Mummatiya by Dharmendra Rajmangal Mummatiya by Dharmendra Rajmangal | Page 76
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पीछे हि जाती है . िन िें आता है कक उसे कुछ हुआ तो बच्चों का क्या होगा?
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किला अपने गााँव िें आ चुकी थी. लोग आ आ कर पूींछ रहे थे कक टदशा की शादी कैसी हुई . लड़का कैसा
था. शोभराज ने बटढया शादी की या नही? क्या ववदा होते सिय टदशा रोई थी. किला क्या कहती. लोगों
से कहती रही सब िीक हो गया. उसे पता था कक ये लोग उसकी बातों का ज्यादा यकीन नही करें गे . कफर
बताने से फायदा ही क्या है ?
कुछ टदनों बाद टदशा किला के पास घूिने आई तो उसने बताया कक श्जस लडके से उसकी शादी हुई ह
वो एक टदहाड़ी िजद र ू है . जो रोज किाता और खाता है . ससुराल िें घर भी िीक से नही बना हुआ .
बस खाना पीना चल रहा है तथा शोभराज ने जो सािान उसकी ससुराल वालों को टदया था वो सब पुराना
सािान था. श्जसे शोभराज कवाडी को दे ने वाला था. शोभराज ने उसकी शादी इस घर िें की ही इसमलए
थी कक कुछ भी खचच न करना पड़े और टदशा की श्जन्दगी भी खराब हो जाए.
शोभराज और आटदराज आपस िें ख श
थे लेककन इन लोगों को तननक भी खबर नही थी कक इन लोगों
ने अपनी चालों को काियाब करने के मलए ककतने जीवनों को खराब कर टदया था. किला को बबाचद करन
के चक्कर िें इन लोगों ने टदशा की बमल चढ़ा दी थी.
लेककन इतने पर भी टदशा अपनी िााँ किला को हर बात का दोषी सिझती थी और किला अपनी ककस्त्ित
को. ककन्तु ये कोई नही जानता था कक इस सब का असली दोषी कौन था? ककसने इन दोनों श्स्त्रयों को
तलवार की धार पर चलने के मलए िजबूर कर टदया था.
ककसने किला को ववधवा और उसके बच्चों को अनाथ कर टदया था. क्योंकक लोग तो कहते थे कक ये सब
भगवान ने पहले ही मलख टदया था. कफर तो शायद भगवान ही इस सब का दोषी था.
{समाप्त}