कर दिया है । उच्चतम नयायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णय में सपष्ि किया है कि अनुसूचित जाति का कोई वयक्त हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अनय धर्म( ईसाई या इसलाम) में धमाांतरण करता है, तो उसका एससी दर्जा समापत हो जाएगा ।
गत 24 मार्च को अपने निर्णय में दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति( एससी) में शामिल किए जाने समबनधी मांग को खारिज करते हुए कहा कि ईसाई या मुकसलम धर्म में धमाांतरण करने वाले वयक्तयों को सवतः अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं दिया जा सकता और वह एससी-एसटी( अतयािार निवारण) अधिनियम के तहत संरक्ण का दावा भी नहीं कर सकता । हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोडकर किसी अनय धर्म को अपनाने पर अनुसूचित जाति का दर्जा सवतः समापत हो जाता है और उससे जुड़े सभी संवैधानिक व वैधानिक लाभ भी समापत हो जाते हैं ।
उच्चतम नयायालय के नयायाधीश पी के मिश्ा और नयायाधीश एन वी अंजरिया की पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि अनुसूचित जाति का दर्जा हिंदू सामाजिक वयवसथा में वयापत ऐतिहासिक असपृशयता से जुडा हुआ है । इसलाम और ईसाई धर्म अपने सिद्धांतों में असपृशयता को सवीकार नहीं करते । इसलिए धमाांतरण के बाद वयक्त उस सामाजिक-धार्मिक ढांचे में प्वेश करता है, जहां अनुसूचित जाति की संवैधानिक अवधारणा लागू नहीं होती । नयायालय ने एक बार पुनः सपष्ि किया है कि अनुसूचित जाति की सूची में किसी भी बदलाव का अधिकार संसद और कार्यपालिका के पास है और अनुच्छेद-341 के राष्ट्पति के आदेशों में नयायपालिका बदलाव नहीं कर सकती ।
सही था आंध्र प्देश उच्च न्यायालय का निर्णय
उच्चतम नयायालय ने अपने निर्णय में आंध्र प्देश उच्च नयायालय के निर्णय को सही बताया है । उच्चतम नयायालय ने चिंथदा आनंद बनाम आंध्र प्देश राजय से जुडछे मामले में सपष्ि कर दिया है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोडकर ईसाई या इसलाम अपनाने पर अनुसूचित जाति का दर्जा और आरक्ण सवतः समापत हो जाता है । इस निर्णय ने यह ही सपष्ि कर दिया कि ईसाई धर्म अपनाने वाले वयक्त, जो सजरिय रूप से धर्म का पालन करते हैं, उनहें अनुसूचित जाति एवं जनजाति अतयािार निवारण अधिनियम का लाभ नहीं मिल सकता है ।
आंध्र प्देश उच्च नयायालय में पादरी चिंथदा आनंद, जो माडिगा( अनुसूचित जाति) समाज से थे, ने ईसाई धर्म अपना लिया था । इसके बाद आंध्र प्देश उच्च नयायालय ने उनका अनुसूचित जाति दर्जा रद् कर दिया था । इस निर्णय को उच्चतम नयायालय में चुनौती दी गई थी । लेकिन उच्चतम नयायालय ने सपष्ि कर दिया है कि धर्मानतरण के बाद वयक्त की सामाजिक और धार्मिक पहचान बदल जाती है, जिसका सीधा असर उसकी कानूनी कसथजत पर पडता है और अनुसूचित जाति से जुड़े विशेष
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