The Progress Of Jharkhand #46 | Page 22

नोबि पुरस्कार प्रवजेता सी. वी. रमन के भतीजे थे. इन्होने अपनी िारल्म्भक लशक्षा अपने माता – प्रपता से ही िी तथा बारह वषफ में प्रहन्दू हाई स्कूि में एिप्रमशन लिया. इन्होने भौप्रतकी में स्नातक की प्रिग्री सन 1930 में पूरी की और आगे की पढाई के लिए इंग्िैंि चिे गये. चन्ाशेखर “चंाशेखर लिप्रमट” की खोज के लिए हमेशा ही याद रखा जाए. इनकी मृत्यु 21 अगस्त सन 1995 को हुई. 4. ए. पी. जे. अब् दुि किाम प्रमसाइि मैन (Missile Man) के नाम से िप्रसद्ध और भारत के पूवफ राष्ट्रपप्रत िॉ ए. पी. जे. अब् दुि किाम का जन्म 15 October सन 1931 को रामेश्वरम, तप्रमिनािु में हुआ था. सन 1962 में िॉ किाम ‘भारतीय अंतिरक्ष अनुस ध ान संगठन’ में शाप्रमि हुए. िॉ किाम को िोजेक्ट िायरेक्टर के रूप में भारत का पहिा स्वदे शी उपग्रह (एस.एि.वी. तृतीय) िक्षेपास्त्र बनान का श्रेय प्रदया जाता है . इनके ियासों के कारण ही भारत अंतराफष्ट्रीय अंतिरक्ष िब का सदस्य बन पाया. सन 1998 के पोखरण प्रितीय परमाणु पिरक्षण में इनकी िमुख भूप्रमका थी. िॉ. किाम ने स्वदे शी िक्ष्य भेदी (गाइिेि प्रमसाइकस) को प्रिजाइन प्रकया था व अप्रग्न एवं पृथ्वी जैसी प्रमसाइकस को प्रसर्फ स्वदे शी तकनीक से बनाया. िॉ ए. पी. जे. अब्दुि किाम को समाज व दे श के लिए प्रकये गये अपने सराहनीय कायो के लिए कई पुरस्कार प्रमिे लजसमे भारत सरकार िारा प्रदए गये भारत के सबसे बड़ नागिरक सम्मान भारत रत्न, पद्म भूषण व पद्म प्रवभूषण शाप्रमि है . इनका प्रनधन 27 जुिाई सन 2015 को लशिोंग, मेघािय में हुआ. 5. जगदीश चंा बस िॉ॰ जगदीश चंा बोस का जन्म 30 नवंबर सन 1858 को बंगाि में हुआ था. सर जगदीश चंा बोस को भारत के िमुख वैज्ञाप्रनको में प्रगना जाता है. इन्हें भौप्रतकी, जीवप्रवज्ञान, वनस्पप्रतप्रवज्ञान तथा पुरातत्व का बहुत ज्यादा ज्ञान था. बोस पहिे ऐसे वैज्ञाप्रनक थे लजन्होंने रेप्रियो और सूक्ष्म तरंगों की िकालशकी पर कायफ प्रकया और वनस्पप्रत प्रवज्ञान म कई महत्त्वपूणफ खोजें की. इन्होने अपने स्नातक की लशक्षा प्रब्रप्रटश भारत के बंगाि िान्त म सेन्ट ज़ैप्रवयर महाप्रवद्यािय, किकत्ता से की. प्रचप्रकत्सा की लशक्षा िेने के लिए बोस िन्दन प्रवश्वप्रवद्यािय गये िेप्रकन वहां स्वास्थ्य प्रबगड़ जाने के कारण वे भारत िौट आये. भारत आने के बाद उन्होंने िेप्रसिेंसी महाप्रवद्यािय में भौप्रतकी के िाधयापक का पद संभािा और साथ में वैज्ञाप्रनक ियोग करते रहे. इन्होने इसके बाद एक यन्त्र क्ेस्कोग्राफ़ का आप्रवष्ट्कार प्रकया लजससे प्रवलभन्न उत्तेजकों के िप्रत पौधों की िप्रतप्रक्या का अधययन प्रकया. लजससे इन्होने यह खोजा की वनस्पप्रतयों और पशुओं के ऊतकों में कार्ी समानता होती है . वे सर बोस ही थे लजन्होंने पहिी बार इस दुप्रनया को बताया की पौंधों में भी जीवन होता है . िॉ॰ जगदीश चंा बोस को रेप्रियो प्रवज्ञान व बंगािी प्रवज्ञान कथा-साप्रहत्य का प्रपता माना जाता है. इनकी मृत्यु 23 नवंबर सन 1937 को हुई. 6. होमी जहाँगीर भाभा होमी जहांगीर भाभा भारत के महान परमाण (Atom) वैज्ञाप्रनक थे लजन्हें भारत के परमाणु उजा कायफक्म का जनक कहा जाता है . वे भाभा ही थे लजनके ियासों के कारण ही भारत आज प्रवश्व के िमुख परमाणु संपन्न देशों म शाप्रमि है. होमी जहांगीर भाभा का जन्म 30 अक्टू बर सन 1909 को मुम्बई के एक सभ्रांत पारसी पिरवार में हुआ था. होमी जहांगीर भाभा ने कॉस्केट थ्योरी ऑर् इिेक्ीान का िप्रतपादन प्रकया व इसके साथ ही कॉल्स्मक प्रकरणों पर भी काम प्रकया जो पृथ्वी की ओर आते हुए वायुम ि ि में िवेश करती है . उन्होंने ‘टाटा इंल्स्टट्यूट ऑफ़ र्ंिामेंटि िरसचफ ’ (टीआइएर्आर) और ‘भाभा एटॉप्रमक िरसचफ सेण्टर’ की स्थापना में महत्वपूणफ भूप्रमका प्रनभाई. वे भाभा ही थे लजन्होंन मुम्बई में भाभा परमाणु शोध संस्थान (Bhabha Atomic Research Institute) की स्थापना की थी. भाभा की एक प्रवमान दुघ ट ना में 24 जनवरी, 1966 को मृत्यु हो गई. 7. बीरबि साहनी भारत के बेस्ट पेलियो-लजयोबॉटप्रनस्ट (Paleo- Jiobotnist) िॉ बीरबि साहनी का जन्म 14 नवम्बर 1891 में शाहपुर लजिे (अब पाप्रकस्तान में) के भेड़ा नामक गॉव में हुआ था. इनके प्रपता का नाम िो. रुची राम साहनी था. इनके प्रपता एक लशक्षा शास्त्री, प्रविान और समाज सेवी थे लजन्होंने बचपन से ही बीरबि के अंदर प्रवज्ञान को बढ़ावा प्रदया. िॉ बीरबि एक पुरावनस्पती वैज्ञाप्रनक बने , लजन्होंने भारतीय उपमहािीप के जीव अवशेषों का अधययन प्रकया और इस क्षेत्र में बहुत सर्िता पाई. िॉ बीरबि ने िखनऊ म ‘बीरबि साहनी इंल्स्टट्यूट ऑफ़ पैलियोबॉटनी’ की स्थापना की. पुरावनस्पप्रत के क्षेत्र म इनका योगदान बहुमूकय है. बीरबि साहनी की ख्याप्रत पूरे प्रवश्व में है .  22 । The Progress of Jharkhand (Monthly)