Sri Vageesha Priyah eSouvenir Sri Krishna Brahmatantra Swatantra Parakala Mahade | Page 22

श्रीकृ ष्णब्रह्मतन्त्रस्वतन्त्र परकालमहादेशशक वैिवम ् सांख्यातीतप्रबन्धप्रशशमतशवमतातङ्कशङ्काकिां को ु मोदान्वेदान्त सूशरशदिशत ु गरुवरस्सवातन्त्रस्वतन्त्रः ॥५॥ ् आशदश्रीवण शठाशरयाशतपशतरिवद्यत्पदाब्जोपजीव्य ु स्सोयां श्रीवत्सवांश्यो वरदगरुरशपच्छात्रताां यत्रिेज े ॥ ा द्वैतीयीकावतारो य इह यशतपतेब्रह्मयश्चशद्वतीयां वेदान्ताचायाशशष्यस्सशकल शवजयताां ब्रह्मतन्त्र स्वतन्त्रः ॥६॥ ा ृ शिल्लीशानाशचाताांशियाशतकुलनृपतेयस्ततीयोवतारो े शदव्येदश े समग्रेकृतशनगमशशरो देशशकाचााप्रशतष्ठाां ॥ यश्श्रीमद्ब्रह्मतन्त्राशिर्यशत शतलकास्थानलक्ष्मीशनर्ानां ् कुवान्नाताप्रपशत्तां स्फुटशनजमशहमाां न्यासशवद्याां व्यतानीत ॥७॥ यश्श्रीकणााटशसांहासनशवशदत महीशूर सद्राजर्ानी ु सम्राजो वैष्णवाग्र्यान्व्यतनत कृ पया शांखचक्ाांकनाद्य ैः ॥ ु व्याख्याां िाष्यस्य तद्वत्परमपशनिदाां द्राशमडीनाञ् चक्े शवख्यातो दात्तिूमा स जयत ु परकालाशिर्ानो यतीन्द्रः ॥८॥ ु श्रीमत्त्रयीशवद्यानवद्यपद्याप्रशतष्ठापनगशरष्ठ परमपरुि पदनशिनहांसायमानमानस परमहांसपशरव्राजकाचाया ु सवातन्त्र स्वतन्त्रोिय शनगमान्ताचाया श्रीमत्कशवकथककण्ठीरवचरणनशिन यगि शवन्यस्त ु समस्तात्मिर श्रीमद्रामानज शसद्धान्तशनर्ाारणसावािौम श्रीमच्छ्रीशनवासब्रह्मतन्त्र परकालसम्यशमसावािौम कृ पाकटाक्ष लशक्षत श्रीमच्छ्रीशनवासदेशशके न्द्र ब्रह्मतन्त्र परकालसांयशमवरेण्य करुणावरुणालय तरशङ्गत श्रीमद्रङ्गनाथ ब्रह्मतन्त्रपरकालयतीन्द्र महादेशशक कृ पासारपूशरतानाां श्रीमच्छ्रीकृ ष्ण ब्रह्मतन्त्रपरकाल सांयशमसावािौम महादेशशकानाां अष्टोत्तरशतनामाविी। 21