Nov 2025_DA | 页面 10

कवर स्टोरी

बाबा साहब का सृजनात्मक साहित्य

राजबहादुर

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ह सर्वविदित है कि बाबा साहब डा. आंबेडकर ने साहित्य क़ी विधा विशेष( ्यथिा-काव्य, कहाऩी, ना्टक आदि) में कोई रचना नहीं क़ी, लेकिन उनक़ी कलम से उच्च कोल्ट के विपुल साहित्य का सृजन हुआ है । उनका साहित्य मूलतः अंग्रेज़ी भाषा में गहन अध्य्यन एवं चिंतन के बाद सृजित हुआ है । बाबा साहब का साहित्य जितना उनके सम्य में प्रासंगिक थिा,
कहीं उससे अधिक वर्तमान में प्रासंगिक है । आज बाबा साहब का साहित्य एवं चिंतन भारत ह़ी नहीं बसलक पूि़ी दुलन्या में शोध का विष्य बना हुआ है । उनके बारे में नित न्य़ी जानकारि्याँ प्रापत हो रह़ी हैं । हम उनके ज़ीवन से तो बखूब़ी परिचित हो ग्ये हैं, लेकिन अभ़ी उनके साहित्य एवं चिंतन से कम परिचित हो पा्ये हैं ।
बाबा साहेब डा. आंबेडकर द्ािा रचित ग्रंथि कुछ तो उनके ज़ीवनकाल में ह़ी प्रकाशित हो
ग्ये तथिा कुछ उनके परिनिर्वाण के बाद प्रकाशित हो पा्ये, जिनका लतलथिवार विवरण निम्नवत् हैं-कास्टि इन इण्डिया( 1917), ्माि होलिंगि इन इंलड्या एणड दे्यि रेमिड़ीज( 1918), द़ी प्राबिम आफ दि रूप़ी( 1923), द़ी इवोल्यूशन आफ दि प्रोविन्शियन फाइनेंस इन लरिल्टश इंलड्या( 1924), एनाहिलेशन ऑफ़ कास्ट( 1936), मिस्टर गांध़ी एणड द़ी एमेन्सीपेशन ऑफ़ द़ी अन्टेचेविलि( 1945), रानाडे, गांध़ी एणड जिन्ा( 1943), थिाट्स
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