लाल बहादुर शास्त्ी के तीसरे बेटे सुनील शास्त्ी भी अपने पिता की तरह सिद्ांतवादी राजनीति में विश्िास रखते हैं । उन्दहोंने कभी अपने स्िार्थों के लिए सिद्ांत से समझौता नहीं किया । सुनील शास्त्ी से संवाददाता मानिेंद्र ने खास बातचीत की
कड़ी धूप बनकर जीना सीखो- सुनील शास्त्ी
लाल बहादुर शास्त्ी के तीसरे बेटे सुनील शास्त्ी भी अपने पिता की तरह सिद्ांतवादी राजनीति में विश्िास रखते हैं । उन्दहोंने कभी अपने स्िार्थों के लिए सिद्ांत से समझौता नहीं किया । सुनील शास्त्ी से संवाददाता मानिेंद्र ने खास बातचीत की
लाल बहादुर शास्त्ी जी के जीवन का मूल मंत् क्या र्ा । जो आपको उन्दहोंने दिया हो ।
उन्दहोंने एक मूल मंत् हमें वद्या कि हमेशा सच बोलो । एक झूठ बोला तो उसे छिपाने के लिए फिर सौ झूठ बोलना पड़ता है । बाबू जरी का बड़ा व््यक्क्तत्ि है । जो देश को मागवादशवान वद्या । बाबू जरी हर पार्टी के नेता को बड़े हरी सम्मान करते थे । बाबूजरी करी विश्िसनरी्यता बेमिसाल थरी । उस सम्य जब कोई इलेक्ट्रॉनिक मरीव्डो्या नहीं थरी । केवल आकाशवार्री था और वप्रं्ट मरीव्डो्या भरी कुछ खास शहरों में था । वैसे सम्य में देश में एक आवाज देने पर हरी पूरा देश उनके परीछे खड़ा था ।
शास्त्ी जी से जुड़ा प्रसंग जो आज तक आप भूले न हो ।
हमलोग छो्टे थे । देश अन् संक्ट से गुजर रहा था । बाबू जरी गांधरीजरी के सच्े अनु्या्यरी थे । उस सम्य विकसरीत देश ने कहा कि हम अब परीएल 84 नहीं देंगे । बाबूजरी ने देश में कोई भरी प्र्योग से पहले अपने घर में हरी अपनाने को सोचा । बाबूजरी ने हमलोग को घर में खाने पर एक साथ बिठा वल्या । उन्दहोंने साफ कहा कि अब रावत् में हमलोग कोई भरी एक सप्ताह
भोजन नहीं करेगा । मुझे उन्दहोंने अपने बगल में बिठा्या था । एक सप्ताह ऐसा हरी हुआ । जब ्यह प्र्योग घर में सफल रहा । इसके बाद उन्दहोंने देश के लोगों से ऐसा करने करी अपरील करी । और देखिए बाबूजरी करी विश्िसनरी्यता । पूरा देश उनके परीछे खड़ा था । पूरे देश में सोमवार के दिन शाम को ढाबा तक बंद कर वद्या ग्या । आज भरी बहुत से लोग इसे मानते हुए चले आ रहे हैं । बाबूजरी ने ऐसे मिसाल का्यम किए जिससे पूरा देश एकजु्ट हो ग्या ।
उस समय के राजनीति में भी कई दल र्े कैसे संबंध र्े अन््य दिों से शास्त्ी जी के ।
बाबूजरी करी खास बात ्यह थरी करी सभरी दलों के लोगों से वे बात करते थे । चाहे वे जनसंघ के हो ्या काम््युवनस््ट के । बिना सबके आए मरीव्टंग शुरू नहीं होतरी थरी ।
बाबूजी की कुछ प्रेरक वाक्य जो आज भी आपको प्रेरर्ा देता हो ।
बिल्कुल । एक बार करी बात है वे दफ्तर जा रहे थे मैंने उन्दहें रोक वल्या । उन्दहोंने कहा जरूररी मरीव्टंग है जाना है । मैंने कहा आप घऱ के दफ्तर में जो वाक््य लिखे हैं उसका क््या मतलब है । वे वाक््य हैं-
नानक नन्दहे हे रहो ।
जैसे नन्े ्डोूब । और रूक सुख जाएगा ्डोूब खूब करी खूब । इसका क््या मतलब है । उन्दहोंने बता्या कि मैं कभरी भरी सुंदर फूल नहीं बनने करी चेष््टा नहीं करी । सुंदर फूल मुरझा जाता है । कड़री धूप बनकर रहना चाहता हूं । जो कभरी मुरझाता नहीं । वे हमेशा कहते थे कि जरूररी नहीं है कि आप आगे आएं । और आपको सब जाने । बक्ल्क मजबूत नींव का पत्थर बने ।
शास्त्ी जी की कोई ऐसी इच्छा जो अधूरी रह गई हो ।
बाबूजरी देश में मूलभूत पररितवान लाना चाहते थे । उन्दहोंने कहा था कि ताशकंद से लौ्टूंगा तो मैं शिक्ा के क्ेत् में पररितवान लाऊंगा । जिसपर कार््य करूंगा । उनका मानना था कि स्ातक में पढ़ाई के रिम हरी ्युवा गांव में जाएं और वहां के वातावरर् समस््या को भरी समझें । भारत गांिों का देश है और वहां हरी भारत करी आत्मा बसतरी है । बड़े शहरों, बड़े कस्बों में रहकर हमारा ्युवा अपने भारत को पहचान नहीं पाता है । उन्दहोंने जो नारा वद्या ज्य जवान ज्य किसान इसरी में ज्य हिंद साफ झलकता है । �
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