September 2026_DA | Page 47

ब्रिटिश सैलनकों को मेैदान के उस हिस्से मेें आता देख ऊदा ने उन पर निशाना लगाकर फायरिंग करना शुरू कर दिया । पेड़ की डालियों और पत्ों के पीछे छिपकर उसने किसी भी ब्रिटिश सैनिक को सिकंदरबाग के उस हिस्से मेें तब तक प्रवेश नहीं करने दिया ्था, जब तक उसका गोला-बारूद खत््म नहीं हो गया । ऊदा ने ब्रिटिश
सेना के दो बड़े अफसरों कूपर और लैम्सडन सहित 32 अंग्ेज सैलनकों को मेौत के घा्ट उतार दिया । गोलियां ख़त््म होने के बाद ब्रिटिश सैलनकों ने पेड़ को घेरकर उस पर अंधाधुंध फायरिंग की । कोई उपाय न देख जब वह पेड़ से नीचे उतरने िगीं तो उसे गोलियों से छलनी कर दिया गया । ब्रिटिश सेना के हा्थ पड़ने से पहले ही वह वीरगति को प्राप्त हो चुकी थीीं ।
लाल रंग की कसी हुई जैके्ट और पैं्ट पहने ऊदा की लाश जब पेड़ से जमेीन पर गिरी तो कैंपबेल यह देखकर हैरान रह गया कि वीरगति प्राप्त वह बहादुर सैनिक कोई पुरुष नहीं, एक मेलहिा ्थी । ब्रिटिश साजजें्ट िलॉब्सणा लमेिेल ने अपने एक संस््मरण मेें बिना नामे लिये सिकंदरबाग मेें पीपल के बड़े पेड़ के ऊपर बैठिी एक ऐसी स्त्ी
का उ्किेख किया है, जो अंग्ेजी सेना के बत्ीस से अधिक सिपालहयों और अफसरों को मेार गिराने के बाद शहीद हुई ्थी । ऊदा देवी हमेारे राष्ट्रीय गौरव और स्वालभमेान की जीवंत प्रतीक हैं, जिन्होंने स्वतंत्ता संग्राम मेें अपने प्राणों की आहुति दी ्थी, लेकिन न इतिहास को उनकी याद है और न लोकमेानस को ।
झ्लकारीबाई
झलकारी बाई का जन््म 22 नवम्बर 1830 को झांसी के पास भोजला गांव मेें एक लनिणान कोली परिवार मेें हुआ ्था । बचपन मेें ही मेां की मेृत्यु हो गई ्थी । पिता ने उन्हें घुड़सवारी और हल्थयार चलाने मेें प्रशिक्षित किया । बाद मेें उनका विवाह रानी लक्ष्मीबाई की सेना मेें तोपची पूरन सिंह से हो गया ।
लाड्ट डलहौजी की राज्य हड़पने की नीति के चलते, लब्ल्टिों ने निःसंतान लक्ष्मीबाई को उनका उत्राधिकारी गोद लेने की अनुमेलत नहीं दी । ब्रिटिश की इस कारणावाई के विरोध मेें रानी की सारी सेना, उसके सेनानायक और झांसी के लोग रानी के सा्थ लामेबंद हो गये और उन्होंने
आत््मसमर््पण करने के बजाए लब्ल्टिों के खिलाफ हल्थयार उठिाने का संक्कप लिया । लेकिन रानी के सेनानायकों मेें से एक दू्कहेराव ने उसे धोखा दे दिया और किले का एक संरक्षित द्ार ब्रिटिश सेना के लिए खोल दिया । झांसी के किले को सैलनकों ने घेर लिया ्था । दीवार ्टू्ट जाने के कारण अंग्ेजी सेना के किले मेें अंदर आने की आशंका बनी हुई ्थी ।
झांसी किले मेें आपातकालीन बैठिक चल रही ्थी । इतने मेें झलकारी मेहारानी लक्ष्मीबाई से लमेिने आई, कहा कि युधि आमेने-सामेने का होने वाला है, हमे नहीं चाहते कि आप किसी संक्ट मेें पड़ें । रानी स्वयं भी इसी बारे मेें विचार कर रही ्थी I उसने झलकारी से इसका उपाय पूछा । उसने कहा कि बाई साहब आपको इस किले से बाहर हो जाना चाहिए । दुश््मन को भ्रमे मेें डालने के लिए मैैं आपका वेश बनाकर बाहर निकलूंगी ताकि दुश््मन मेुझे रानी समेझ कर मेुझे पकड़ने मेेरे पीछे आएंगे । इसी बीच आप किले से बाहर चले जाएं । शत्ु भ्रमे मेें पड़ा रहेगा और तब तक आप सुरक्षित स््थान पर पहुंच जाएंगी ।
पूणणा रूप से सुसलजित झलकारी रानी के भेष मेें अंग्ेजों के सा्थ भयंकर युधि कर रही ्थी, तभी एक सैनिक ने उसे पहचान लिया । झलकारी ने उसे अपनी गोली का निशाना बनाया किंतु गोली किसी अन्य अंग्ेज सैनिक को लगी । अंततोगत्वा झलकारी पकड़ी गई । अंग्ेज अधिकारी ने कहा कि तुमेने हमेें धोखा दिया है तुम्हें मेार दिया जाएगा तो झलकारी ने उत्र दिया " मैैं सामेने हूं, मेार डालो मेुझे ।" झलकारी रात मेें अंग्ेजों के बीच से निकल वापस मेहल पहुंच गई । जब अंग्ेजों ने वापस झांसी पर आक्रमण किया तो झलकारी तोपची के पास खड़े होकर गोलियों की वषाणा कर रही ्थी । युधि के दौरान तोपची पूरन सिंह को गोली लगी तो संचालन स्वयं झलकारी ने संभाला और शत्ु की सेना मेें कोहरामे मेच गया । उसी समेय एक गोला झलकारी को आ लगा और वह " जय भवानी " के उच्चार के सा्थ जमेीन पर गिर पड़ी । �
flracj 2026 47