Nov 2025_DA | Seite 16

कवर स्टोरी

हिंदू समाज और राष्ट्र का सशक्तीकरण चाहतरे थरे डॉ. आंबरेडकर

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र्तमान सम्य में राजऩीलतक सुविधा के हिसाब से हर कोई डॉ. आंबेडकर को अपने अपने ति़ीके से परिभाषित करने में लगा हुआ है, कुछ उनहें देवता बनाने में लगे हैं तो कुछ उनहें केवल दलितों क़ी बपौत़ी मानते हैं और कई उनहें हिनदुओं के विरोध़ी ना्यक के रूप में रखते हैं । कुछ लोग
तो आंबेडकर के धर्म-परिवर्तन के सह़ी मर्म को समझे बिना ह़ी आज दलितों को हिंदुओं से अलग कर उनहें एक धर्म के रूप में रखने क़ी मांग करने लगे हैं ।
कोई इस पर बात ह़ी नहीं करना चाहता कि डॉ. आंबेडकर का पूरा संघर्ष हिंदू समाज ओर राषट् के सशक्तीकरण का ह़ी थिा । डॉ. आंबेडकर
के चिनतन और दृष्टि को समझने के लिए ्यह ध्यान रखना जरूि़ी है कि वे अपने चिनतन में कहीं भ़ी दुराग्रह़ी नहीं है । उनके चिनतन में जडता नहीं है । आंबेडकर का दर्शन समाज को गतिमान बनाए रखने का है । विचारों का नाला बनाकर उसमें समाज को डुबाने-वाला विचार नहीं है । आंबेडकर मानते थिे कि समानता के बिना
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