May 2026_DA | Page 32

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बनवाया गया एक मंदिर है । 18 फीट ऊूँचा शिवलिंग है वहाँ । वहाँ मैंने पूजा की और धयान लगाया, जो कि हमें करना ही चाहिए । परंतु मैंने वहाँ निहित विज्ान को भी जानने का प्रयास किया । पतथर का बना शिवलिंग आज भी चमक रहा है, जबकि वह हजार वर्ष से अधिक पुराना था । कैसे चमक रहा है । आज हम मकानों को चमकाने के लिए पेंट लगाते हैं और वह पेंट 3-4 वर्ष में फीका पड़ जाता है । फिर वह शिवलिंग हजार वर्ष से कैसे चमक रहा है? पूछताछ करने पर पता चला कि उस पर एक प्रकार का लेप चढ़ाया हुआ है । सोचने की बात यह है कि हमें आज से हजार वर्ष पहले वह कला आती थी जिसमें पतथर पर ऐसी परत चढ़ाई जा सकती थी, जो हजारों वर्ष तक उसे चमकीला बनाए रखे । आज उस कला का पता चले तो उसका कितना लाभ हमें हो सकता है? इसी प्रकार अपने यहाँ लोहे पर ऐसी परत चढ़ाई जाती थी कि उस पर जंग नहीं लगता था । आज वह तकनीक हमारे उद्योग जगत को मिल जाए तो सोचिए कया हो सकता है? जंगरोधक कहने की आि्यकता ही समापत हो जाएगी । भारत का लोहा है, तो जंग नहीं लगेगा, यह वि्िास दुनिया के मन में जम जाएगा । वि्िगुरु कहने की पहल ऐसे होती है ।
प्शासनिक व राजनीतिक सिद्धांतों को समझना जरूरी
यदि हम राजनीतिक सिद्धांतों की बात करें तो हमारे यहाँ रामराजय की संकलपना विकसित हुई है । रामराजय की बात करते ही एक भाव मन में आता है कि ऐसा राजय जहाँ कोई दुखी नहीं, सब सुखी होते थे । परंतु ऐसा तो था नहीं । रामायण को यदि हम पढ़ें तो उसमें दुखी और बहुत दुखी लोग भी हैं । वहाँ उन्नति भी है और अशांति भी है । श्ीराम यह सब कैसे संभालते हैं? यदि हम उनके राजनीतिक सिद्धांतों को समझ लें तो हमारी आज की बहुत सारी परेशानियाँ दूर हो सकती हैं । श्ी राम राजा भरत को कहते हैं कि पुरोहितों का धयान रखना कि उनके पास यज् की सामग्ी कभी कम न पड़े
और यह भी धयान रखना कि वे नियमित रूप से यज् कर रहे हों । वह यज् भगवान की प्राशपत के लिए नहीं किया जा रहा है, वह किया जा रहा है पर्यावरण की शुद्धता के लिए । तो पर्यावरण की चिंता राजय कर रहा है । श्ीराम के समय में कोषागार है, अधिवकता हैं, सेनाएं हैं । लेकिन हमारे श्ीराम मंदिरों में बंद हैं । हमारे पास उनकी पूजा करने के लिए 5, 11, 51 दीपक रामनवमी त्यौहार आदि तो हैं, परंतु उनके विचारो पर चिंतन करने की प्रहरिया नहीं है । श्ीराम की पूजा हमें करनी चाहिए. आखिर हम उनकी पूजा
नहीं करेंगे तो किनकी करेंगे, परंतु उनके प्रशासनिक सिद्धांतों पर भी हमें धयान देना चाहिए ।
अन्तयोदय थी श्ीराम के प्शासन की विशेषता
श्ीराम के प्रशासन की विशेषता कया थी? अनतयोदय । एक सामानय से धोबी की बात को भी सम्ाट सुनता था । आज वह वयिसथा कयों नहीं लागू हो सकती? आज सड़कों पर धरने प्रदर्शन हो रहे हैं । उनमें विद्रोह और असुरक्षा
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