October 2026_DA | Page 23

पंजाब और जम्मू-कश्मरीर का प्रभार सत् ्य पूवन्या को वद्या ग्या है । पंजाब में वीरेेंद्र सचदेवा और अलका गुजवार तथा जम्मू-कश्मरीर में ररीना कश््यप सह-प्रभाररी हैं । दोनों क्ेत्ों करी परिस््थथितियां अलग होने के बावजूद संगठनात्मक स्तर पर एक हरी वरिष्ठ नेता को जिम्मेदाररी देकर पार्टी ने केंद्ररी्य समन्दि्य बनाए रखने का प्र्यास वक्या है ।
पक्श्चम बंगाल करी ्टरीम में लाल सिंह आर््य करी मौजूदगरी सामाजिक प्रतिनिधित्ि करी दृष््टटि से सबसे स्पष््ट उदाहरणोों में है । उनके साथ राजेंद्र सिंह और पिंकरी कुशवाहा भरी सह-प्रभाररी हैं । इस ्टरीम में अलग-अलग अनुभव और सामाजिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को शामिल वक्या ग्या है । पक्श्चम बंगाल में संगठन के विस्तार के लिए ्यह ्टरीम स्थानरी्य नेतृत्ि के साथ किस तरह तालमेल बनातरी है, ्यह आने वाले सम्य में महत्िपूर््ण होगा ।
प्रभाररी और सह-प्रभाररी करी वन्युक्क्त्यों का
महत्ि इसलिए भरी अधिक है क््योंकि ्ये नेता राष्ट्ररी्य नेतृत्ि और राज््य इकाई के बरीच स््थथायी कड़री करी तरह काम करते हैं । वे संगठन करी गतिविधियोों करी समरीक्ा करते हैं, प्रदेश नेतृत्ि के साथ संवाद रखते हैं और राष्ट्ररी्य नेतृत्ि करी राजनरीवतक-संगठनात्मक प्राथमिकताओं को राज््यों तक पहुंचाते हैं । इसलिए इन पदों पर सामाजिक और क्ेत्री्य विविधता का महत्ि केवल प्रतिनिधित्ि तक सरीवमत नहीं रहता ।
नितिन नबरीन करी नई व््यवस्था में एक तरफ विनोद तािड़े, राम माधव, सुनरील बंसल, स्मृवत ईरानरी, हरिश वद्िेदरी और बैज्यंत पां्डोा जैसे अनुभिरी नेताओं को महत्िपूर््ण राज््यों करी जिम्मेदाररी मिलरी है, तो दूसररी तरफ उनके साथ अलग-अलग क्ेत्ों और सामाजिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को सह-प्रभाररी के रूप में जोड़ा ग्या है । इससे प्रभाररी ्टरीमों को अधिक व््यापक बनाने करी कोशिश दिखाई देतरी है ।
सबसे महत्िपूर््ण बात ्यह है कि इस नई व््यवस्था में दलित और पिछड़े नेतृत्ि को केवल प्रतरीकात्मक उपक्स्थवत तक सरीवमत नहीं रखा ग्या है । भोला सिंह और लाल सिंह आर््य जैसे नेताओं को महत्िपूर््ण राज््यों में सह-प्रभाररी बना्या ग्या है । िहीं कई राज््यों में ओबरीसरी, आदिवासरी और महिला नेताओं को भरी प्रभाररी ्या सह-प्रभाररी करी जिम्मेदारर्यां मिलरी हैं । ्यह सामाजिक प्रतिनिधित्ि को संगठन के राज््य स्तररी्य ढांचे से जोड़ने करी कोशिश के रूप में देखा जा सकता है ।
लेकिन वन्युक्क्त के बाद असलरी पररीक्ा शुरू होगरी । किसरी नेता को प्रभाररी ्या सह-प्रभाररी बनाना संगठनात्मक जिम्मेदाररी करी शुरुआत है । उसे बूथ से लेकर प्रदेश नेतृत्ि तक लगातार संवाद का्यम करना होगा । कार््यकतावाओं करी प्रवतवरि्या राष्ट्ररी्य नेतृत्ि तक पहुंचानरी होगरी और सामाजिक समूहों के बरीच संगठन करी पहुंच बढ़ानरी होगरी ।
नितिन नबरीन करी इस नई प्रभाररी ्टरीम करी सबसे बड़री विशेषता इसलिए केवल ्यह नहीं है कि किस राज््य में कौन ग्या है, बक्ल्क ्यह है कि राज््यों करी जिम्मेदाररी बां्टते सम्य अनुभव के साथ सामाजिक और क्ेत्री्य विविधता को भरी जगह दरी गई है । विशेषकर भोला सिंह और लाल सिंह आर््य करी वन्युक््ततियां बतातरी हैं कि दलित नेतृत्ि को महत्िपूर््ण राज््यों के संगठनात्मक काम से जोड़ा ग्या है । पिछड़े और आदिवासरी पृष्ठभूमि वाले कई चेहरों करी मौजूदगरी इस संरचना को और व््यापक बनातरी है ।
अब आने वाले महीनोों में इस ्टरीम करी कार््यशैलरी पर नजर रहेगरी । उत्तर प्रदेश में विनोद तािड़े करी ्टरीम, हरर्यार्ा में स्मृवत ईरानरी-भोला सिंह करी जोड़री और पक्श्चम बंगाल में सुनरील बंसल-लाल सिंह आर््य करी ्टरीम जैसे प्र्योग ्यह त्य करेंगे कि नितिन नबरीन द्ारा तै्यार करी गई नई संगठनात्मक संरचना जमरीन पर कितनरी सवरि्य और प्रभािरी रहतरी है । फिलहाल इतना जरूर है कि प्रभाररी और सह-प्रभाररी वन्युक्क्त्यों में सामाजिक प्रतिनिधित्ि को जगह देकर भाजपा के नए संगठनात्मक ढांचे का एक महत्िपूर््ण अध््ययाय शुरू हुआ है । �
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