Nov 2025_DA | Page 9

भ़ी रंचमारि हित नहीं होगा ।
आप मुझे ्यह कहने क़ी अनुमति देंगे कि भले ह़ी आप कितऩी भ़ी सहानुभूति रखते हों पर आप संबद पक्ों के लिए ऐसे अति महतवपूर्ण तथिा धार्मिक महतव के मामले पर कोई ्ठ़ीक निर्त्य नहीं ले सकते । ्पष्ट है कि गांध़ी के लिए दलितों का हित दूसरे स्थान पर थिा, उनक़ी पहि़ी प्राथिलमकता थि़ी हिंदू धर्म को तथिाकलथित सर्वनाश से बचाना जबकि आंबेडकर अपना पहला दाल्यतव दलितों का कल्याण और उत्थान चाहते थिे । उनहें हिंदू धर्म क़ी वर्ण. व्यवस्था को खतम करना थिा जोकि सामाजिक असमानता का मूल कारण है । आंबेडकर हिंदू जाति. व्यवस्था द्ािा दलितों पर लादे अलगाव को और तदजन्य ह़ीन भावना से दलितों को छु्टकारा दिलवाने का एक मारि रा्ता धर्म परिवर्तन को पाते थिे बशततें कि अपना्या जाने वाला न्या धर्म दलितों के साथि हिंदू धर्म में जाि़ी तमाम प्रकार के बहिषकाि, बेरूख़ी और पूर्वाग्रहों से मुकत हो । पुरूष सत्तातमक समाज ने सबसे ज्यादा क्ठोरए उत्पीड़नकाि़ी, शोषणकाि़ी और अन्या्यपूर्ण रहा है क्योंकि ्यह नाि़ी को सभ़ी मूलभूत अधिकारों से वंचित कर उसे नारक़ी्य ज़ीवन ज़ीने पर
मजबूर करता है जबकि आर्यों के समाज में ्रि़ी और शूद्रों को एक ह़ी स्थिति में रखा जाता थिा । शिक्ा के अधिकार से भ़ी उनहें वंचित रखा जाता थिा । परिवर्तनवाद़ी समाज व्यवस्था के प्रणेता डॉ आंबेडकर ने देश का क़ानून मंत्री रहते हुए ्रि़ी शिक्ा और समान अधिकार को समाज में स्थापित करने के लिए विधिवत हर संभव प्र्यास लक्या । वे नाि़ी शिक्ा, ्वतंरिता, समानता तथिा अस्मता के प्रबल समथि्तक थिे । ज्योतिबा फुले क़ी ह़ी तरह इनहोंने सबसे अधिक जोर ्रि़ी शिक्ा पर लद्या क्योंकि शिक्ा ह़ी वह रा्ता है जिससे होकर अपने अधिकारों को पा्या जा सकता है और पितृ सत्तातमक व्यवस्था तथिा संस्था से मुसकत भ़ी पा्या जा सकता है । ्रि़ी क़ी दशा ह़ी लकि़ी देश क़ी दशा, प्रगति और उन्लत निर्धारित करत़ी है । अतः डॉ आंबेडकर का मानना थिा कि शिक्ा ह़ी प्रगति और उन्लत का मार्ग खोल सकत़ी है, शिक्ा ह़ी सामाजिक क्रासनत का पहला कदम है । ्वतंरिता प्रासपत के सम्य भ़ी स्रि्यों क़ी दशा काि़ी द्यऩी्य थि़ी । संपत्ति में उनका कोई अधिकार नहीं थिा । बहुपत्नी विवाह स्रि्यों को नारक़ी्य ज़ीवन ज़ीने पर बाध्य करता थिा । पति द्ािा परित्याग कर दिए जाने पर उसके गुजर. बसर का कोई साधन न होता थिा । डॉ आंबेडकर भारत़ी्य स्रि्यों क़ी सामाजिक, आलथि्तक और राजनैतिक स्थिति में परिवर्तन चाहते थिे । वो एक ऐसा क़ानून बनाना चाहते थिे जो स्रि्यों क़ी सामाजिक, आलथि्तक और कानूऩी स्थिति में आमूलचूल परिवर्तन कर सके । इसलिए उनहोंने स्रि्यों के अधिकार के लिए हिनदू कोड बिल बना्या जिसके कारण कई बार उनहें व्यसकतगत रूप से अपमानित भ़ी होना पड़ा ।
स्रि्यों क़ी प्रगति के लिए उ्ठाए गए इस कदम को विरोधों का सामना करना पडा । इस बिल में आ्ठ अलधलन्यम बनाए गए थिे जो इस प्रकार हैं- हिनदू विवाह अलधलन्यम, विशेष विवाह अलधलन्यम, गोद लेना दत्तक ग्रहण अल्पायु संिक्ता अलधलन्यम, निर्बल तथिा साधनह़ीन परिवार के भरण. पोषण अलधलन्यम, हिनदू उत्तराधिकाि़ी अलधलन्यम, अप्रापत व्य्य संिक्र समबन्धी अलधलन्यम, उत्तराधिकाि़ी अलधलन्यम
और विधवा विवाह को पुनर्विवाह अलधलन्यम, पिता क़ी संपत्ति में अधिकार अलधलन्यम । संविधान ने स्रि्यों को हर वो अधिकार लद्या जिससे वह वंचित थि़ी । पुरूष प्रधान भारत़ी्य समाज पर आघात करते हुए ्यह बिल भारत़ी्य महिलाओं को पुरूषों के बराबार कानूऩी और सामाजिक अधिकार के मांग पर आधारित थिा । हिनदू कोड बिल के तहत लकि़ी भ़ी जाति क़ी लड़क़ी ्या लड़के का विवाह होना अवैध नहीं थिा । इस कोड के अनुसार पति और पत्नी एक सम्य में एक ह़ी विवाह कर सकते है । कोई भ़ी पति पहि़ी पत्नी के और कोई भ़ी पत्नी पहले पति के रहते दूसरा विवाह अगर करे तो दंडऩी्य अपराध माना जाएगाए पति के गुजर जाने पर पत्नी को उसक़ी संपत्ति में संतान के बराबर लह्िा मिलेगाए पिता क़ी संपत्ति में पुलरि्यों को भ़ी पुरिों के समान अधिकार लद्या जाएगा ।
विधवाओं के लिए दूसरे विवाह का प्रावधान, पति के अत्याचार से प़ीलडत पत्नी के लिए तलाक का प्रावधान और तलाक देने क़ी स्थिति में पति को पत्नी के गुजारा भत्ता देने का प्रावधान, महिलाओं को बच्चे न होने पर अपऩी मजटी से बच्चा गोद लेने का प्रावधान इत्यादि परनतु दुर्भाग्यवश कुछ कट्िपंलथि्यों के कारण ्यह बिल संसद में पारित न हो सका और डॉ आंबेडकर ने क़ानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे लद्या । वर्तमान सम्य में महिलाओं को पुरूषों के समान जो शैक्लरक, आलथि्तक, सामाजिक और सम्त अधिकार प्रापत हैं, इसका श्रेय हिनदू कोड बिल को जाता है क्योंकि बाद में हिनदू कोड बिल कई लह्िों में बं्टकर संसद में ध़ीिे. ध़ीिे पारित होने लगा । इस बिल के कई प्रावधानों को संसद में दूिि़ी सरकारों ने पास कराकर अपना वो्ट बैंक बना्या । िलद्यों से जिस अधिकार से स्रि्यां अछूत़ी थिीं, उससे संविधान ने ह़ी अवगत करा्या । नाि़ी ्वतंरिताए अस्मता और सममान के लिए बाबा साहेब आंबेडकर ने संविधान में कई प्रावधानों को सुनिश्चत लक्या । डॉ आंबेडकर क़ी ह़ी देन है कि भारत़ी्य क़ानून का प्रारूप बदला और उसमें मानव़ी्यता प्रसार हो पा्या । �
uoacj 2025 9