Sri Vageesha Priyah eSouvenir Sri Krishna Brahmatantra Swatantra Parakala Mahade | Page 21

श्रीकृ ष्णब्रह्मतन्त्रस्वतन्त्र परकालमहादेशशक वैिवम ् ॥ श्रीः॥ ु ॥ श्रीलक्ष्मीहयवदन लक्ष्मीनारायण वेणगोपाल परब्रह्मणे नमः॥ ु ॥ श्री शठकोप रामानज देशशके भ्यो नमः॥ ु ॥ श्री ब्रह्मतन्त्र स्वतन्त्र परकाल गरुपरम्परायै नमः॥ श्रीमत्कणााटशसांहासनार्ीश्वर श्रीकृ ष्णराजसावािौम शवरशचत श्रीमच्छ्रीकृ ष्णब्रह्मतन्त्रस्वतन्त्रपरकालसांयशमसावािौममहादेशशकानाां . अष्टोत्तरशतनामाविी . प्राचीसन्ध्या काशचदन्तशन ाशायाः प्रज्ञादृष्टेरञ्जनश्रीरपूवाा ॥ ु वक्त्रीवेदान्भात ु मे वाशजवक्त्रा वागीशाख्या वासदेवस्यमूशताः ॥१॥ श्रीमद्भाष्यां शनशम्