तो अदालतों पर सवाल उठाए ।
� जब जनता ने नकार वद्या, तो ईिरीएम( EVM) पर दोष मढ़ा ।
और अब जब चुनाव आ्योग मतदाता सूचरी को पारदशशी बना रहा है, तो सरीधे मुख््य चुनाव आ्युक्त करी निष्पक्ता पर लांछन लगा रहा है ।
मोदरी सरकार का रुख हमेशा स्पष््ट रहा है
कि संवैधानिक संस्थाएं अपनरी कानूनरी परिधि में स्ितंत् हैं । सरकार का काम आ्योग करी स्िा्यत्तता में दखल देना नहीं, बक्ल्क ्यह सुवनक्श्चत करना है कि देश के हर वैध नागरिक का वो्ट सुरवक्त रहे और चुनािरी प्रवरि्या में किसरी भरी तरह करी धांधलरी करी गुंजाइश न बचे ।
3. सामाजिक न्दयाय का ढोोंग और तुष्टीकरर् का डर
विपक् इस पूरे विवाद को ' दलित, पिछड़े और अल्पसंख््यक मतदाताओं के अधिकार छरीने जाने ' का भावनात्मक रंग देने करी भरपूर कोशिश कर रहा है । लेकिन सच्ाई ्यह है कि मोदरी सरकार करी सभरी जनकल््ययाणकाररी नरीवत्यां बिना किसरी भेदभाव के हर वंचित तबके तक पहुंचरी हैं ।
परीएम आवास ्योजना, उज्जिला ्योजना, आ्युष्मान भारत, और राशन वितरर् ्योजना— इन सभरी ्योजनाओं के सबसे बड़े लाभाथशी देश के दलित, पिछड़े और गररीब परिवार हरी हैं ।
जब सरकार बुवन्यादरी ्योजनाओं का लाभ देते सम्य किसरी करी जाति ्या धमवा नहीं देखतरी, तो मतदाता सूचरी में भेदभाव का आरोप केवल एक
राजनरीवतक प्रपंच मात् है ।
विपक् ्यह अच्छरी तरह जानता है कि आज का जागरूक दलित और पिछड़ा मतदाता किसरी एक दल करी जागरीर नहीं है । वह विकास, सुशासन और सुरक्ा के नाम पर नरेंद्र मोदरी के नेतृत्ि पर विश्िास जता रहा है । विपक् करी असलरी चिंता दवलतों के अधिकार नहीं, बक्ल्क उनका खिसकता
मतदवातवा सूची कवा शुद्धिकरण किसी सरकवार यवा पार्टी कवा एजेेंडवा िहीं, बल्कि निष्पक्ष चुिवार् और सशक्त लोकतंरि की अनिर्वाय्य आर्श्यकतवा है । मोदी सरकवार के सुशवासन कवा मूल मंरि है—'' सबकवा सवाथ, सबकवा वर्कवास, सबकवा वर्श्वास और सबकवा प्रयवास ।'' इस मंरि के तहत हर र्ैध भवारतीय िवागरिक कवा मतवाधिकवार पूरी तरह सुरद्क्षत है ।
हुआ वो्ट बैंक है । जब मतदाता सूचरी से बोगस नाम ह्टते हैं, तो सबसे बड़ा नुकसान उन दलों को होता है जो फजशी मतदान और बूथ कैप्चरिंग के पुराने ढररे पर राजनरीवत करते आए हैं ।
4. तथ्य बनाम केवल शोर: विपक्ष के पास सबूतों का अभाव
वनिावाचन आ्योग करी प्रवरि्या पूररी तरह पारदशशी है । ड्ाफ््ट वो्टर लिस््ट प्रकाशित करी जातरी है, आपवत्त्यां( Claims and Objections) दजवा करने का प्यावाप्त सम्य वद्या जाता है, और बूथ स्तर के अधिकारियोों( BLO) द्ारा घर-घर जाकर सत््यापन वक्या जाता है । ्यवद किसरी वैध मतदाता का नाम गलतरी से छू्टा है, तो फॉमवा-6 और संबंधित प्रवरि्याओं के माध््यम से उसे तुरंत जोड़ा जा सकता है ।
सवाल ्यह उठता है कि विपक्षी दलों के पास ्यवद लाखों नाम गलत तररीके से ह्टाए जाने के ठोस सबूत हैं, तो वे संबंधित वनिावाचन अधिकारियोों ्या अदालतों के समक् ्डोे्टा क््यों नहीं प्रस्तुत करते? ्टेबल पर तथ््य और आंकड़े रखने के
बजा्य ्टरीिरी कैमरों के सामने धरने पर बैठना ्यह साबित करता है कि विपक् का मकसद समस््या का समाधान नहीं, बक्ल्क केवल देश में एक कृवत्म अविश्िास और अशांति का माहौल खड़ा करना है ।
5. 2027 और भविष्य की हार का अवरिम बहाना
उत्तर प्रदेश समेत आने वाले विधानसभा चुनािों को देखते हुए विपक् अपनरी संभावित पराज्य के लिए पहले से हरी बहाने तलाश रहा है । कभरी गठबंधन के आंतरिक अंतविवारोधों को छिपाने के लिए तो कभरी नेतृत्ि के अभाव पर पदावा ्डोालने के लिए, एक साझा ' विलेन ' करी तलाश करी जातरी है ।
अखिलेश ्यादव का परी्डोरीए( पिछड़ा, दलित, अल्पसंख््यक) का नारा हो ्या कांग्रेस का ' संविधान बचाओ ' का प्रलाप— दोनों हरी जमरीन पर नेतृत्ि और सांगठनिक स्तर पर खोखले साबित हो रहे हैं । दिल्लरी करी सड़कों पर हुआ प्रदशवान गठबंधन करी मजबूतरी का नहीं, बक्ल्क अंदरूनरी अविश्िास का प्रतरीक था, जहां हर दल अपने- अपने चुनािरी हित साधने के लिए आ्योग पर ठरीकरा फोड़ रहा था ।
मतदाता सूचरी का शुद्धिकरर् किसरी सरकार ्या पार्टी का एजें्डोा नहीं, बक्ल्क निष्पक् चुनाव और सशक्त लोकतंत् करी अनिवार््य आवश््यकता है । मोदरी सरकार के सुशासन का मूल मंत् है—'' सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्िास और सबका प्र्यास ।'' इस मंत् के तहत हर वैध भारतरी्य नागरिक का मताधिकार पूररी तरह सुरवक्त है ।
विपक् को समझना चाहिए कि जनता नारों और झूठे आरोपों से नहीं, बक्ल्क ठोस नरीवत्यों और काम से प्रभावित होतरी है । चुनाव आ्योग पर अनगवाल आरोप लगाने और अधिकारियोों के इस्तरीफे करी मांग करने से बेहतर होगा कि विपक् रचनात्मक राजनरीवत करे और जनता का विश्िास जरीतने करी कोशिश करे । संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करके सत्ता पाने का दौर अब भारत करी जागरूक जनता पूररी तरह समाप्त कर चुकरी है । �
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