The Progress Of Jharkhand #46 | Page 10

ही हाथ में प्रतरंगा लिए भगेश्वरी दे वी ने मप्रहिाओं को स्वतंत्रता वह शब्द मात्र है लजसे इसकी कीमत का अंदाजा एकप्रत्रत कर अंग्रेज फ़ौज के के सामने जा खड़ी हुई थी । स्वतंत्रता के लिए संघषफ में िगा व्यप्रक्त ही िगा सकता है । इस स्वतंत्रता के अंग्रेज कप्तान चर्स (चर्च) ने उग्र होती भीड़ पर जब लिए इप्रतहास से कुछ के नाम हम जानते है और कुछ गुमनाम अपने खून स गोलियाँ चिाने का आदे श प्रदया तब भागेश्वरी दे वी क्ोध भारत माता की जमीन को स्वतंत्रता की पौधा के लिए सींचकर चिे गये । होती हुईं चर्स पर ंपट पड़ी थी, घायि चर्स ने भागेश्वरी उनकी ऊजाफ , उनका संघषफ आज हम सभी देशवाप्रसयों के लिए अमूकय है । दे वी को गोलियों से छिनी कर प्रदया था और वे 1942 में हमारा देश जो आज आज़ाद है लजसमें हम आज़ादी की सांस िे रहे है उस वीरगप्रत की िाप्त हुईं थी । प्रकसी उम्र प्रसमा से परे क्ांप्रतकारी प्रसर्फ अपन पर हर शहीद शायद अपना बलिदान दे कर यह गीत गाता है - दे श की स्वतंत्रता की खाप्रतर आग में कूद पड़े थे लजसम मृत्यु का भय नहीं था । ऐसी ही एक वीरांगना जो महज़ 18 वषफ की थी उनका बलिदान इस उम्र के िोगों के लिए िेरणा है । कनकिता बरुआ का जन्म 22 प्रदसंबर 1924 को असम मे हुआ था । एक गुप्त सभा में 20 प्रसतंबर, 1942 ई0 को तेज़पुर की कचहरी पर प्रतरंगा र्हराने का प्रनणफय लिया गया था । प्रतरंगा र्हराने आयी भीड़ पर गोलियाँ दागी गयीं और यहीं कनकिता बरुआ वीरगप्रत को िाप्त हुईं थी । दे कर िह इस धरा को अब हम यहां से जाते ह करना रखवािी ग़द्दारों स रखना घर अपना खािी लजसमें भारत माँ की गोद म ल्खि सके सुन्दर क्यारी आज़ाद पररदो- सा उड़ सके दे श का हर बच्चा अपने जीवन का त्याग यही यही समपणफ है मेरा ।  आजादी से जुड़े कुछ अनसुने िथ्य 1. क्या आप जािते हैं भारत के अ ब् ं तम वायसराय िॉडि माउंटबेटि िे 15 अगस्त के ब्दि को ही आजादी का ब्दि इसीब्िए म क ु रि र ब्कया था क्योंब्क दो वषि पहिे 15 अगस्त के ब्दि ही ब्मत्र देशों की सेिा के सामिे जापाि िे समपिण ब्कया था। 2. 15 अगस्त के ब्दि ही दब्क्षण कोररया िे जापाि से (1945), बहरीि िे इ ग् ं िैंड से (1971) और फ्ांस से कॉंगो गणराज्य ि (1960) स्वािीिता हाब्सि की थी। 3. भारत में ब्िब्टश शासि का अंब्तम वायसराय होिे की वजह से िॉडि माउंटबेटि को भारत और पाब्कस्ताि, दोिों देशों म स्वतंत्रता ब्दवस से ज ड़ ु े आयोजिों में शाब्मि होिा था। ब्कसी भी प्रकार की अस ब् ु विा से बचिे के ब्िए माउंटबेटि िे 14 अगस्त के ब्दि को पाब्कस्ताि का स्वतंत्रता ब्दवस घोब्षत कर ब्दया था। 4. जवाहरिाि िेहरू िे अपिा प्रब्सद्ध भाषण 'ब्रस्ट ब्वद डेब्स्टिी' प्रिािमंत्री बििे से पहिे ही दे ब्दया था। उल्िेखिीय है ब्क िेहरू िे यह भाषण 14 अगस्त की मध्यराब्त्र को ब्दया था जबब्क देश के पहिे प्रिािम त्र ं ी वह 15 अगस्त की स ब ु ह बिे थे। 5. अमेररका को आज से करीब 225 साि पहिे स्वतंत्रता ब्मि गई थी िेब्कि भारत को स्वतंत्रता ब्मिे मात्र 64 वषि ही हुए हैं। 6. डेब्वड थोरो की ब्कताब, ब्जसके अि स ु ार ब्कसी को भी टैक्स िहीं भरिे चाब्हए, से महात्मा गांिी काफी प्रभाब्वत हुए थे। उन्होंि 7. इसी ब्कताब में उल्िेब्खत तरीकों का अि स ु रण भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ब्कया था। सब्विय अवज्ञा आंदोिि के दौराि ब्वदेशी वस्त ओ ं का बब्हष्ट्कार और िमक पर िगिे वािे कर का ब्वरोि करिा ब्जसके पररणामस्वरूप उिके अि य ु ायी स्वय िमक बिािे के ब्िए प्रेररत हुए , ऐसे ही कुछ उदाहरण थे। ब्भकाजी रुस्तम कामा पहिी ऐसी व्यब्क्त थीं ब्जन्होंिे 22 अगस्त, 1907 को जमििी में ब्तरंगा फहराया था। िेब्कि इस ब्तरंगे म और भारत के राष्ट्रीय ध्वज में थोड़ा अ त ं र था। ब्भकाजी कामा के झंडे में सबसे ऊपर हरा रंग , बीच में स ि ु हरा के सरी और सबस िीचे िाि रंग था। इस झंडे पर 'वंदे मातरम' ब्िखा था।  10 । The Progress of Jharkhand (Monthly)