विशेष
निर्वाचन आयोग द्वारवा मतदवातवा सूची कवा वर्शेष गहन पुनरीक्षण पवारदशशी और निष्पक्ष चुिवार् सुनिश्चित करने की दिशवा में एक आर्श्यक कदम है । फर्जी और दोहरे मतदवातवाओं को हटवािवा लोकतांत्रिक शुचितवा कवा हिस्सा है । ऐसे में बििवा ठोस प्रमवाण संर्ैधवानिक संस्थाओं पर आरोप लगवािवा वर्पक्ष की चुिवार्ी हतवाशवा और आधवारहीन रवार्िीति को दशवातवा है ।
— डॉ. विजय सोनकर शास्त्री
भा
रतरी्य लोकतंत् विश्ि का सबसे विशाल और सशक्त लोकतंत् है । सम्य-सम्य पर निष्पक् और पारदशशी चुनाव कराने करी जिम्मेदाररी एक स्ितंत् संवैधानिक संस्था— भारत वनिावाचन आ्योग( ECI)— के कंधों पर रहरी है । पिछले कुछ सम्य से विपक्षी दलों( इं्डोरी गठबंधन) द्ारा मतदाता सूचरी के विशेष गहन पुनररीक्र्( Special Intensive Revision- SIR) और मुख््य चुनाव आ्युक्त ज्ानेश कुमार को लेकर सड़क से संसद तक जो हो-हल्ला मचा्या जा रहा है, वह असल में संस्थाओं पर अविश्िास पैदा करने करी एक हताशा भररी कोशिश ज््यादा प्रतरीत होतरी है । जब भरी चुनाव पररर्ाम विपक् के राजनरीवतक समरीकरणोों के प्रतिकूल होते हैं, कभरी ईिरीएम तो कभरी चुनाव आ्योग को कठघरे में खड़ा करना विपक् करी पुरानरी कार््यशैलरी बन चुका है ।
1. फजजी वोटरों की छंटनी से घबराहट क्यों?
लोकतंत् करी सबसे पहलरी शतवा ्यह है कि मतदाता सूचरी पूररी तरह त्रुटिहरीन, अद्यतन और
पारदशशी हो । दशकों से देश के विवभन् राज््यों में फजशी पते, मृत व््यक्क्त्यों के नाम, एक हरी व््यक्क्त का कई विधानसभा क्ेत्ों में पंजरीकरर् और अवैध रूप से जुड़े मतदाताओं करी शिकायतेें सामने आतरी रहरी हैं ।
मोदरी सरकार के शासनकाल में शासन के हर स्तर पर व्डोवज्टलरीकरर् और पारदवशवाता को प्राथमिकता दरी गई है । वनिावाचन आ्योग द्ारा चला्या जा रहा ' विशेष गहन पुनररीक्र् '( SIR) कोई नई ्या पक्पातरी प्रवरि्या नहीं है, बक्ल्क इसका उद्ेश््य पूररी तरह वैधानिक प्रवरि्या के तहत मतदाता सूचरी को शुद्ध करना है ।
� जिन मतदाताओं का निधन हो चुका है, उनके नाम ह्टाना कानूनरी अनिवार््यता है ।
� जो लोग स्थाई रूप से दूसररी जगह स्थानांतरित हो चुके हैं, उनकरी मैपिंग ठरीक करना आवश््यक है ।
� एक हरी व््यक्क्त के कई जगह बने फजशी पहचान पत्ों को निरस्त करना लोकतंत् करी शुचिता के लिए जरूररी है ।
्यवद वनिावाचन आ्योग फजशी मतदाताओं करी पहचान कर सूचरी को स्िच्छ बना रहा है, तो किसरी भरी जिम्मेदार राजनरीवतक दल को इसका
स्िागत करना चाहिए । इसके विपररीत, विपक् द्ारा इसे '' वो्ट छरीनने '' का नाम देना ्यह दशावाता है कि उनकरी राजनरीवत दशकों से इसरी अव््यिक्स्थत तंत् और फजशी वोटोों के तुष््टटिकरर् पर वनभवार रहरी है ।
2. संवैधानिक संस्र्ाओं पर सुनियोजित हमला
बाबा साहेब ्डोॉ. भरीमराव आंबे्डोकर द्ारा रचित संविधान ने चुनाव आ्योग को स्िा्यत्तता और व््यापक अधिकार दिए हैं ताकि वह बिना किसरी राजनरीवतक दबाव के काम कर सके । लेकिन कांग्रेस और उसके सह्योगरी दल अपनरी राजनरीवतक जमरीन खिसकतरी देख सरीधे संवैधानिक प्रमुखों को निशाना बनाने लगे हैं । मुख््य चुनाव आ्युक्त के इस्तरीफे करी मांग करना, सड़क पर उतरकर संसद से आ्योग तक माचवा निकालना और अधिकारियोों के खिलाफ व््यक्क्तगत व्टप्पवर््यां करना किसरी स्िस्थ लोकतांवत्क परंपरा का हिस्सा नहीं हो सकता ।
यह वही विपक्ष है जिसने:
� जब चुनािरी नतरीजे पक् में नहीं आए,
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