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कवर स्टोरी

दी अनटचेबिलस
्यह ग्रन्थ अक्टूबर 1948 में प्रकाशित हुआ । इसमें छुआछूत के उतपलत्त के सिदानतों के बारे में लव्ताि से बता्या ग्या है । डा. आंबेडकर ने इस पु्तक में प्रमाणों के साथि ्यह सिद लक्या है कि‘‘ अ्पृ््य पहले पराजित लोग थिे और बौद धर्म तथिा गोमांस खाना न छोड़ने से उनहें अ्पृ््य माना ग्या । उनके मतानुसार अ्पृ््यता का उदगम ईस्वी सन् 400 के दिलम्यान हुआ होगा । उनहोंने ्यह साबित लक्या कि बौद धर्म और रिाह्मण धर्म में श्ेष्ठता के लिए जो संघर्ष हुआ उससे अ्पृ््यता पैदा
हुई ।
थाट्स ऑफ लिंलगवलसटक सटेट
डा. आंबेडकर का ्यह महतवपूर्ण ग्रंथि 1955 में प्रकाशित हुआ । इसमें उनहोंने राज्यों के भाषाई ग्ठन का लचरिर लक्या है तथिा एक राज्य एक भाषा के सार्वभौमिक सिदानत को स्वीकार लक्या है । हिन्दी भाषा को समपूर्ण राषट् क़ी राजक़ी्य भाषा बना्ये जाने पर बल लद्या है । उनके अनुसार एक भाषा राषट् को संगल्ठत रख सकत़ी है और समपूर्ण राषट् में शासनत तथिा विचार संचार को आसान बना सकत़ी है ।
द बुद्ध ए्ड हिज धम्म
वैसे तो डा. आंबेडकर द्ािा लिखित सभ़ी पु्तकें अपना विशिष्ट महतव रखत़ी हैं । लेकिन उनमें से भ़ी सबसे महतवपूर्ण स्थान‘ द बुदा एणड हिज धमम’ का है । ्यह पु्तक बाबा साहेब डा. आंबेडकर के निर्वाणोपरानत सन् 1957 में प्रकाशित हो पा्य़ी । अगर इस ग्रंथि को बौद धर्म का धर्मशा्रि कहा जा्य तो अलत््योसकत न होग़ी । ्यह एक विशाल ग्रंथि है, जिसमें बौद धर्म क़ी विशद् विवेचना क़ी ग्य़ी है इस ग्रंथि क़ी भाषा ओजस्वी एवं सारगर्भित है ।
14 uoacj 2025